पितृपक्ष 2026 का महत्व
हिंदू धर्म में पितृपक्ष का समय बेहद पवित्र माना गया है। यह अवधि हमारे पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर प्रदान करती है। ऐसी मान्यता है कि पितृपक्ष में किए गए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान से पूर्वजों की आत्मा को तृप्ति मिलती है और वे प्रसन्न होकर अपने वंशजों को सुख और समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। यह समय हमें अपने संस्कारों और पूर्वजों के योगदान को याद दिलाने का कार्य करता है।
श्राद्ध कर्म और दान का फल
पितृपक्ष के दिनों में केवल कर्मकांड ही नहीं, बल्कि दान-पुण्य का भी विशेष महत्व होता है। इस दौरान किए जाने वाले प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
- ब्राह्मणों को भोजन कराना।
- जरूरतमंद व्यक्तियों को अन्न और वस्त्र का दान करना।
- अपने पितरों की मृत्यु तिथि के अनुसार विशेष पूजा करना।
- पिंडदान के माध्यम से पूर्वजों की शांति के लिए प्रार्थना करना।
धर्म शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति सच्ची श्रद्धा से इन विधियों का पालन करता है, उसके परिवार में हमेशा सकारात्मकता बनी रहती है और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
पितृपक्ष 2026 की तिथियां और कैलेंडर
वर्ष 2026 में पितृपक्ष को लेकर लोगों में तिथियों को लेकर जिज्ञासा है। सामान्यतः पितृपक्ष भाद्रपद मास की पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन मास की अमावस्या तक चलता है। इस बार पितृपक्ष 25 सितंबर से शुरू होने की संभावना है। इसमें 10 अक्टूबर का श्राद्ध विशेष महत्व रखता है, क्योंकि पितृपक्ष का समापन आश्विन अमावस्या को होता है। अपने परिवार की परंपरा और पंचांग के अनुसार सही तिथि का चयन करना अत्यंत आवश्यक है ताकि श्राद्ध का पूरा पुण्य प्राप्त हो सके।
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