क्या अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक पर आतंकी मामला खत्म हो गया? चार्जशीट में UAPA की धाराएं न होने पर NIA ने दिया जवाब

अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों पर दर्ज केस से आतंकी आरोप हटने की चर्चाओं के बीच राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने पूरी स्थिति स्पष्ट की है।

नई दिल्ली: अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों के खिलाफ गंभीर आतंकी आरोपों के तहत चल रही जांच बंद नहीं हुई है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA की हालिया चार्जशीट में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी UAPA की धाराएं न होने से कई तरह के सवाल खड़े होने लगे थे। इन आशंकाओं के बीच, विश्वसनीय सूत्रों ने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि इसे किसी भी तरह से आतंकी आरोपों को हटाने या मामले को बंद करने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, इन सभी आरोपियों के खिलाफ UAPA के तहत गहन जांच अब भी पूरी सक्रियता से जारी है।

दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत में दाखिल हुई चार्जशीट

NIA ने बीते मंगलवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक सहित कुल सात आरोपियों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की है। इस पूरे मामले की शुरुआत मार्च 2026 में हुई थी, जब पहली बार इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शुरुआत में इस मामले में UAPA के तहत बेहद गंभीर धाराएं जोड़ी गई थीं। हालांकि, दिल्ली की अदालत में पेश की गई इस नई चार्जशीट में UAPA की धाराओं का उल्लेख नहीं किया गया है।

इसके बजाय, जांच एजेंसी ने इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट यानी IFA की धारा 21 और 23 के तहत आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है। इस बारे में जानकारी देते हुए NIA के विशेष लोक अभियोजक यानी SPP ने अदालत को बताया कि इस मामले से जुड़े कई पहलुओं की जांच अभी भी जारी है। अगर आने वाले समय में जांच के दौरान UAPA के तहत अपराध सिद्ध होने के पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो एजेंसी अदालत के समक्ष पूरक चार्जशीट यानी सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल करेगी।

आखिर क्यों समय सीमा समाप्त होने से पहले दाखिल करनी पड़ी चार्जशीट?

कानूनी विशेषज्ञों और NIA के सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी के सामने एक बड़ी कानूनी समय सीमा थी। UAPA के तहत जब कोई आरोपी न्यायिक हिरासत में होता है, तो जांच एजेंसी को अपनी जांच पूरी करने और चार्जशीट दाखिल करने के लिए कानूनन अधिकतम 180 दिनों का समय मिलता है। यदि जांच एजेंसी इस निर्धारित कानूनी अवधि के भीतर अपनी चार्जशीट अदालत में पेश करने में विफल रहती है, तो आरोपी को कानून के तहत अनिवार्य रूप से वैधानिक जमानत पाने का अधिकार मिल जाता है।

मैथ्यू आरोन वैनडाइक और अन्य आरोपियों के मामले में न्यायिक हिरासत की यह 180 दिनों की समय सीमा 8 सितंबर को समाप्त हो रही थी। सूत्रों ने बताया कि तब तक जांच टीम इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट यानी IFA के तहत किए गए अपराधों को पूरी तरह से साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत जुटा चुकी थी। इसलिए, आरोपियों को डिफ़ॉल्ट जमानत का लाभ मिलने से रोकने और उन्हें हिरासत में बनाए रखने के लिए, NIA ने इस समय सीमा के भीतर IFA की धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल करने का रणनीतिक फैसला किया। सूत्रों का कहना है कि इसे किसी भी सूरत में मुख्य जांच के बंद होने के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।

म्यांमार सीमा पर अवैध घुसपैठ और ड्रोन वॉरफेयर का मामला

यह पूरा मामला बेहद संवेदनशील और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को मार्च 2026 में सुरक्षा एजेंसियों ने गिरफ्तार किया था। शुरुआत में दर्ज की गई प्राथमिकी में आरोपियों पर UAPA की धारा 18 समेत कई अन्य गंभीर आरोप लगाए गए थे।

इन आरोपियों पर मुख्य रूप से निम्नलिखित गंभीर आरोप हैं:

  • भारत के रास्ते म्यांमार के भीतर अवैध रूप से प्रवेश करना।
  • म्यांमार के विभिन्न स्थानीय जातीय सशस्त्र समूहों के साथ संपर्क स्थापित करना।
  • इन सशस्त्र विद्रोही समूहों को आधुनिक ड्रोन युद्ध यानी ड्रोन वॉरफेयर की तकनीकी और सैन्य ट्रेनिंग प्रदान करना।

सूत्रों ने समाचार एजेंसी ANI को बताया कि NIA ने सातों आरोपियों में से किसी के खिलाफ भी आतंकवादी गतिविधियों से जुड़ी अपनी जांच को ठंडे बस्ते में नहीं डाला है। सभी के खिलाफ भारत विरोधी गतिविधियों और UAPA के तहत अपराधों की जांच समानांतर रूप से चलाई जा रही है।

कानूनी प्रक्रिया और पूरक चार्जशीट का विकल्प

सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में जो चार्जशीट अदालत के सामने पेश की गई है, वह केवल उन अपराधों तक सीमित है जो अब तक की जांच में पूरी तरह से प्रमाणित हो चुके हैं। इनमें इमिग्रेशन कानून का उल्लंघन प्रमुख है। वहीं, विदेशी नागरिकों के आतंकी समूहों से संबंधों और भारत की सुरक्षा को खतरे में डालने जैसे UAPA के पहलुओं पर अभी भी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

अदालत में पेश की गई चार्जशीट में भी इस बात का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि UAPA से जुड़े मामले की जांच अभी बंद नहीं हुई है। भारतीय कानून के तहत, मुख्य चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी पुलिस या कोई भी केंद्रीय जांच एजेंसी अपनी जांच जारी रख सकती है। यदि जांच के दौरान नए और पुख्ता सबूत सामने आते हैं, तो दंड प्रक्रिया संहिता के नियमों के तहत अदालत में पूरक चार्जशीट दाखिल कर अतिरिक्त धाराएं जोड़ी जा सकती हैं। इसलिए, यह धारणा पूरी तरह गलत है कि UAPA की धाराओं को वापस ले लिया गया है या जांच को बंद कर दिया गया है।

अमेरिकी राजनयिकों के हस्तक्षेप पर क्या है सच्चाई?

इस मामले में अमेरिकी सरकार और वहां के राजनयिकों के हस्तक्षेप की खबरों पर भी सूत्रों ने स्थिति स्पष्ट की है। सूत्रों का कहना है कि किसी भी देश की सरकार या उसके राजनयिकों द्वारा विदेश में हिरासत में लिए गए अपने नागरिक के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रयास करना एक सामान्य वैश्विक राजनयिक प्रक्रिया है।

भारत के विदेश मंत्रालय के नियमों के अनुसार भी:

  • जब भी कोई भारतीय नागरिक किसी दूसरे देश में गिरफ्तार या हिरासत में लिया जाता है, तो वहां मौजूद भारतीय मिशन स्थानीय प्रशासन से संपर्क करता है।
  • भारतीय मिशन अपने नागरिक के लिए राजनयिक पहुंच यानी कांसुलर एक्सेस, कानूनी सहायता और जेल में उनके साथ मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करने की मांग करता है।
  • आवश्यकता पड़ने पर त्वरित सुनवाई या सजा में राहत के मुद्दे भी उठाए जाते हैं।

हिरासत में लिए गए विदेशी नागरिकों को कांसुलर सहायता और राजनयिक मदद का यह अधिकार अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत वियना कन्वेंशन द्वारा भी पूरी तरह मान्यता प्राप्त है। इसलिए, अमेरिकी अधिकारियों के इस कदम को किसी राजनीतिक दबाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

विपक्ष ने उठाए सवाल, सरकार से मांगा जवाब

इस संवेदनशील मामले में चार्जशीट से UAPA की धाराएं गायब होने के बाद राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया है। कांग्रेस सांसद और देश के जाने-माने वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने इस पर गंभीर सवाल उठाए थे।

अभिषेक मनु सिंघवी ने अपने बयान में कहा था:

अगर यह खबर पूरी तरह सच है कि अमेरिका और भारत के बीच हुई उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठकों के बाद अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक के खिलाफ लगे आतंकवादी आरोपों को हटा लिया गया है, तो मोदी सरकार को देश की जनता के सामने इसका स्पष्ट जवाब देना चाहिए। अगर किसी विदेशी नागरिक को भारत में अवैध प्रवेश करने, म्यांमार के हिंसक सशस्त्र समूहों के साथ संबंध रखने और उन्हें ड्रोन युद्ध की घातक ट्रेनिंग देने जैसे संगीन आरोपों में पकड़ा गया था, तो देश की सुरक्षा से जुड़े ये गंभीर आरोप अचानक चार्जशीट से कैसे गायब हो सकते हैं?

सिंघवी के इन आरोपों पर सुरक्षा और जांच एजेंसियों के सूत्रों ने फिर दोहराया है कि इमिग्रेशन और फॉरेनर्स एक्ट के तहत त्वरित कार्रवाई करते हुए चार्जशीट दाखिल कर दी गई है, लेकिन UAPA के तहत चल रही आतंकी साजिश की बड़ी जांच अभी भी सातों आरोपियों के खिलाफ बिना किसी रुकावट के जारी है।

https://www.indiatv.in/india/national/matthew-vandyke-uapa-case-nia-clarifies-terror-probe-still-on-despite-chargesheet-without-uapa-sections-2026-09-09-1242213