नोएडा प्रशासन की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्रशासन के कामकाज का तरीका अक्सर न्यायिक जांच के दायरे में रहा है। ताजा मामले में, सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों को दरकिनार करने के कारण एक मजिस्ट्रेट को शीर्ष अदालत की कड़ी फटकार झेलनी पड़ी है। यह घटना तब सामने आई जब सीजेपी प्रोटेस्ट मामले में एक छात्र को गलत तरीके से भारी-भरकम बॉन्ड नोटिस जारी किया गया।
क्या है पूरा मामला
सुप्रीम कोर्ट ने सीजेपी प्रोटेस्ट से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए छात्र अक्षत त्रिपाठी को राहत दी थी और स्पष्ट आदेश दिए थे। इसके बावजूद, एसीपी और मजिस्ट्रेट डॉ. रवि शंकर मिश्रा की ओर से छात्र को 5 लाख रुपये का बॉन्ड नोटिस भेज दिया गया। इस घटना पर संज्ञान लेते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने गहरी नाराजगी व्यक्त की और अधिकारी के इस कदम को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के विरुद्ध माना।
प्रशासन की पिछली गलतियां
यह पहला मौका नहीं है जब नोएडा प्रशासन न्यायिक कार्रवाई की चपेट में आया है। इससे पहले, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी नोएडा के अधिकारियों पर सख्त रुख अपनाया था। एक 24 वर्षीय छात्रा पर गलत तरीके से रासुका यानी NSA लगाने के मामले में हाईकोर्ट ने डीएम मेधा रूपम को कड़ी फटकार लगाई थी। उस मामले में कोर्ट ने अफसरों की सैलरी से 5 लाख रुपये का जुर्माना वसूलने का आदेश दिया था। न्यायिक विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा बार-बार कानून की अनदेखी करना न्याय व्यवस्था के लिए चुनौती बनता जा रहा है।
https://hindi.news18.com/news/nation/suprme-court-hits-noida-police-5l-bond-student-protester-cji-asks-how-magistrate-dared-after-dm-medha-roopam-row-cjp-protest-10820390.html