अल नीनो के बीच भारत का मौसम
दुनिया भर में अल नीनो के प्रभाव को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं और मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बार इसका असर दशकों के बाद काफी प्रबल है। वैश्विक स्तर पर इसके कारण बारिश में कमी और सूखे की स्थिति बनने की आशंका है, जिससे भविष्य में खाद्य संकट का खतरा भी पैदा हो सकता है। हालांकि, भारत के संदर्भ में बात करें तो यहां की स्थानीय मौसमी स्थितियों की वजह से अल नीनो का प्रभाव अब तक न के बराबर दर्ज किया गया है। मौसम विभाग का कहना है कि देश में इस समय दो प्रमुख वेदर सिस्टम सक्रिय हैं, जो मानसून की बारिश को गति दे रहे हैं।
भारी बारिश का अनुमान और मौसम प्रणालियां
मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में कम दबाव का क्षेत्र बनने से पूर्वी भारत के राज्यों में बारिश की गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। 11 सितंबर को ओडिशा में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश के साथ भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और तटीय आंध्र प्रदेश के क्षेत्रों में भी भारी बारिश की संभावना है। एक महत्वपूर्ण मौसम घटना के रूप में, कम दबाव वाले क्षेत्र से जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण समुद्र तल से लगभग 9.4 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला हुआ है और यह ऊंचाई के साथ दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर झुका हुआ है।
मानसून की मुख्य ट्रफ रेखा जम्मू, देहरादून, बरेली, डाल्टनगंज और दीघा से होकर गुजरते हुए बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के केंद्र तक पहुंच रही है। वहीं, रायालसीमा से तमिलनाडु होते हुए मन्नार की खाड़ी तक एक अन्य ट्रफ रेखा बनी है। इसके अतिरिक्त सौराष्ट्र और आसपास के क्षेत्रों के साथ-साथ उत्तर हरियाणा और दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर भी चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हैं। एक नया पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय हुआ है, जिसके प्रभाव से 16 सितंबर तक देश भर में बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है।
ओडिशा और छत्तीसगढ़ में अलर्ट
अगले 24 घंटों के दौरान ओडिशा में बारिश की तीव्रता सबसे अधिक रहने की संभावना जताई गई है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान है। पिछले 24 घंटों के आंकड़ों के अनुसार, गोपालपुर में 5 सेंटीमीटर, भुवनेश्वर में 3 सेंटीमीटर और बालासोर तथा पुरी में 2-2 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि 11 सितंबर को ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भारी से बहुत भारी बारिश का दौर रहेगा। ओडिशा में कहीं-कहीं अत्यंत भारी बारिश की भी आशंका है। छत्तीसगढ़ में 11 सितंबर को बहुत भारी और 12 सितंबर को भी कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। इसके बाद 13 से 16 सितंबर तक भी छिटपुट से लेकर कुछ स्थानों पर बारिश का क्रम जारी रह सकता है।
मध्य भारत में बारिश की स्थिति
मध्य प्रदेश के दोनों हिस्सों में बारिश का प्रभाव अलग-अलग समय पर देखने को मिलेगा। पूर्वी मध्य प्रदेश में 12 सितंबर तक अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में 11 और 13 सितंबर को भारी बारिश का अनुमान है। 12 सितंबर को पश्चिमी मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में बहुत भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। विदर्भ क्षेत्र में 11 से 14 सितंबर तक बारिश का विस्तार देखने को मिलेगा, जिसमें 11 और 12 सितंबर को भारी बारिश के संकेत हैं।
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत का हाल
उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 16 सितंबर तक व्यापक बारिश की संभावना है। पश्चिम बंगाल में 13 सितंबर तक और झारखंड तथा ओडिशा में 12 सितंबर तक व्यापक वर्षा हो सकती है। बिहार के लिए 16 सितंबर तक छिटपुट बारिश का दौर बना रह सकता है। पूर्वोत्तर राज्यों की बात करें तो अरुणाचल प्रदेश में 12 से 16 सितंबर के बीच व्यापक बारिश होगी। असम और मेघालय में 11, 12, 15 और 16 सितंबर को भारी बारिश होने का अनुमान है। नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 10 से 13 सितंबर तक व्यापक बारिश के आसार हैं और 12 से 15 सितंबर के बीच यहां भारी बारिश की भी संभावना जताई गई है।
उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत का पूर्वानुमान
उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश का दायरा आने वाले दिनों में बढ़ सकता है। उत्तराखंड में 11 से 14 सितंबर तक व्यापक बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है, जिसमें 13 सितंबर तक भारी बारिश भी हो सकती है। राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और पंजाब में 14 और 15 सितंबर को कुछ स्थानों पर भारी बारिश का अनुमान है। इस बदलाव के कारण दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर-पश्चिम भारत के बाकी हिस्सों में तापमान और मौसम की स्थिति में बदलाव महसूस किया जा सकेगा।
महाराष्ट्र और दक्षिण भारत की स्थिति
पश्चिम भारत में कोंकण और गोवा में 10 से 16 सितंबर तक काफी व्यापक बारिश होगी। मध्य महाराष्ट्र में 13 से 16 सितंबर और मराठवाड़ा में 12 और 13 सितंबर को व्यापक वर्षा का अनुमान है। गुजरात क्षेत्र में 12 से 15 सितंबर और सौराष्ट्र-कच्छ में 13 और 14 सितंबर को व्यापक बारिश होगी। इन क्षेत्रों में 12 से 14 सितंबर के दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जो झोंकों के दौरान 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं।
दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में तटीय आंध्र प्रदेश, केरल और माहे में 12 सितंबर तक व्यापक बारिश की संभावना है। तटीय आंध्र प्रदेश में 11 सितंबर को बहुत भारी बारिश हो सकती है। तेलंगाना में भी 11 सितंबर को भारी बारिश और तेज हवाओं की स्थिति बनी रह सकती है। तटीय आंध्र प्रदेश में 11 सितंबर को 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का थंडरस्क्वॉल अलर्ट भी है। देश में सबसे अधिक तापमान हाल ही में तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली एयरपोर्ट पर 39.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।
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