ब्रिक्स के बीच ट्रंप का G3 का दांव, क्या अमेरिका, रूस और चीन मिलकर बदलेंगे दुनिया की तस्वीर?

दिल्ली में आयोजित होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक नए 'G3' गुट के गठन की रणनीति बना रहे हैं, जो ग्लोबल पावर गेम को पूरी तरह से बदल सकता है। इस पहल का उद्देश्य रूस और चीन को एक साथ लाकर दुनिया की राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था को फिर से परिभाषित करना है।

दिल्ली में सज रहा ब्रिक्स का मंच

भारत की राजधानी दिल्ली इस समय वैश्विक कूटनीति के केंद्र में है, जहाँ BRICS सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान जैसे दुनिया के कद्दावर नेता एक ही मंच पर मौजूद हैं। आधिकारिक तौर पर इस बैठक का मुख्य एजेंडा स्वास्थ्य, कृषि और डिजिटल क्षेत्र में आपसी सहयोग को मजबूती प्रदान करना है। हालांकि, पर्दे के पीछे अंतरराष्ट्रीय राजनीति का एक बड़ा खेल शुरू हो चुका है। जबकि दिल्ली में ब्रिक्स के सदस्य देश एक बहुध्रुवीय दुनिया की वकालत कर रहे हैं, उसी दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के सामने एक नया विकल्प पेश करने की तैयारी कर ली है। ट्रंप रूस और चीन को साथ लेकर एक नए 'G3' समूह के गठन की दिशा में बढ़ रहे हैं।

मोदी-जिनपिंग मुलाकात पर टिकीं नजरें

इस सम्मेलन का एक बड़ा आकर्षण शी जिनपिंग की भारत यात्रा है। वर्ष 2019 के बाद यह पहला मौका है जब चीनी राष्ट्रपति भारत की धरती पर हैं, जिसके चलते दुनिया भर की नजरें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बातचीत पर टिकी हैं। सीमा पर चल रहे तनाव और व्यापारिक खींचतान के कारण दोनों पड़ोसी देशों के रिश्तों में लंबे समय से कड़वाहट बनी हुई है। दिल्ली का यह मंच दोनों नेताओं के लिए एक अवसर के रूप में देखा जा रहा है, जिससे उम्मीद की जा रही है कि वे आपसी मतभेदों को कम करने और व्यापारिक संबंधों को पटरी पर लाने की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे। सम्मेलन में ईरान के नए राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की मौजूदगी ने भी इस आयोजन की हलचल को काफी बढ़ा दिया है।

ब्रिक्स का विस्तार और आंतरिक गुटबाजी

ब्रिक्स को हमेशा से अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रभुत्व के विरुद्ध एक मजबूत विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया गया है। लेकिन जैसे-जैसे इस संगठन का विस्तार हुआ है, इसके भीतर मौजूद आंतरिक मतभेद भी खुलकर सामने आ रहे हैं। वर्तमान में ईरान और UAE के बीच तीखी तनातनी देखने को मिल रही है। ईरान चाहता है कि ब्रिक्स का मंच अमेरिका और इजरायल द्वारा किए जा रहे सैन्य हमलों के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाए और सख्त निंदा प्रस्ताव पारित करे। वहीं दूसरी तरफ, UAE इन विवादों में उलझने के बजाय अपनी समुद्री सीमाओं और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को अधिक प्राथमिकता दे रहा है। आपसी खींचतान का आलम यह है कि मई के महीने में दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में कोई भी साझा बयान जारी नहीं हो सका था।

ट्रंप की नई चाल, G3 का समीकरण

एक तरफ ब्रिक्स अपने अंदरूनी कलह से जूझ रहा है, तो दूसरी तरफ वाशिंगटन, बीजिंग और मॉस्को के बीच एक नया समीकरण तैयार होता दिख रहा है। डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि यदि वे व्यक्तिगत स्तर पर पुतिन और शी जिनपिंग के साथ सीधे बातचीत की मेज पर बैठें, तो दुनिया के जटिल से जटिल विवाद सुलझाए जा सकते हैं। ट्रंप की इस व्यक्तिगत कूटनीति (पर्सनल डिप्लोमेसी) को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्रालय, संसद और यूरोप के सहयोगी देश काफी चिंतित हैं। यूरोप को यह डर सता रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप यूक्रेन और यूरोप की सुरक्षा से समझौता करके रूस से हाथ न मिला लें। वहीं, एशिया के देशों को यह चिंता है कि चीन के साथ कोई बड़ी डील करने की जल्दबाजी में अमेरिका इस क्षेत्र के प्रति अपनी सुरक्षा प्रतिबद्धताओं को कहीं पीछे न छोड़ दे।

पुतिन और जिनपिंग की प्राथमिकताएं

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अमेरिका के साथ संबंधों को सुधारने में अपनी रणनीतिक मजबूरी है। करीब साढ़े चार साल से चल रहे यूक्रेन युद्ध ने रूसी अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है और युद्ध के मोर्चे पर भी रूस को कोई निर्णायक बढ़त हासिल नहीं हो रही है। दूसरी ओर, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग काफी मजबूत स्थिति में दिखाई देते हैं। बिश्केक, काहिरा और दिल्ली की यात्राओं के बाद उनका सीधा रुख व्हाइट हाउस की ओर होने की संभावना है। क्रेमलिन ने भी पुष्टि की है कि पुतिन और शी जिनपिंग ने नवंबर में शेनजेन में होने वाले APEC सम्मेलन के दौरान डोनाल्ड ट्रंप के साथ G3 बैठक करने पर चर्चा की है। यदि यह त्रिपक्षीय गठबंधन आकार लेता है, तो यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से चले आ रहे 'याल्टा सिस्टम' का अंत होगा, जिसने यूएन सुरक्षा परिषद की नींव रखी थी।

भारत के लिए क्या है चुनौती?

ट्रंप की G3 योजना भारत को तीन मुख्य तरीकों से प्रभावित या बेअसर कर सकती है:

  • आर्थिक शक्ति का विस्तार: भारत को अपनी औद्योगिक विकास दर और अर्थव्यवस्था को इतनी गति देनी होगी कि वह G3 के किसी भी देश के लिए उपेक्षित न रहे।
  • स्मार्ट कूटनीति: जिस तरह रूस और चीन ब्रिक्स का हिस्सा होते हुए भी अमेरिका के साथ अपने लाभ के लिए रिश्ते साधते हैं, भारत को भी इसी तरह की व्यावहारिक कूटनीति अपनानी होगी।
  • मिडिल पावर्स का मोर्चा: भारत को फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील जैसे देशों को साथ लेकर एक मजबूत गुट बनाना होगा, जो दुनिया की कमान केवल तीन देशों के हाथों में सिमटने नहीं देना चाहते हैं।

https://hindi.news18.com/news/nation/trump-secret-g3-move-how-us-russia-and-china-plan-to-bypass-brics-as-pm-modi-xi-putin-meet-in-delhi-10817553.html