गेंदा फूल की खेती से किसान की चमकी किस्मत, कोलकाता से बीज मंगाकर कमा रहे लाखों

गोंडा के वजीरगंज ब्लॉक के एक युवा किसान ने पारंपरिक खेती छोड़कर गेंदा फूल की उन्नत खेती अपनाई और अब उनकी फसल अयोध्या तक पहुंच रही है। कोलकाता से मंगाई गई वैरायटी से उन्हें लाखों रुपए की आमदनी हो रही है।

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के वजीरगंज विकासखंड स्थित हरिहरपुर गांव के एक युवा किसान ने पारंपरिक खेती का रास्ता छोड़कर गेंदा फूल की उन्नत खेती को अपनाया है, और इससे वे अच्छी कमाई कर रहे हैं। बनारसी गेंदा के फूलों की उनकी फसल अब अयोध्या तक भेजी जा रही है। इस नई पहल ने न केवल उन्हें बेहतर मुनाफा दिलाया है, बल्कि आसपास के किसान भी इससे प्रेरणा ले रहे हैं।

पारंपरिक खेती से बदलाव का सफर

प्रगतिशील किसान सुशील निषाद ने बताया कि पहले वे गेहूं, धान और अन्य पारंपरिक फसलें उगाते थे। इन फसलों में मेहनत तो काफी लगती थी, लेकिन उससे होने वाली आमदनी संतोषजनक नहीं थी। इसी वजह से उन्होंने कुछ नया करने का मन बनाया। पूरी जानकारी जुटाने के बाद उन्होंने गेंदा फूल की खेती शुरू की। शुरुआत में उन्होंने प्रयोग के तौर पर कम जमीन पर फूल लगाए, लेकिन जब उत्पादन और मुनाफा अच्छा मिला तो उन्होंने खेती का दायरा बढ़ा दिया।

सालभर बनी रहती है फूलों की मांग

सुशील निषाद के मुताबिक बाजार में गेंदा फूल की मांग पूरे साल बनी रहती है। इसका इस्तेमाल पूजा-पाठ, मंदिरों की सजावट, शादी-विवाह, धार्मिक कार्यक्रमों और दूसरे आयोजनों में बड़े पैमाने पर होता है। खासकर अयोध्या में लगातार धार्मिक गतिविधियां चलती रहती हैं, जिससे वहां फूलों की डिमांड हमेशा बनी रहती है। इसी मांग को देखते हुए वे अपने खेत में तैयार फूलों की आपूर्ति अयोध्या भेज रहे हैं।

कितनी जमीन पर हो रही खेती

सुशील बताते हैं कि इस समय वे लगभग 2 से 2.5 बीघा जमीन पर गेंदा फूल की खेती कर रहे हैं। चूंकि इस खेती से उन्हें अच्छी आय हो रही है, इसलिए आगे चलकर वे रकबा और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।

कम लागत, बेहतर मुनाफा

सुशील के अनुसार 2 से 2.5 बीघा में गेंदा की खेती पर करीब 4,000 से 5,000 रुपए की लागत आई है। उनका कहना है कि इस खेती में लागत तुलनात्मक रूप से कम रहती है, जबकि बाजार में फूलों का भाव अच्छा मिल जाता है। समय पर सिंचाई, उचित खाद और देखभाल से उत्पादन भी बेहतर होता है। फूल तोड़ने के बाद उन्हें स्थानीय मंडियों और व्यापारियों के जरिए अयोध्या भेजा जाता है।

पारंपरिक फसलों से कहीं ज्यादा आमदनी

गेंदा की खेती से सुशील को पारंपरिक फसलों के मुकाबले कहीं अधिक आय हो रही है। यही कारण है कि अब वे इस खेती को और विस्तार देने की तैयारी में हैं। उनका मानना है कि फूलों की खेती किसानों के लिए एक लाभकारी विकल्प साबित हो सकती है, क्योंकि इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है।

कितने महीने में तैयार होती है फसल

सुशील निषाद बताते हैं कि गेंदा फूल की फसल लगभग 3 से 4 महीने में तैयार हो जाती है। उन्होंने जानकारी दी कि गेंदा के पौधे उन्होंने कोलकाता से मंगाए हैं। यह वैरायटी काफी अच्छी है और गोंडा की जमीन में इसका उत्पादन भी बेहतर मिल रहा है। उनके अनुसार 3 से 4 महीने की इस फसल से उनकी आय लाखों रुपए तक पहुंच जाती है।

दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा

सुशील निषाद की सफलता को देखते हुए आसपास के कई किसान भी फूलों की खेती की ओर रुचि दिखा रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक खेती के साथ-साथ फूलों की खेती अपनाने से किसानों की आमदनी में अच्छी बढ़ोतरी हो सकती है। अपनी मेहनत और नई सोच के दम पर गोंडा का यह युवक खेती में सफलता की नई मिसाल बन रहा है और दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।

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