दिल्ली पुलिस के प्रशासनिक ढांचे में हाल ही में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। आगामी 9 सितंबर 2026 को विभाग द्वारा जारी आदेश के तहत 5 वरिष्ठ भारतीय पुलिस सेवा यानी IPS अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया गया है। इस पूरे फेरबदल में जिस एक नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह है साल 2021 बैच की बेहद होनहार और जांबाज IPS अधिकारी ईशा सिंह का। वर्तमान में दिल्ली पुलिस में DCP वेलफेयर के पद पर कार्यरत ईशा सिंह को अब अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपते हुए DCP लीगल सेल का नया प्रभार भी दिया गया है। अपनी कानूनी समझ और निडर पुलिसिंग शैली के लिए मशहूर ईशा सिंह की यह नई नियुक्ति उनके अब तक के शानदार करियर और कानून पर उनकी मजबूत पकड़ का जीवंत प्रमाण है।
हालांकि, ईशा सिंह की इस मुकाम तक पहुंचने की कहानी कोई सामान्य प्रशासनिक सफलता नहीं है। इस मुकाम के पीछे उनके परिवार का स्वाभिमान, अटूट ईमानदारी और व्यवस्था से न्याय पाने के लिए किया गया लंबा और कठिन संघर्ष छिपा हुआ है। महज़ साढ़े आठ साल की उम्र में जब आम बच्चे खेल-कूद में व्यस्त रहते हैं, तब ईशा ने अपने पिता को व्यवस्था के दबाव के कारण नौकरी छोड़ते देखा था। उसी नाजुक उम्र में इस बच्ची ने संकल्प लिया था कि वह बड़ी होकर खुद पुलिस बल का हिस्सा बनेगी और अपनी निष्पक्षता तथा ईमानदारी से व्यवस्था की खामियों को दूर करने का प्रयास करेगी।
सिस्टम से पिता की टक्कर और बचपन का वह अटूट संकल्प
बात साल 2004 की है, जब ईशा सिंह के पिता योगेश प्रताप सिंह ने व्यवस्था के भारी दबाव और अंदरूनी राजनीति से तंग आकर अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उस समय ईशा की उम्र मात्र 8.5 साल थी। योगेश प्रताप सिंह 1985 बैच के एक अत्यंत ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ IPS अधिकारी माने जाते थे। 1990 के दशक में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI में अपनी सेवा के दौरान उन्होंने कई बड़े और रसूखदार घोटालों का पर्दाफाश कर प्रशासनिक गलियारों में तहलका मचा दिया था। लेकिन ईमानदारी की राह इतनी आसान नहीं होती। उन्हें अपनी इस बेदाग ईमानदारी के बदले में भारी विरोध, प्रताड़ना और सिस्टम के असहयोग का सामना करना पड़ा।
अंततः हताश होकर उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया। नौकरी छोड़ने के बाद का समय परिवार के लिए और भी चुनौतीपूर्ण था। बिना किसी पेंशन और नियमित आय के, कई वर्षों तक उनका पूरा परिवार आर्थिक और मानसिक संघर्षों से गुजरता रहा। अपनी आंखों के सामने पिता को इस कठिन दौर से गुजरते देख छोटी सी ईशा के मन में व्यवस्था के प्रति आक्रोश नहीं, बल्कि उसे सुधारने की इच्छा जागृत हुई। उन्होंने उसी समय ठान लिया था कि वे इस लड़ाई को कभी कमजोर नहीं पड़ने देंगी और खुद खाकी वर्दी धारण कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाएंगी।
खाकी की तीसरी पीढ़ी: रगों में दौड़ता है देशसेवा का जज्बा
ईशा सिंह के लिए पुलिस सेवा कोई नया क्षेत्र नहीं था। जनसेवा और खाकी का जज्बा तो उनकी रगों में जन्म से ही दौड़ रहा है। वे अपने परिवार में IPS बनने वाली तीसरी पीढ़ी की गौरवशाली अधिकारी हैं। उनके स्वर्गीय दादा आर बी सिंह और उनके पिता योगेश प्रताप सिंह दोनों ही पुलिस विभाग में उच्च पदों पर रहकर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। परिवार के इस समृद्ध इतिहास ने ईशा को बचपन से ही कर्तव्यपरायणता और अनुशासन का पाठ पढ़ाया। पिता की ईमानदारी उनके लिए कोई बोझ नहीं, बल्कि गर्व और प्रेरणा का विषय बनी, जिसने उन्हें हमेशा सीधे रास्ते पर चलने की हिम्मत दी।
मां का मार्गदर्शन और 'काले कोट' से मिली कानूनी ताकत
इस कठिन सफर में ईशा की मां आभा सिंह ने उनकी सबसे बड़ी मार्गदर्शक और ढाल की भूमिका निभाई। आभा सिंह खुद भी केंद्रीय सेवा की एक प्रतिष्ठित अधिकारी रह चुकी हैं, जिन्होंने बाद में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति यानी VRS लेकर कानून के क्षेत्र में कदम रखा और वकालत शुरू की। अपनी मां की राह पर चलते हुए ईशा ने भी कानून की पढ़ाई पूरी की और बॉम्बे हाईकोर्ट में वकालत करने लगीं। उन्होंने अपनी मां के लॉ ऑफिस में काम करते हुए कई ऐसे मामलों की पैरवी की जो सीधे तौर पर समाज के सबसे निचले तबके से जुड़े थे।
इस दौरान ईशा ने सफाई कर्मचारियों के अधिकारों, जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों की कानूनी मदद, कार्यस्थलों पर महिलाओं के साथ होने वाले उत्पीड़न और पुलिस द्वारा की जाने वाली अवैध गिरफ्तारियों के खिलाफ अदालतों में मजबूती से आवाज उठाई। वकालत के इस दौर में उन्होंने जमीन पर कानून के व्यावहारिक पहलुओं और उसकी कमजोरियों को बहुत करीब से देखा। अदालती कार्यवाही और कानूनी बारीकियों के इस समृद्ध अनुभव का लाभ आज उन्हें एक पुलिस अधिकारी के रूप में अपनी ड्यूटी निभाने में भरपूर मिल रहा है।
पुडुचेरी की ‘लेडी सिंघम’ से दिल्ली में नई जिम्मेदारी तक
साल 2020 की UPSC परीक्षा में अपनी कड़ी मेहनत और लगन के बल पर ईशा सिंह ने देशभर में 191वीं रैंक हासिल की। इसके बाद उन्हें AGMUT कैडर के तहत IPS अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया। प्रशासनिक सेवा में कदम रखते ही उन्होंने अपनी कार्यशैली से वरिष्ठों को प्रभावित किया। पुडुचेरी में अपनी पहली पोस्टिंग के दौरान ही उन्होंने अपनी निडरता का परिचय दिया। दिसंबर 2025 में एक राजनीतिक रैली के दौरान जब बेकाबू और उग्र भीड़ ने कानून-व्यवस्था को चुनौती देने की कोशिश की, तो ईशा सिंह निडर होकर उनके सामने डट गईं। स्थिति को इतनी सूझबूझ से नियंत्रित करने के कारण स्थानीय लोगों और मीडिया ने उन्हें ‘लेडी सिंघम’ के खिताब से नवाजा।
इसके बाद जनवरी 2026 में उनका स्थानांतरण राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कर दिया गया। दिल्ली पुलिस में अपनी सेवाएं देते हुए उन्होंने जल्द ही अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की। अब उन्हें DCP लीगल सेल की महत्वपूर्ण अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस नए पद पर वे दिल्ली पुलिस से जुड़े तमाम कानूनी पेचीदगियों, अदालती मामलों, याचिकाओं और विभागीय कानूनी सलाहों को सीधे तौर पर देखेंगी, जहां उनका कानून का पुराना अनुभव बेहद मददगार साबित होगा।
दिल्ली पुलिस में हुए अन्य महत्वपूर्ण अधिकारियों के तबादले
इस प्रशासनिक फेरबदल में ईशा सिंह के अलावा दिल्ली पुलिस के 4 अन्य बेहद वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारियों को भी नई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं:
- चिन्मय बिस्वाल: साल 2008 बैच के बेहद वरिष्ठ अधिकारी चिन्मय बिस्वाल को संयुक्त पुलिस आयुक्त (ऑपरेशन्स) के साथ-साथ अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग IFSO का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
- ईश सिंघल: साल 2010 बैच के अधिकारी ईश सिंघल को अपर पुलिस आयुक्त (आर्थिक अपराध शाखा) जैसी जिम्मेदारी वाले पद पर नियुक्त किया गया है, जो वित्तीय धोखाधड़ी और आर्थिक अपराधों पर लगाम लगाने का काम करेगी।
- दिनेश कुमार गुप्ता: विभाग ने दिनेश कुमार गुप्ता की कार्यकुशलता पर भरोसा जताते हुए उन्हें अपर पुलिस आयुक्त (यातायात) की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है ताकि राजधानी की यातायात व्यवस्था को और सुगम बनाया जा सके।
- विकास कुमार: साल 2013 बैच के अधिकारी विकास कुमार को उप-पुलिस आयुक्त (यातायात) के पद पर तैनात किया गया है, जहां वे यातायात प्रबंधन को सुचारू रूप से चलाने का जिम्मा संभालेंगे।
ईशा सिंह और इन तमाम अधिकारियों का यह नया सफर दिल्ली की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक अहम कदम है। खासकर ईशा सिंह की जीवन यात्रा देश के लाखों युवाओं के लिए एक बड़ी सीख है कि यदि आपके इरादे मजबूत, नीयत साफ और संकल्प अटल हो, तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको आपकी मंजिल हासिल करने से नहीं रोक सकती।
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