केदारनाथ पैदल मार्ग पर बादल फटने के बाद भीषण भूस्खलन, बदरीनाथ के तप्त कुंड में दो महिला श्रद्धालुओं की मौत

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में केदारनाथ पैदल मार्ग पर चिरबासा हेलीपैड के पास बादल फटने के बाद भारी मलबे के कारण यात्रा बाधित हुई है। वहीं, बदरीनाथ धाम के तप्त कुंड में स्नान के दौरान राजस्थान की दो महिला तीर्थयात्रियों की जान चली गई है।

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में मौसम का मिजाज एक बार फिर बिगड़ गया है, जिसका सीधा असर केदारनाथ धाम की पैदल यात्रा पर पड़ा है। शुक्रवार को तड़के सुबह चिरबासा हेलीपैड के नजदीक अचानक बादल फटने की घटना सामने आई है। इस प्राकृतिक आपदा के बाद क्षेत्र में भीषण भूस्खलन हुआ, जिसके कारण केदारनाथ पैदल मार्ग का एक बड़ा हिस्सा मलबे और भारी-भरकम बोल्डरों की चपेट में आ गया। प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से तुरंत कदम उठाते हुए यात्रा को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया था। हालांकि, अब पैदल यात्रियों के लिए मार्ग को दोबारा खोल दिया गया है, लेकिन घोड़े और खच्चरों की आवाजाही पर अभी भी प्रतिबंध लागू है।

चिरबासा हेलीपैड के पास मलबे का अंबार

स्थानीय सूत्रों और प्रशासनिक अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार की सुबह तड़के रुद्रप्रयाग जिले के पहाड़ी इलाकों में मौसम ने अचानक करवट बदली। चिरबासा हेलीपैड के समीप हुए इस बादल फटने की घटना की वजह से लगभग 150 मीटर के लंबे दायरे में भारी भूस्खलन देखने को मिला। पहाड़ों से टूटकर गिरे विशालकाय बोल्डर और टनों मलबे ने मुख्य पैदल मार्ग को पूरी तरह से अवरुद्ध कर दिया। जैसे ही इस घटना की जानकारी जिला प्रशासन को मिली, तुरंत ही आपदा प्रबंधन की टीमों को राहत और बचाव कार्य के लिए मौके पर रवाना किया गया।

प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से रोकी यात्रा

आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने इस संकटपूर्ण स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस प्राकृतिक हादसे में फिलहाल किसी भी तरह की जनहानि या किसी व्यक्ति के हताहत होने की कोई खबर नहीं है। यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए प्रशासन ने एहतियात के तौर पर कुछ समय के लिए यात्रा को रोक दिया था। अधिकारियों द्वारा पूरी स्थिति की गंभीरता से समीक्षा करने और मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बाद, पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं को आगे बढ़ने की अनुमति दे दी गई है।

रास्ता साफ करने का अभियान जारी

पैदल यात्रियों के लिए रास्ता खोल दिए जाने के बावजूद, सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए घोड़े और खच्चरों के संचालन को पूरी तरह से बंद रखा गया है। आपदा प्रबंधन और लोक निर्माण विभाग की टीमें भारी मशीनों के साथ पैदल मार्ग से विशाल पत्थरों और मलबे को हटाने के काम में युद्धस्तर पर जुटी हुई हैं। प्रशासन लगातार पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम के बदलते मिजाज और भूस्खलन वाले संवेदनशील स्थानों पर पैनी नजर बनाए हुए है। अधिकारियों ने केदारनाथ जाने वाले सभी तीर्थयात्रियों से अत्यंत सावधानी बरतने और मौसम की चेतावनी को ध्यान में रखकर ही अपनी यात्रा आगे बढ़ाने की अपील की है।

बदरीनाथ धाम से दुखद खबर: दो श्रद्धालुओं की मौत

इस बीच, उत्तराखंड के एक अन्य प्रसिद्ध तीर्थस्थल बदरीनाथ धाम से बेहद दुखद खबर सामने आई है। यहाँ के प्रसिद्ध तप्त कुंड (गर्म पानी के औषधीय कुंड) में स्नान करने के दौरान राजस्थान से आईं दो बुजुर्ग महिला श्रद्धालुओं की अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उनकी मृत्यु हो गई। स्थानीय पुलिस प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक, यह दर्दनाक घटना सुबह के समय बदरीनाथ मंदिर परिसर के समीप बने गर्म पानी के तप्त कुंड में हुई। दोनों महिला श्रद्धालु स्नान करते समय अचानक अचेत होकर गिर पड़ीं।

वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों और स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को इस बात की सूचना दी। इसके तत्काल बाद दोनों महिलाओं को 108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा की मदद से नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों की टीम ने दोनों बुजुर्ग महिलाओं की गहन जांच की, लेकिन दुर्भाग्यवश उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। इस दुखद घटना के बाद दोनों महिलाओं के परिवारों में कोहराम मच गया है और पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई में जुट गई है।

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