भारत में त्योहारों और खास अवसरों पर मिठाइयों का अपना एक अलग ही महत्व है। वैसे तो देश के अलग-अलग हिस्सों में कई तरह की मिठाइयां मिलती हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के रामपुर का मशहूर ब्राउन पेड़ा स्वाद के मामले में बेमिसाल है। लगभग 60 साल से यह पेड़ा लोगों की जुबान पर चढ़ा हुआ है और इसका पारंपरिक स्वाद आज भी वैसा ही बना हुआ है।
1965 से बरकरार है रामपुर के पेड़े का जादू
रामपुर के इस खास पेड़े का सफर साल 1965 में शुरू हुआ था। तब से लेकर आज तक इसे बनाने के पारंपरिक तरीके में कोई बदलाव नहीं आया है। यही वजह है कि आज भी इस पेड़े का वही पुराना और असली स्वाद लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। इस मिठाई की सबसे बड़ी खासियत इसे बनाने का तरीका और इसमें इस्तेमाल होने वाली शुद्ध सामग्रियां हैं।
क्या है इस पारंपरिक पेड़े की खासियत?
रामपुर के पारंपरिक ब्राउन पेड़े को तैयार करने के लिए कुछ बेहद खास बातों का ध्यान रखा जाता है, जो इसे बाजार में मिलने वाले अन्य साधारण पेड़ों से एकदम अलग बनाती हैं:
- भैंस का ताजा दूध: इस पेड़े को बनाने के लिए ताजे भैंस के दूध से तैयार किए गए खोया (मावा) का ही इस्तेमाल किया जाता है।
- धीमी आंच पर भुनाई: खोए को बेहद धीमी आंच पर तब तक भुना जाता है जब तक कि इसका रंग हल्का भूरा यानी लाइट ब्राउन न हो जाए। यही धीमी भुनाई इसके स्वाद को सोंधा बनाती है।
- तय मात्रा में चीनी: मिठास को संतुलित रखने के लिए इसमें चीनी की एक निश्चित और मापी हुई मात्रा मिलाई जाती है।
- चीनी की ऊपरी परत: इस पेड़े की बाहरी सतह पर चीनी की एक बारीक कोटिंग यानी परत चढ़ाई जाती है, जिससे इसकी बनावट बेहद आकर्षक दिखती है।
- नरम और मुंह में घुलने वाली बनावट: यह पेड़ा अंदर से बेहद नरम होता है, जो मुंह में जाते ही आसानी से घुल जाता है।
घर पर भी आसानी से कर सकते हैं तैयार
अगर आप इस त्योहार या व्रत के दौरान कुछ खास और पारंपरिक मीठा खाने की सोच रहे हैं, तो रामपुर का यह मशहूर ब्राउन पेड़ा एक बेहतरीन विकल्प है। इस पारंपरिक मिठाई को घर पर बनाना बेहद आसान है। खास बात यह है कि अगर इसे अच्छी तरह से सुरक्षित तरीके से रखा जाए, तो यह कई दिनों तक खराब नहीं होता और आप लंबे समय तक इसके बेहतरीन स्वाद का आनंद ले सकते हैं।
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