Sugar Price: त्योहारों से पहले बाजार में आएगी 2.5 लाख टन रिफाइंड चीनी, जानिए क्या है मिल की चीनी से इसका अंतर

देश में चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार के निर्देश पर रिफाइनरियां बाजार में 2.5 लाख टन रिफाइंड चीनी उतारने की तैयारी कर रही हैं। इससे त्योहारी सीजन के दौरान आम उपभोक्ताओं को बढ़ती महंगाई से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

त्योहारी सीजन में राहत की तैयारी

भारत में बीते एक महीने से चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। इस महंगाई पर लगाम लगाने के लिए सरकार लगातार कड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में अब एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। देश की प्रमुख चीनी रिफाइनरी कंपनियों ने त्योहारी मौसम को देखते हुए घरेलू बाजार में 2.5 लाख टन रिफाइंड चीनी उतारने का फैसला किया है। सरकार की ओर से मिली अनुमति के बाद कंपनियों ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है, जिससे उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में खुदरा बाजार में चीनी की कीमतों में गिरावट देखने को मिलेगी। इसके अलावा, सरकार ने इस साल पेराई सत्र को भी समय से पहले शुरू करने की योजना बनाई है ताकि चीनी की उपलब्धता में कोई कमी न रहे।

रिफाइनरियों की क्या है योजना

उद्योग जगत से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, देश की चीनी रिफाइनरियां त्योहारी मांग को पूरा करने और बाजार में सप्लाई चेन को दुरुस्त करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। श्री रेणुका शुगर्स के प्रबंध निदेशक और CEO सुशील कुमार ने स्पष्ट किया है कि उनकी कंपनी ने घरेलू बाजार में लगभग 2.5 लाख टन एएलएस (ALS) आधारित चीनी बेचने की पेशकश की है। यह कदम बाजार में बढ़ती मांग के दबाव को कम करने में मददगार साबित होगा। उनका मानना है कि सप्लाई बढ़ने से कीमतों में स्थिरता आएगी और आम उपभोक्ताओं को त्योहारों के दौरान सस्ती चीनी मिल सकेगी।

क्या है एएलएस और रिफाइंड चीनी

भारत में श्री रेणुका शुगर्स जैसी कुछ चुनिंदा कंपनियां अग्रिम लाइसेंस योजना यानी एएलएस के तहत कच्ची चीनी का आयात करती हैं। इस प्रक्रिया में बाहर से मंगाई गई कच्ची चीनी को रिफाइन करके उसका निर्यात किया जाता है। हालांकि, मौजूदा हालातों को देखते हुए सरकार ने पिछले महीने इन रिफाइनरियों को आदेश दिया था कि वे एएलएस के तहत रिफाइन की गई चीनी को घरेलू बाजार में भी बेच सकती हैं। इसका मुख्य उद्देश्य यही है कि त्योहारी सीजन में किसी भी प्रकार की कृत्रिम किल्लत न हो। यह चीनी सीधे तौर पर भारतीय मिलों में उत्पादित नहीं होती, बल्कि आयातित कच्चे माल का प्रसंस्करण करके तैयार की जाती है।

कीमतों में सुधार के संकेत

सुशील कुमार के मुताबिक, सरकार के इन हस्तक्षेपों का असर अब बाजार में दिखाई देने लगा है और कीमतों में नरमी आई है। वर्तमान में मिल स्तर पर चीनी की कीमत करीब 43-44 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास है। यह आयातित चीनी की अनुमानित लागत, जो लगभग 50 रुपये प्रति किलोग्राम है, उससे काफी कम है। सरकार ने कीमतों को काबू में रखने के लिए कई मोर्चों पर काम किया है, जिसमें 10 लाख टन चीनी के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति देना और थोक विक्रेताओं के लिए स्टॉक सीमा तय करना शामिल है। इन सभी फैसलों का मकसद बाजार में चीनी की जमाखोरी रोकना और सप्लाई को सुचारू बनाए रखना है। इससे पहले चीनी के निर्यात पर लगी रोक ने भी घरेलू उपलब्धता को बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाई है।

मिल की चीनी और रिफाइंड चीनी में अंतर

अक्सर उपभोक्ता यह सोचते हैं कि बाजार में मिल रही सामान्य चीनी और रिफाइंड चीनी में क्या फर्क है। तकनीकी तौर पर दोनों ही गन्ने या चुकंदर के रस से ही तैयार होती हैं, लेकिन उनकी प्रसंस्करण प्रक्रिया अलग होती है।

  • दिखावट और शुद्धता: मिल में तैयार होने वाली सामान्य चीनी थोड़ी मटमैली और अपरिष्कृत हो सकती है। इसमें कुछ प्राकृतिक अशुद्धियां रह जाती हैं। इसके विपरीत, रिफाइंड चीनी पूरी तरह से सफेद, चमकदार और खाने के लिए पूरी तरह तैयार होती है।
  • उपयोगिता: बाजार में आप जो भी सफेद चीनी खरीदते हैं, वह अधिकांशतः रिफाइंड ही होती है। रिफाइंड चीनी को अधिक शुद्ध माना जाता है क्योंकि इसमें अशुद्धियों को पूरी तरह से निकाल दिया जाता है।
  • उत्पादन का जरिया: कुछ कंपनियां सीधे मिल नहीं चलातीं, बल्कि वे कच्ची चीनी खरीदकर उसे आधुनिक रिफाइनरियों में साफ करके बाजार में उतारती हैं। अक्सर रिफाइंड चीनी की लागत मिल में बनी चीनी से थोड़ी अधिक हो सकती है, लेकिन बाजार की मांग के अनुसार कंपनियां इसे बेचती हैं।

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