मक्का पैक्ट के बाद फंसा पाकिस्तान, ईरान ने हूतियों पर नसीहत देने पर सुनाई खरी-खरी

सऊदी अरब और हूतियों के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मक्का पैक्ट के चलते सऊदी का साथ देने की मजबूरी और ईरान की नाराजगी के बीच पाकिस्तान पशोपेश में है।

सऊदी-हूती संघर्ष के बीच पाकिस्तान की दुविधा

सऊदी अरब और हूतियों के बीच चल रहे ताजा सैन्य तनाव ने पड़ोसी देश पाकिस्तान की कूटनीतिक स्थिति को बेहद मुश्किल में डाल दिया है। खुद को मुस्लिम देशों का मसीहा बताने की कोशिश करने वाला पाकिस्तान इस समय ऐसी स्थिति में है जहां उसे समझ नहीं आ रहा कि वह किस दिशा में जाए। एक तरफ ईरान और अमेरिका के बीच तनाव है, तो दूसरी तरफ सऊदी अरब और हूतियों की लड़ाई। पाकिस्तान इस समय दोधारी तलवार पर चल रहा है। यदि वह ईरान को कुछ कहता है तो उसे फटकार झेलनी पड़ती है, और अगर चुप रहता है तो मक्का पैक्ट के तहत उसे सऊदी अरब के समर्थन में उतरना पड़ सकता है।

ईरान ने पाकिस्तान को दिया कड़ा जवाब

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, जब सऊदी अरब और हूतियों के बीच संघर्ष ने उग्र रूप लिया, तो पाकिस्तान ने मध्यस्थता करने की कोशिश की। पाकिस्तान ने सऊदी अरब की ओर से ईरान को एक संदेश भेजा, जिसमें यह कहा गया कि ईरान यमन में सक्रिय हूती विद्रोहियों को अपने नियंत्रण में ले और इस संघर्ष को समाप्त करने में मदद करे। लेकिन, इस्लामाबाद को इस पर तेहरान से काफी कड़ा और अपमानजनक जवाब मिला। ईरान ने साफ तौर पर कह दिया कि उनका हूतियों पर कोई नियंत्रण नहीं है और न ही वे ऐसा करने की स्थिति में हैं। तेहरान ने पाकिस्तान को अपने काम से काम रखने की नसीहत दी है।

हूतियों और ईरान का क्या है संबंध

पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियों का यह दावा रहा है कि यमन में हूती विद्रोहियों को ईरान का खुला समर्थन प्राप्त है। रॉयटर्स के सूत्रों की मानें तो ईरान ही वह शक्ति है जो हूतियों के कार्यों को नियंत्रित करती है। ऐसी भी खबरें हैं कि ईरान ने हूतियों को संघर्ष तेज करने के निर्देश दिए हैं, जिसके बदले उन्हें हथियार और वित्तीय मदद दी जा रही है। ईरान और हूतियों के बीच यह सांठगांठ पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बनी हुई है, लेकिन तेहरान आधिकारिक रूप से इससे लगातार इनकार करता रहा है।

सऊदी-हूती संघर्ष की पृष्ठभूमि

यह पूरा विवाद यमन के गृहयुद्ध से गहराई से जुड़ा हुआ है। साल 2014 में जब ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने यमन की राजधानी सना पर अपना कब्जा जमा लिया था, तब से ही स्थिति बिगड़ने लगी थी। इसके जवाब में साल 2015 में सऊदी अरब ने यमन सरकार के पक्ष में हवाई हमले शुरू किए थे। एक लंबी जंग के बाद साल 2022 में संघर्ष विराम की स्थिति बनी थी, लेकिन साल 2026 में हालात फिर से तनावपूर्ण हो गए हैं। हूतियों ने लाल सागर में सऊदी अरब के जहाजों को निशाना बनाना शुरू किया है। सितंबर में सऊदी अरब के दक्षिणी शहरों पर किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों में 73 लोग घायल हुए थे, जिसने इस पूरे क्षेत्र के समीकरण बदल दिए हैं।

पाकिस्तान का मक्का पैक्ट और खतरा

पाकिस्तान इस समय एक त्रिकोणीय गठबंधन यानी मक्का पैक्ट के जाल में फंस गया है, जिसमें सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की शामिल हैं। इस समझौते के कारण पाकिस्तान सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हो गया है। चूंकि हूतियों के रिश्ते ईरान से माने जाते हैं और हूती सऊदी अरब पर हमला कर रहे हैं, ऐसे में पाकिस्तान के लिए यह फैसला लेना बेहद मुश्किल हो गया है कि वह क्या रुख अपनाए। हालांकि, पाकिस्तान सरकार की ओर से यह सफाई दी जा रही है कि यदि वे अपनी सेना उतारते भी हैं, तो वह केवल रक्षात्मक होगी और केवल सऊदी अरब की क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए काम करेगी। ईरान के साथ अपने नाजुक रिश्तों के बीच पाकिस्तान का यह कदम उसे भविष्य में और अधिक अंतरराष्ट्रीय दबाव में डाल सकता है।

https://hindi.news18.com/world/pakistan-pakistan-involves-saudi-houthi-fight-due-to-mecca-pact-but-iran-slams-it-middle-east-conflict-10821596.html