फर्जी कंपनी का जाल और करोड़ों की ठगी
बिहार के मुजफ्फरपुर में सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और रोजगार के नाम पर एक बड़े धोखाधड़ी के मामले का खुलासा हुआ है। यहाँ मशरूम उत्पादन और स्मार्ट हट स्थापित करने के नाम पर तीन जिलों की करीब 200 जीविका दीदियों से करोड़ों रुपये ऐंठे गए हैं। मुजफ्फरपुर पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में सामने आया है कि अब तक लगभग 2.67 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया गया है। आरोपी न केवल मुजफ्फरपुर बल्कि सीतामढ़ी और गोपालगंज में भी ठगी के मामलों में वांछित रहा है।
स्मार्ट हट के नाम पर लुभावने वादे
पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी आशुतोष मंगलम है जो काजी मोहम्मदपुर थाना क्षेत्र का निवासी है। वह अपनी बहन शिवांगी के साथ मिलकर एक फर्जी कंपनी संचालित कर रहा था। इस गिरोह द्वारा लोगों को मशरूम उत्पादन के लिए स्मार्ट हट बनवाने, आवश्यक मशीनरी उपलब्ध कराने और नियमित आय का झांसा दिया जाता था। पीड़ितों को विश्वास दिलाया जाता था कि मात्र 90 से 120 दिनों के भीतर उनका स्मार्ट हट बनकर तैयार हो जाएगा और काम शुरू हो जाएगा। साथ ही, उन्हें हर महीने 11 हजार से 13 हजार रुपये तक की मासिक आय का भरोसा दिया गया था। यही नहीं, जरूरत पड़ने पर बैंक की EMI भरने की जिम्मेदारी भी कंपनी लेने का दावा करती थी।
जीविका दीदियों के नाम पर अवैध लोन
जांच के दौरान पता चला कि बोचहां थाना क्षेत्र में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के अंतर्गत 60 जीविका दीदियों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर बिहार ग्रामीण बैंक से 1 करोड़ 18 लाख 58 हजार 727 रुपये का ऋण निकाल लिया गया। वहीं, मुसहरी थाना क्षेत्र में भी इसी प्रकार का खेल खेलते हुए 60 अन्य जीविका दीदियों के नाम पर 72 लाख 67 हजार 25 रुपये का लोन पास करवाकर गबन किया गया। इन धोखाधड़ी के मामलों में संबंधित थानों में बोचहां कांड संख्या 225/25 और मुसहरी कांड संख्या 219/25 दर्ज की गई हैं।
चेक बाउंस का खेल
ठगी का सिलसिला केवल सरकारी लोन तक सीमित नहीं था। सरैया थाना क्षेत्र की एक महिला से भी मशरूम हट बनाने के एवज में 21 लाख रुपये ले लिए गए। जब महिला ने अपने पैसों की मांग की, तो आरोपी पक्ष ने भुगतान के लिए चार चेक थमा दिए। लेकिन बैंक में पर्याप्त राशि न होने के कारण सभी चेक बाउंस हो गए। इस गंभीर मामले को लेकर सरैया थाना में कांड संख्या 52/26 दर्ज किया गया है।
अन्य जिलों में भी फैला नेटवर्क
विशेष जांच टीम की पड़ताल में यह स्पष्ट हुआ है कि आशुतोष मंगलम ने केवल मुजफ्फरपुर ही नहीं, बल्कि पड़ोसी जिलों सीतामढ़ी और गोपालगंज में भी इसी तरह की वारदातें की हैं। अलग-अलग थानों में दर्ज पांच मामलों को मिलाकर कुल धोखाधड़ी का आंकड़ा 2.67 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है।
विशेष टीम की कार्रवाई
वरीय पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्रा के निर्देश पर एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया था। तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने मुख्य सरगना आशुतोष मंगलम को धर दबोचा। वह दामुचक का रहने वाला है और अपनी बहन शिवांगी के साथ मिलकर सुनियोजित तरीके से यह पूरा रैकेट चला रहा था। पुलिस ने उसके पास से दो मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। जांच में पता चला है कि इन लोगों ने 'स्मार्ट ग्रेविटी एग्रोटेक प्राइवेट लिमिटेड' नाम की एक फर्जी कंपनी बनाई थी, जिसका इस्तेमाल ग्रामीण महिलाओं को झांसे में लेने, फर्जी लोन पास कराने और चेक बाउंस कराने में किया जाता था।
पुलिस की आगे की कार्रवाई
ग्रामीण एसपी राजेश सिंह प्रभाकर ने खुलासा किया कि बोचहां और मुसहरी के आकांक्षी प्रखंडों की जीविका दीदियों को निशाना बनाकर बड़ी राशि का गबन किया गया था। इसके अलावा, सीतामढ़ी के मुफस्सिल थाना क्षेत्र में 16 लाख रुपये और गोपालगंज के थावे थाना क्षेत्र में 39 लाख 6 हजार 650 रुपये की ठगी के मामले भी दर्ज हैं। पुलिस अब मुख्य आरोपी आशुतोष से कड़ी पूछताछ कर रही है। साथ ही, उसकी बहन शिवांगी और अन्य फरार सहयोगियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर सघन छापेमारी की जा रही है। पुलिस का कहना है कि इस मामले में शामिल किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही पूरे नेटवर्क का सफाया किया जाएगा।
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