बागेश्वर: 60 साल पुराने मोटर पुल को मिलेगी नई पहचान, डेढ़ लेन के नए निर्माण की तैयारी तेज

उत्तराखंड के बागेश्वर में सरयू नदी पर बना छह दशक पुराना मोटर पुल अब बदलेगा। बढ़ते यातायात के दबाव को देखते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग ने नए पुल के निर्माण के लिए तकनीकी परीक्षण शुरू कर दिया है।

बागेश्वर में पुल की बदलेगी तस्वीर

बागेश्वर जिला मुख्यालय में स्थित सरयू नदी का पुराना मोटर पुल जल्द ही एक नई शक्ल में दिखाई देगा। यह पुल न केवल शहर की यातायात व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि कई दशकों से लोगों की आवाजाही का मुख्य केंद्र भी रहा है। अब प्रशासन ने इस पुराने ढांचे की जगह एक नया और चौड़ा पुल बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग ने इस दिशा में अपने कदम आगे बढ़ा दिए हैं, ताकि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यातायात को सुगम बनाया जा सके।

तकनीकी परीक्षण और कार्य की शुरुआत

नए पुल के निर्माण की प्रारंभिक प्रक्रिया में राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग ने तकनीकी जांच शुरू कर दी है। विभागीय विशेषज्ञों द्वारा पुराने पुल के एबटमेंट और उसके आसपास की मिट्टी का गहन परीक्षण किया जा रहा है। यह परीक्षण इसलिए भी आवश्यक है ताकि यह समझा जा सके कि नई संरचना की नींव कितनी मजबूत होनी चाहिए। अधिकारियों का कहना है कि मिट्टी की जांच के बाद पुल के डिजाइन पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इस डिजाइन में नदी के बहाव, नींव की गहराई और निर्माण की मजबूती को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

1962 से जुड़ा है पुल का इतिहास

स्थानीय जानकारों और वरिष्ठ पत्रकारों के अनुसार, यह पुल वर्ष 1962 में बनकर तैयार हुआ था। उस दौर में भारत और चीन के बीच हुए युद्ध के बाद सीमावर्ती इलाकों तक सड़क संपर्क को बेहतर और सुदृढ़ बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा था। उस समय सरयू और गोमती नदी पर बने ये पुल केवल आम जनता की सुविधा के लिए ही नहीं, बल्कि सामरिक दृष्टिकोण से भी बहुत महत्वपूर्ण थे। पिछले छह दशकों में स्थिति काफी बदल गई है। वर्तमान में इन पुलों पर वाहनों का भार उस समय की तुलना में कई गुना अधिक हो चुका है।

लंबे समय से की जा रही थी मरम्मत

इस पुराने पुल के साथ सुरक्षा संबंधी समस्याएं पहले भी सामने आती रही हैं। वर्ष 2014 के दौरान पुल में दरारें पड़ने और संरचना को नुकसान पहुंचने की खबरें काफी चर्चा में रही थीं। उस समय प्रशासन ने पुल के फर्श की मरम्मत करने और लोहे की प्लेटें लगाने जैसे अस्थायी समाधान अपनाए थे, ताकि आवागमन जारी रह सके। हालांकि, इन मरम्मत कार्यों के बावजूद पुल पर बढ़ते वाहनों के दबाव को देखते हुए एक स्थायी और मजबूत पुल की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।

भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध

पुल की जर्जर स्थिति और सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2026 में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया था। तकनीकी जांच के बाद विशेषज्ञों ने इस पर भारी वाहनों के गुजरने को जोखिम भरा माना था, जिसके चलते भारी गाड़ियों की आवाजाही पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया। यह निर्णय स्पष्ट करता है कि छह दशक पुरानी संरचना अब अत्यधिक यातायात भार को झेलने में सक्षम नहीं है, जिसके कारण ही नए पुल की मांग ने जोर पकड़ा है।

आवाजाही और कनेक्टिविटी के नए आयाम

प्रस्तावित नया पुल डेढ़ लेन का होगा, जिससे बागेश्वर के स्थानीय निवासियों को बड़ी राहत मिलेगी। यह पुल खाड़ी बाजार को दुग बाजार और नुमाइशखेत जैसे प्रमुख इलाकों से जोड़ता है। इसके अलावा, पिथौरागढ़ और सीमा से सटे अन्य क्षेत्रों की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए भी यह एक मुख्य मार्ग है। नए पुल के बनने से पुराने ढांचे पर निर्भरता कम हो जाएगी और यातायात सुचारू रूप से चल सकेगा। सरयू नदी पर स्थित 1913 में बना ऐतिहासिक झूला पुल पहले ही बागेश्वर की विरासत के रूप में मौजूद है, और अब 1962 के इस मोटर पुल के स्थान पर आने वाला नया निर्माण भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने वाला एक बड़ा कदम साबित होगा।

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