चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा पर सस्पेंस के पीछे की सच्चाई, बीजिंग में 27 अगस्त को क्या हुआ था?

दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन 2026 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आगमन को लेकर मचे सस्पेंस का पर्दाफाश हो गया है, जिसकी तैयारियां काफी पहले ही शुरू हो गई थीं।

दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन का मंच और शी जिनपिंग का दौरा

भारत की राजधानी दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन 2026 का भव्य आयोजन किया जा रहा है, जिसमें हिस्सा लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत पहुंच रहे हैं। बीजिंग ने आधिकारिक तौर पर इस यात्रा की पुष्टि कर दी है। हालांकि, घटनाक्रम के अनुसार पिछले कुछ दिनों तक शी जिनपिंग के भारत आने को लेकर एक भारी सस्पेंस बना हुआ था। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा गर्म थी कि क्या शी जिनपिंग वाकई भारत आएंगे या अंतिम समय में कोई बदलाव होगा। लेकिन गुरुवार को सामने आई आधिकारिक सूचना ने सभी अटकलों पर पूर्ण विराम लगा दिया। इस देरी को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे कि क्या चीन किसी कूटनीतिक माइंडगेम में उलझा है या बीजिंग की ओर से कोई असमंजस है।

27 अगस्त को बीजिंग में क्या हुआ था?

हालिया खुलासों से अब यह साफ हो गया है कि चीन का रुख पिछले कई हफ्तों से स्पष्ट था। भारत सरकार को काफी पहले ही यह सूचना मिल चुकी थी कि शी जिनपिंग ब्रिक्स सम्मेलन में शिरकत करेंगे। बीजिंग में पर्दे के पीछे से यात्रा की पूरी तैयारी चल रही थी। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 27 अगस्त का दिन इस प्रक्रिया में बेहद महत्वपूर्ण रहा। उस तारीख को चीन ने बीजिंग में स्थित भारतीय दूतावास के साथ आधिकारिक संपर्क किया और शी जिनपिंग के साथ आने वाले प्रतिनिधिमंडल के लिए वीजा जारी करने का अनुरोध किया। इससे यह स्पष्ट होता है कि बीजिंग ने काफी पहले से ही अपनी तैयारियों को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया था, और इस यात्रा का फैसला अचानक नहीं लिया गया था।

घोषणा में देरी के मायने

भले ही चीन ने वीजा की प्रक्रिया 27 अगस्त को ही पूरी कर ली थी, लेकिन यात्रा की सार्वजनिक घोषणा में देरी निश्चित रूप से कई सवाल पैदा करती है। क्या यह चीन की तरफ से एक कूटनीतिक देरी थी या महज एक प्रशासनिक प्रक्रिया? विश्लेषकों का मानना है कि घोषणा में देरी और जमीनी स्तर पर यात्रा की तैयारियों को आपस में नहीं मिलाना चाहिए। दोनों देशों के राजनयिक पर्दे के पीछे लगातार संपर्क में थे। 27 अगस्त का औपचारिक वीजा अनुरोध इस बात का ठोस प्रमाण है कि बीजिंग ने अपनी मंशा स्पष्ट कर दी थी और भारत को अंधेरे में नहीं रखा गया था।

मोदी और जिनपिंग की संभावित मुलाकात

शी जिनपिंग आज आधी रात के बाद भारत पहुंच रहे हैं। ऐसी प्रबल संभावना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच शनिवार को एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता होगी। यह बैठक ब्रिक्स के बहुपक्षवाद पर आधारित सत्र और प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शाम 7:30 बजे आयोजित होने वाले रात्रिभोज के बीच हो सकती है। शी जिनपिंग इस विशेष रात्रिभोज में भी हिस्सा लेंगे। यह मुलाकात बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि 2019 के बाद से यह शी जिनपिंग की पहली भारत यात्रा है। गलवान घाटी की घटना के बाद दोनों देशों के रिश्तों में जो कड़वाहट आई थी, उसे देखते हुए यह बैठक रिश्तों को सुधारने का एक बड़ा अवसर हो सकती है।

चर्चा के मुख्य बिंदु

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की बैठक केवल एक शिष्टाचार भेंट तक सीमित नहीं रहेगी। इसमें व्यापारिक संतुलन, बाजार तक पहुंच और भरोसेमंद सप्लाई चेन जैसे गंभीर आर्थिक विषयों पर चर्चा होने की पूरी उम्मीद है। इसके साथ ही, सीमा पर शांति बनाए रखना और पूर्वी लद्दाख में 2020 के सैन्य गतिरोध के बाद उपजे तनाव को कम करना भी चर्चा के एजेंडे में सबसे ऊपर रहेगा। दोनों नेता भविष्य की रणनीति पर चर्चा कर सकते हैं ताकि दोनों देशों के बीच संबंधों को एक नई दिशा मिल सके।

2020 के बाद बदले हालात और कूटनीति

भारत और चीन के रिश्तों में 2020 के बाद से एक लंबा दौर ऐसा रहा है जब दोनों सेनाएं सीमा पर आमने-सामने थीं। हालांकि, समय के साथ बातचीत का सिलसिला बहाल हुआ। पिछले साल रूस के कजान में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात ने रिश्तों में जमी बर्फ को पिघलाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। उस बैठक के बाद दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय बातचीत फिर से शुरू हुई और सीमा विवाद के समाधान के लिए विशेष प्रतिनिधियों को सक्रिय किया गया।

पिछले साल की चीन यात्रा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं पिछले वर्ष एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन की यात्रा की थी। वहां शी जिनपिंग के साथ उनकी द्विपक्षीय बातचीत हुई, जिसने दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास को बहाल करने की दिशा में काम किया। उस समय दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया था कि भारत और चीन को एक-दूसरे का प्रतिद्वंद्वी मानने के बजाय एक साझेदार की तरह काम करना चाहिए। अब शी जिनपिंग की यह भारत यात्रा उसी सकारात्मकता को और आगे बढ़ाने का काम कर सकती है।

चीन के लिए क्यों अहम है यह दौरा?

शी जिनपिंग का भारत आना केवल भारत-चीन संबंधों के लिए ही नहीं, बल्कि ब्रिक्स संगठन के भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण है। अगले वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता चीन को सौंपी जाएगी। ऐसे में भारत में आयोजित इस सम्मेलन में शी जिनपिंग की उपस्थिति चीन के लिए काफी मायने रखती है। गौर करने वाली बात है कि पिछले साल ब्राजील में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन में शी जिनपिंग व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हुए थे। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी आमने-सामने की यह बातचीत न केवल दोनों देशों के लिए बल्कि संपूर्ण ब्रिक्स समूह की भविष्य की राजनीति और प्रभाव को निर्धारित करने वाली साबित हो सकती है।

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