BRICS शिखर सम्मेलन से पहले बलूचिस्तान ने खेला बड़ा कूटनीतिक दांव, 11 सदस्य देशों को खुला पत्र लिखकर की ये मांग

BRICS शिखर सम्मेलन 2026 से ठीक पहले रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने सदस्य देशों को एक पत्र भेजकर बलूचिस्तान की स्वतंत्रता और आत्मनिर्णय के मुद्दे को एजेंडे में शामिल करने की अपील की है।

आगामी 12–13 सितंबर 2026 को होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन से पहले अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर एक बड़ी हलचल सामने आई है। बलूचिस्तान की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर रहे संगठन 'रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान' ने इस प्रभावशाली समूह के 11 सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों को एक खुला पत्र जारी किया है। 7 सितंबर 2026 को भेजे गए इस पत्र में संगठन ने अपील की है कि बलूचिस्तान के राष्ट्रीय दर्जे, उसकी आजादी और बलूच जनता के आत्मनिर्णय के अधिकार से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को आगामी शिखर सम्मेलन के मुख्य एजेंडे में स्थान दिया जाए।

यह पत्र BRICS के प्रमुख सदस्य देशों ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, सऊदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, इथियोपिया और इंडोनेशिया के शासनाध्यक्षों को संबोधित करते हुए भेजा गया है। पत्र में बलूचिस्तान ने सिर्फ राजनीतिक समर्थन की ही मांग नहीं की है, बल्कि आर्थिक, सुरक्षा, व्यापारिक और समुद्री सहयोग की दिशा में भी बड़ी संभावनाएं व्यक्त की हैं।

वैश्विक मंच के रूप में BRICS का महत्व

अपने खुले पत्र में 'रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान' ने स्वीकार किया है कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में BRICS ग्लोबल साउथ के देशों के आपसी सहयोग के लिए एक बेहद मजबूत और महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। बलूच नेतृत्व का कहना है कि यह संगठन न केवल वित्तीय और आर्थिक मामलों में बल्कि राजनीतिक संवाद, सुरक्षा, सतत विकास, जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों, तकनीकी प्रगति, खाद्य सुरक्षा और मानवीय सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इसी प्रभावशीलता को देखते हुए बलूचिस्तान ने अपील की है कि उसके न्यायसंगत संघर्ष और संप्रभु राष्ट्र बनने के सपने को भी इस मंच के माध्यम से सुना जाना चाहिए।

प्राचीन मेहरगढ़ सभ्यता और बलूच पहचान का दावा

पत्र में बलूचिस्तान की ऐतिहासिक पहचान को प्रमुखता से रेखांकित किया गया है। बलूच नेतृत्व ने याद दिलाया है कि उनका इतिहास हजारों साल पुराना और समृद्ध है। वर्तमान बलूचिस्तान में स्थित मेहरगढ़ को दक्षिण एशिया के सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों में गिना जाता है। यहाँ सातवीं सहस्राब्दी ईसा पूर्व के काल से ही स्थायी कृषि समुदायों के बसे होने के पुख्ता प्रमाण मिलते हैं।

पत्र के अनुसार, यह गौरवशाली इतिहास बयां करता है कि जब दुनिया की कई आधुनिक सभ्यताओं का उदय भी नहीं हुआ था, तब बलूच समाज ने खेती, पशुपालन, हस्तशिल्प और व्यापार जैसी जटिल व्यवस्थाओं को विकसित कर लिया था। यह प्राचीन क्षेत्र हमेशा से विभिन्न संस्कृतियों, लोगों और सभ्यताओं के बीच संपर्क और आदान-प्रदान का एक प्रमुख सेतु रहा है। इसके साथ ही बलूच राष्ट्रीय राजनीतिक पहचान को एक धर्मनिरपेक्ष, सहिष्णु और बहुलतावादी समाज के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो सांस्कृतिक विविधता और मानवीय गरिमा का पूरा सम्मान करता है।

11 अगस्त 1947 का ऐतिहासिक महत्व और 60 मिलियन बलूचों की आवाज

इस कूटनीतिक पत्र में आधुनिक बलूचिस्तान के राजनीतिक भविष्य और उसकी स्वतंत्रता की मांग को ब्रिटिश राज के अंत से जोड़ा गया है। पत्र में लिखा गया है कि बलूच राष्ट्रीय इतिहास में 11 अगस्त 1947 की तारीख का एक बेहद पवित्र और गहरा महत्व है। इसी दिन बलूचिस्तान की स्वतंत्रता की घोषणा की गई थी और इसकी बहाली हुई थी।

संगठन के अनुसार, आज दुनिया भर में मौजूद करीब 60 मिलियन बलूच लोगों का यह दृढ़ विश्वास है कि बलूचिस्तान की स्वतंत्रता के अधिकार को कभी भी कानूनी और वैध तरीके से खत्म नहीं किया गया। उनका संप्रभुता का सवाल आज भी अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अनसुलझा है। इसीलिए, 'रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान' ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और विशेष रूप से BRICS सदस्य देशों से यह गुहार लगाई है कि वे बलूच जनता के आत्मनिर्णय के अधिकार को स्वीकार करें और बलूचिस्तान को एक ऐसे राष्ट्र के रूप में पहचानें जो दुनिया में अपना हक और सम्मानजनक स्थान पाना चाहता है।

भू-रणनीतिक स्थिति: BRICS के लिए बलूचिस्तान का महत्व

बलूच नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि बलूचिस्तान केवल एक राजनीतिक विवाद का विषय नहीं है, बल्कि यह ग्लोबल साउथ में एक नई रणनीतिक, कूटनीतिक और आर्थिक साझेदारी का द्वार खोल सकता है। बलूचिस्तान की भौगोलिक स्थिति इसे बेहद खास बनाती है। यह दक्षिण एशिया, मध्य एशिया, मध्य पूर्व और अरब सागर के मिलन बिंदु पर स्थित है। इसकी विशाल तटरेखा, गहरे पानी के बंदरगाह बनाने की अद्वितीय क्षमता और दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों तक इसकी सीधी पहुंच इसे अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी का एक बड़ा केंद्र बना सकती है। एक स्वतंत्र और स्थिर बलूचिस्तान वैश्विक व्यापार के सुरक्षित संचालन के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

प्राकृतिक और खनिज संपदा से समृद्ध धरती

आर्थिक सहयोग पर बल देते हुए पत्र में बलूचिस्तान की प्रचुर प्राकृतिक संपदा का विवरण दिया गया है। यहाँ तांबा, सोना, कोयला और प्राकृतिक गैस जैसे महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों के विशाल भंडार मौजूद हैं। इसके साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा, उन्नत कृषि, मत्स्य पालन और पशुधन के क्षेत्रों में भी विकास की असीम संभावनाएं हैं। पत्र में तर्क दिया गया है कि यदि इन सभी मूल्यवान संसाधनों का उपयोग पारदर्शी, न्यायसंगत और बलूच जनता के कल्याण के लिए किया जाए, तो यह BRICS देशों के साथ लंबे समय तक चलने वाले आर्थिक संबंधों की एक मजबूत आधारशिला बन सकता है।

विभिन्न BRICS देशों के साथ संभावित सहयोग का रोडमैप

पत्र में अलग-अलग BRICS सदस्य देशों की आवश्यकताओं के अनुसार बलूचिस्तान के साथ सहयोग के निम्नलिखित बिंदुओं को रेखांकित किया गया है:

  • ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका: बलूचिस्तान इन देशों के लिए दक्षिण-दक्षिण सहयोग और आर्थिक विकास की नई राहें खोल सकता है।
  • रूस: रूस के लिए बलूचिस्तान की भौगोलिक स्थिति मध्य एशिया, मध्य पूर्व और हिंद महासागर के बीच एक मजबूत व्यापारिक गलियारा प्रदान कर सकती है।
  • भारत: भारत के दृष्टिकोण से बलूचिस्तान की अरब सागर में स्थिति समुद्री सुरक्षा और व्यावसायिक कनेक्टिविटी को अभूतपूर्व बढ़ावा दे सकती है।
  • चीन: एशिया और हिंद महासागर के बीच सुरक्षित व्यापारिक मार्गों के संचालन में बलूचिस्तान अहम भूमिका निभा सकता है।
  • सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात: भौगोलिक निकटता के कारण ये देश ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार, बुनियादी ढांचे में निवेश और क्षेत्रीय स्थिरता के क्षेत्रों में लाभ उठा सकते हैं।
  • मिस्र: लाल सागर और अरब सागर को एशियाई बाजारों से जोड़ने वाली कनेक्टिविटी से मिस्र को बड़ा आर्थिक लाभ मिल सकता है।
  • इथियोपिया: बलूचिस्तान के माध्यम से इथियोपिया को नए समुद्री संपर्कों और विकास संबंधी सहयोग के अवसर मिल सकते हैं।
  • इंडोनेशिया: दक्षिण-पूर्व एशिया और अरब सागर के बीच मजबूत सांस्कृतिक, आर्थिक और समुद्री साझेदारी स्थापित हो सकती है।

शिखर सम्मेलन से बलूचिस्तान की प्रमुख मांगें

रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने सदस्य देशों के समक्ष अपनी प्रमुख मांगें इस प्रकार रखी हैं:

  • 12–13 सितंबर 2026 के BRICS शिखर सम्मेलन के औपचारिक एजेंडे में बलूचिस्तान के आत्मनिर्णय के अधिकार और उसके राष्ट्रीय दर्जे को शामिल किया जाए।
  • रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान के प्रतिनिधित्व के साथ औपचारिक कूटनीतिक संवाद की शुरुआत की जाए और भविष्य में द्विपक्षीय संबंधों के द्वार खोले जाएं।
  • व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचे के विकास, खनिज प्रसंस्करण, ऊर्जा और समुद्री परिवहन के क्षेत्रों में बलूचिस्तान के साथ नई साझेदारियों की खोज की जाए।
  • शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, खाद्य सुरक्षा, जलवायु अनुकूलन, मानवीय सहायता और प्राकृतिक आपदा प्रबंधन के क्षेत्रों में आपसी सहयोग पर विचार किया जाए।
  • क्षेत्रीय शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आतंकवाद तथा उग्रवाद के खिलाफ साझा कूटनीतिक और सुरक्षात्मक पहल की जाए।
  • दोनों पक्षों के बीच युवाओं, विश्वविद्यालयों, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, नागरिक समाज और व्यावसायिक संगठनों के माध्यम से लोगों के आपसी संबंधों (पीपल-टू-पीपल कांटेक्ट) को बढ़ावा दिया जाए।
  • ग्लोबल साउथ के व्यापक विकास ढांचे के भीतर बलूचिस्तान को एक भागीदार के रूप में शामिल करने और समय आने पर BRICS की प्रणालियों में जगह देने पर विचार किया जाए।

ग्लोबल साउथ के लिए नई सोच का आह्वान

पत्र के समापन खंड में एक बेहद महत्वपूर्ण कूटनीतिक संदेश दिया गया है। इसमें कहा गया है कि वर्तमान समय में विश्व व्यवस्था तेजी से बहुध्रुवीयता की ओर अग्रसर है, जहाँ BRICS ने ग्लोबल साउथ के हितों, न्यायसंगत प्रतिनिधित्व और समानता की पुरजोर वकालत की है। ऐसे में बलूचिस्तान के प्रश्न को केवल एक साधारण या स्थानीय सीमा विवाद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसे संप्रभुता, सम्मान, संसाधनों के उचित वितरण और एक न्यायपूर्ण विश्व व्यवस्था के व्यापक कैनवास पर देखने की आवश्यकता है।

बलूच नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि वे अंतरराष्ट्रीय समुदाय या किसी भी देश के साथ टकराव का रास्ता नहीं चाहते। उनका उद्देश्य केवल शांतिपूर्ण सहयोग, मान्यता और साझा प्रगति हासिल करना है। बलूचिस्तान की रणनीतिक स्थिति और प्राकृतिक संसाधन पूरे ग्लोबल साउथ के विकास में एक मील का पत्थर साबित हो सकते हैं। एक आजाद, संप्रभु और खुशहाल बलूचिस्तान भविष्य में BRICS देशों के लिए कूटनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा के मोर्चे पर एक सबसे विश्वसनीय और मूल्यवान साझीदार बनकर उभरने की क्षमता रखता है।

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