सिनेमा और असल जीवन में हनुमान जी का प्रभाव
इन दिनों पूरे देश में सनातन आस्था और हनुमान भक्ति की एक अद्भुत लहर देखने को मिल रही है। एक ओर जहां नीम करोली बाबा के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर आधारित फिल्म हनुमान अंश बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त धमाल मचा रही है, वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे लोग साक्षात चमत्कार मान रहे हैं। यह घटना उस समय चर्चा का विषय बनी जब एक प्राचीन हनुमान प्रतिमा को हटाने के सभी प्रशासनिक प्रयास विफल साबित हुए। भक्त अब इसे बजरंगबली की प्रत्यक्ष मौजूदगी के रूप में देख रहे हैं।
बॉक्स ऑफिस पर हनुमान अंश की सुनामी
बहुत ही सीमित बजट में तैयार की गई फिल्म हनुमान अंश ने सिनेमा जगत में अपनी एक अलग ही पहचान बनाई है। इस फिल्म ने बड़े-बड़े सितारों की फिल्मों को पीछे छोड़ते हुए 140 करोड़ रुपये से अधिक की शानदार कमाई कर ली है। फिल्म में जिस तरह से भक्ति, विश्वास और चमत्कारों को पर्दे पर उतारा गया है, उसका असर दर्शकों पर गहरा है। फिल्म देखने के बाद सिनेमाघर किसी मंदिर या पावन धाम जैसे प्रतीत होने लगते हैं, जहां शो समाप्त होते ही दर्शक भावुक होकर जय श्री राम और जय बजरंगबली के नारों से माहौल को भक्तिमय कर देते हैं।
शूटिंग के दौरान हुए अनुभव
फिल्म की सफलता के पीछे केवल इसकी कहानी नहीं, बल्कि इसके निर्माण के दौरान जुड़े आध्यात्मिक अनुभव भी हैं। फिल्म के निर्देशक और निर्माता विशाल चतुर्वेदी ने इस प्रोजेक्ट को बहुत ही अनुशासन के साथ पूरा किया है। शूटिंग के दौरान पूरी टीम ने धार्मिक मर्यादाओं का पालन किया और नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया। प्रोडक्शन के दौरान कई बार आई बाधाओं और उनके समाधान की कहानियों ने दर्शकों के बीच फिल्म के प्रति एक गहरा जुड़ाव पैदा कर दिया है। यह भक्ति रस अब केवल रील लाइफ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका प्रभाव रियल लाइफ में भी महसूस किया जा रहा है।
उज्जैन में प्रशासन के सामने आया संकट
फिल्म की चर्चा के बीच ही उज्जैन से सामने आई एक घटना ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। शहर में सड़क चौड़ीकरण की योजना के तहत एक प्राचीन मंदिर को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। अधिकारियों ने मंदिर के ढांचे को तो हटा दिया, लेकिन जब करीब आठ फुट ऊंची हनुमान प्रतिमा को स्थानांतरित करने की बारी आई, तो सारी मशीनें और तकनीक धरी की धरी रह गई। भारी मशीनों के उपयोग के बावजूद प्रतिमा अपनी जगह से तनिक भी नहीं हिली।
इतिहास और आस्था का मिलन
यह मंदिर लगभग 170 साल पुराना बताया जाता है। प्रतिमा के न हिलने के बाद नगर निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्रा ने मंदिर के पंडित के आग्रह पर इंदौर IIT की टीम को जांच के लिए बुलाया। टीम ने मंगलवार को लगभग दो घंटे तक आधुनिक उपकरणों की मदद से प्रतिमा की नींव और उसके आसपास की संरचना का गहन निरीक्षण किया। फिलहाल प्रशासन रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद ही अगली कार्रवाई या हटाने की तारीख तय की जाएगी।
बंदरों की मौजूदगी ने बढ़ाई उत्सुकता
स्थानीय लोगों के लिए यह पूरी घटना किसी चमत्कार से कम नहीं है। जब प्रशासनिक टीमें मूर्ति को हटाने का प्रयास कर रही थीं, उसी दौरान अचानक दर्जनों बंदरों ने मंदिर के आसपास डेरा डाल दिया। इस दृश्य ने श्रद्धालुओं की आस्था को और भी अधिक मजबूत कर दिया। कई भक्त इसे हनुमान जी की इच्छा मानते हुए भावुक हो गए। जहां विज्ञान और तकनीक इसे मूर्ति की गहरी नींव से जोड़कर तर्कपूर्ण तरीके से देखने का प्रयास कर रहे हैं, वहीं आम जनता और हनुमान अंश फिल्म के प्रशंसक इसे स्पष्ट रूप से ईश्वर की मर्जी से जोड़कर देख रहे हैं। उनका मानना है कि भगवान की अनुमति के बिना इस दुनिया में एक पत्ता भी नहीं हिल सकता, और यह प्रतिमा भी उसी दिव्य शक्ति का प्रमाण है।
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