दिल्ली में मंथन का दौर
हिमाचल प्रदेश की राजनीति में फिलहाल बड़ी हलचल मची हुई है। राज्य में होने वाले आगामी कैबिनेट विस्तार को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार समेत सरकार के कई बड़े चेहरे दिल्ली में मौजूद हैं। सरकार के आधा हिस्सा दिल्ली में होने के कारण राज्य की जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें अब राष्ट्रीय राजधानी पर टिकी हैं। बताया जा रहा है कि सोमवार को मुख्यमंत्री सुक्खू ने दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से मुलाकात की है, जिसके बाद से कयासों का बाजार और गर्म हो गया है।
मंत्रियों के नाम और संभावित बदलाव
इस महत्वपूर्ण यात्रा के दौरान कैबिनेट मंत्री धनीराम शांडिल, चंद्र कुमार, हर्षवर्धन चौहान और शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर भी दिल्ली पहुंचे हैं। सरकार के इस दौरे को लेकर सबसे बड़ी चर्चा यह है कि क्या मंत्रिमंडल में फेरबदल के दौरान कुछ वरिष्ठ मंत्रियों की कुर्सी भी जा सकती है। राजनीतिक गलियारों में यह बात चर्चा का विषय है कि चंद्र कुमार और धनीराम शांडिल की उम्र करीब 84 साल के आसपास है, जिसे लेकर कुछ बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
क्षेत्रीय संतुलन और मंत्रिमंडल का गणित
वर्तमान मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। शिमला संसदीय क्षेत्र से सबसे अधिक पांच मंत्री शामिल हैं, जिसमें सोलन और सिरमौर जिलों का अच्छा खासा प्रभाव है। इसके विपरीत, मंडी संसदीय क्षेत्र को मंत्रिमंडल में अपेक्षित तवज्जो न मिलने की बात कही जा रही है। हालांकि किन्नौर विधानसभा से जगत सिंह नेगी मंत्री पद पर आसीन हैं, लेकिन मंडी, कुल्लू, लाहौल-स्पीति और चंबा जिलों से कोई भी प्रतिनिधि मंत्रिमंडल में नहीं है। इसके अलावा, कांगड़ा जिले की अनदेखी के आरोप भी बीते कई वर्षों से लगते रहे हैं, जहां से फिलहाल केवल दो ही मंत्री हैं।
किसे मिलेगी जगह और किसकी होगी विदाई?
सरकार के भीतर सूत्रों का कहना है कि अब कैबिनेट विस्तार से ज्यादा चर्चा इस बात की है कि कहीं किसी मौजूदा मंत्री को ड्रॉप तो नहीं किया जाएगा। मंत्रिमंडल में फेरबदल की इस संभावित सूची में सुंदर सिंह, आशीष बुटेल और संजय अवस्थी जैसे नाम काफी चर्चा में बने हुए हैं। गौरतलब है कि राज्य सरकार में पिछले पौने चार साल से एक मंत्री पद रिक्त पड़ा है, जिसे भरने के लिए लंबे समय से दबाव बन रहा है।
मुख्यमंत्री के वादे और आगे का रास्ता
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पहले भी सार्वजनिक मंचों से कुल्लू के विधायक सुंदर सिंह को कैबिनेट मंत्री बनाने की बात स्पष्ट कर चुके हैं। मुख्यमंत्री ने विधानसभा के भीतर और शिमला में दो बार यह ऐलान किया था कि मॉनसून सत्र के समापन के बाद नया मंत्री शपथ ले लेगा। अब चूंकि मॉनसून सत्र खत्म हुए 3 दिन बीत चुके हैं, इसलिए यह कयास लगाए जा रहे हैं कि अब जल्द ही कोई बड़ा निर्णय लिया जाएगा। अब हर किसी की निगाहें इस बात पर हैं कि दिल्ली से वापस लौटने के बाद मुख्यमंत्री मंत्रिमंडल में क्या बदलाव करते हैं और कौन सा नया चेहरा मंत्री पद की शपथ लेता है।
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