गणेश चतुर्थी 2026: बप्पा के स्वागत के लिए अपनाएं ये वास्तु नियम, घर में बरसेगी सुख और समृद्धि

गणेश चतुर्थी पर बप्पा की स्थापना के लिए वास्तु के विशेष नियमों का पालन करना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य के अनुसार इन उपायों को अपनाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और गणपति का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।

गणेश चतुर्थी का महत्व और शुभ योग

गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर भक्त अपने घरों में बप्पा की प्रतिमा को पूरे विधि-विधान के साथ विराजमान करते हैं। इस साल का उत्सव और भी खास माना जा रहा है क्योंकि इस दिन रवि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक के 10 दिनों की अवधि में कई विशेष ग्रहों के योग का निर्माण हो रहा है। वर्तमान में गुरु कर्क राशि में अपनी उच्च स्थिति में हैं, जबकि शनि मीन राशि में वक्री अवस्था में गोचर कर रहे हैं। इन ग्रह स्थितियों के कारण इस बार की गणेश चतुर्थी आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ फलदायी मानी जा रही है।

गणेश चतुर्थी की तिथि और समय

वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि की शुरुआत 14 सितंबर 2026, दिन सोमवार को सुबह 7 बजकर 6 मिनट पर हो रही है। यह तिथि अगले दिन यानी 15 सितंबर 2026, मंगलवार को सुबह 7 बजकर 44 मिनट पर समाप्त होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश का प्राकट्य चतुर्थी तिथि के मध्याह्न काल में हुआ था, इसलिए इस वर्ष गणेश चतुर्थी का महापर्व 14 सितंबर को ही श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा। उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज का कहना है कि यदि भक्त बप्पा के स्वागत के लिए घर की सजावट में कुछ वास्तु नियमों का ध्यान रखें, तो इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और सकारात्मकता का वास होता है।

मुख्य द्वार की सजावट के वास्तु नियम

गणेश चतुर्थी पर घर के मुख्य द्वार को सजाना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यहीं से सुख और समृद्धि का प्रवेश होता है। वास्तु के सिद्धांतों के अनुसार, मुख्य द्वार पर आम के पत्तों का तोरण लगाना बेहद शुभ माना जाता है। इसके साथ ही द्वार के दोनों ओर कुमकुम या रोली से स्वास्तिक का चिह्न बनाना चाहिए। घर की दहलीज पर सुंदर और पारंपरिक रंगोली बनाना न केवल देखने में अच्छा लगता है, बल्कि यह सौभाग्य को भी आकर्षित करता है। ऐसा करने से परिवार में हमेशा खुशहाली बनी रहती है और गणपति की कृपा से कष्ट दूर होते हैं।

प्रतिमा स्थापना और चौकी के लिए निर्देश

मंगलमूर्ति भगवान गणेश की प्रतिमा को घर में स्थापित करते समय लकड़ी से बनी चौकी का ही उपयोग करना चाहिए। वास्तु शास्त्र में लकड़ी की चौकी को सबसे शुद्ध माना गया है। प्रतिमा को स्थापित करते समय चौकी को घर की उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में रखना चाहिए, जिसे ईशान कोण कहा जाता है। इसके अलावा, चौकी को सीधे जमीन पर रखने के बजाय उस पर पीले या लाल रंग का स्वच्छ वस्त्र अवश्य बिछाएं। भगवान गणेश के लिए इस प्रकार की व्यवस्था करना अत्यंत फलदायी और उत्तम माना गया है।

रंगों के चयन में सावधानी

घर की सजावट करते समय रंगों का सही चुनाव करना भी वास्तु का एक मुख्य हिस्सा है। गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर घर को सजाने के लिए पीले, लाल और हरे जैसे शुभ, शांत और सात्विक रंगों का प्रयोग करने की सलाह दी जाती है। इन रंगों से मन में प्रसन्नता बनी रहती है और भगवान गणेश भी इनसे आकर्षित होते हैं। इसके विपरीत, काले या गहरे नीले जैसे गहरे रंगों के उपयोग से पूरी तरह बचना चाहिए। वास्तु के अनुसार, इन रंगों को शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता है, इसलिए सजावट में इनका प्रयोग करने से परहेज करें। इन छोटे लेकिन महत्वपूर्ण वास्तु नियमों का पालन करके आप बप्पा के स्वागत की तैयारी को और भी अधिक प्रभावी बना सकते हैं।

https://hindi.news18.com/news/dharm/decorate-home-according-to-vastu-shastra-on-ganesh-chaturthi-2026-local18-10824401.html