पाकिस्तान में पानी की भीषण किल्लत पर बवाल, SSG कमांडो और फ्रंटियर फोर्स के जवानों के बीच खूनी झड़प, 22 गंभीर रूप से घायल

पाकिस्तान के दक्षिण वजीरिस्तान में बुनियादी सुविधाओं की कमी और पानी के संकट के चलते सेना के जवानों में हिंसक झड़प हो गई, जिसमें 22 सुरक्षाकर्मी घायल हो गए और 9 को एयरलिफ्ट करना पड़ा।

पाकिस्तान में आर्थिक बदहाली और बुनियादी सुविधाओं की भारी किल्लत अब इस स्तर पर पहुंच चुकी है कि आम जनता के बाद अब वहां के अनुशासित सैनिक भी आपस में भिड़ने लगे हैं। देश के अशांत इलाके दक्षिण वजीरिस्तान से एक बेहद हैरान करने वाली खबर सामने आई है, जहां पानी जैसी सबसे बुनियादी जरूरत को लेकर पाकिस्तानी सेना की दो सबसे प्रमुख यूनिट्स के बीच हिंसक टकराव हो गया। आसमान मंजा मिलिट्री कैंप में तैनात जवानों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर शुरू हुई मामूली बहस ने कुछ ही समय में एक हिंसक रूप अख्तियार कर लिया। इस अप्रत्याशित खूनी झड़प में पाकिस्तानी सेना के स्पेशल सर्विस ग्रुप (SSG) के कमांडो और फ्रंटियर फोर्स (FF) के जवान आपस में भिड़ गए। पानी की बूंद-बूंद के लिए मचे इस संग्राम में लात-घूंसे और डंडे चले, जिससे दोनों पक्षों के कुल 22 सुरक्षाकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस घटना ने पाकिस्तानी सेना की आंतरिक सप्लाई चेन और सैनिकों के बीच अनुशासन के दावों की पोल खोल दी है।

वजीरिस्तान के सैन्य कैंप में पानी के लिए हाहाकार

यह पूरा मामला दक्षिण वजीरिस्तान में स्थित आसमान मंजा मिलिट्री कैंप का है। यह इलाका अपनी बेहद कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और चुनौतीपूर्ण मौसम के लिए जाना जाता है। इस क्षेत्र में तैनात सैनिकों को पानी की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा था। लंबे समय से इस कैंप में पीने और दैनिक उपयोग के पानी की आपूर्ति पूरी तरह चरमरा चुकी थी। संकट के इस माहौल में कैंप में पानी का एक टैंकर पहुंचा। इसी टैंकर से पानी के वितरण और हिस्सेदारी को लेकर विवाद की चिंगारी सुलग उठी। रिपोर्टों के अनुसार, फ्रंटियर फोर्स (FF) रेजिमेंट के अधिकारियों और स्पेशल सर्विस ग्रुप (SSG) के कमांडो के बीच इस बात को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई कि पानी पहले किसे मिलेगा और कितना मिलेगा। कुछ ही मिनटों में यह बहस इतनी बढ़ गई कि वहां मौजूद जवान अपना मानसिक संतुलन खो बैठे। दोनों ही तरफ से एक-दूसरे पर हमला कर दिया गया और देखते ही देखते कैंप युद्ध के मैदान में बदल गया।

एलीट कमांडो और फ्रंटियर फोर्स के बीच खूनी जंग

इस हिंसक संघर्ष की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें पाकिस्तानी सेना की सबसे प्रतिष्ठित और सबसे ज्यादा अनुशासित मानी जाने वाली यूनिट, SSG कमांडो शामिल थे। इन कमांडोज को बेहद सख्त परिस्थितियों में भी खुद पर नियंत्रण रखने और विपरीत परिस्थितियों का सामना करने की विशेष ट्रेनिंग दी जाती है। लेकिन दक्षिण वजीरिस्तान की भीषण गर्मी और पानी की भारी किल्लत के सामने उनका धैर्य भी जवाब दे गया। फ्रंटियर फोर्स (FF) रेजिमेंट के जवानों और SSG कमांडो के बीच हुए इस संघर्ष में केवल जुबानी जंग नहीं हुई, बल्कि जवानों ने एक-दूसरे को बुरी तरह पीटना शुरू कर दिया। इस मारपीट में लाठियों, डंडों और घूंसों का जमकर इस्तेमाल हुआ। कैंप के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने जब तक बीच-बचाव करने और स्थिति को शांत करने की कोशिश की, तब तक कई सुरक्षाकर्मी बुरी तरह लहूलुहान हो चुके थे और उनके शरीर पर गंभीर चोटें आ चुकी थीं।

22 सुरक्षाकर्मी घायल, 9 सैनिकों को करना पड़ा एयरलिफ्ट

इस हिंसक झड़प का परिणाम काफी भयावह रहा। इस संघर्ष में कुल 22 सुरक्षाकर्मी जख्मी हुए हैं। घटना के तुरंत बाद घायल जवानों को कैंप के भीतर ही प्राथमिक उपचार देने का प्रयास किया गया। लेकिन कुछ ही समय में स्थिति बिगड़ गई। घायलों में से 9 जवानों की हालत बहुत ज्यादा नाजुक होने लगी, जिसके बाद मिलिट्री कैंप में हड़कंप मच गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पाकिस्तान सेना के आला अधिकारियों ने तुरंत सैन्य हेलीकॉप्टरों की व्यवस्था की। इन 9 गंभीर रूप से घायल जवानों को आपातकालीन चिकित्सा सहायता के लिए तुरंत हवाई मार्ग से एयरलिफ्ट कर नजदीकी बड़े सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। इस हिंसक वारदात के बाद आसमान मंजा कैंप में तनाव चरम पर पहुंच गया, जिसे नियंत्रित करने के लिए सेना के शीर्ष कमांडरों को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा। सैन्य अधिकारियों ने इस गंभीर अनुशासनहीनता के मामले में उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।

घटना के मुख्य बिंदु और वर्तमान स्थिति

  • 22 जवान घायल: इस आपसी खूनी संघर्ष में कुल 22 सुरक्षाकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
  • 9 जवानों को किया गया एयरलिफ्ट: घायल सुरक्षाकर्मियों में से 9 की नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें हेलीकॉप्टर के जरिए सैन्य अस्पताल भेजा गया।
  • जांच के आदेश: घटना के बाद पाकिस्तानी सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने आसमान मंजा कैंप में स्थिति को संभाला और इस झड़प की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।

बुनियादी सुविधाओं का अभाव और गिरता सैन्य अनुशासन

दक्षिण वजीरिस्तान का क्षेत्र पाकिस्तानी सेना के लिए हमेशा से एक अशांत और चुनौतीपूर्ण फ्रंट रहा है। यहां तैनात जवानों को निरंतर आतंकवादी गतिविधियों और स्थानीय विद्रोहों से निपटना पड़ता है। ऐसे कठिन मोर्चे पर तैनात सैनिकों को बुनियादी सुविधाएं न मिलना उनकी कार्यक्षमता और मानसिक स्वास्थ्य पर भारी असर डाल रहा है। आसमान मंजा कैंप की यह हिंसक घटना यह दर्शाती है कि पाकिस्तानी सेना का रसद (लॉजिस्टिक्स) और सप्लाई मैनेजमेंट पूरी तरह से नाकाम हो चुका है। जब देश की रक्षा करने वाले जवानों को पीने का पानी तक नसीब नहीं होगा, तो उनका मानसिक तनाव बढ़ना स्वाभाविक है।

किसी भी देश की सेना में अनुशासन को सर्वोपरि माना जाता है, लेकिन पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता की कमी के कारण दो अलग-अलग रेजिमेंट्स के सैनिकों के बीच इस तरह की हिंसक झड़प होना सेना के भीतर गहरे असंतोष की ओर इशारा करता है। पाकिस्तान के कई रक्षा विश्लेषक भी अब इस मुद्दे पर गंभीर चिंता जता रहे हैं। उनका मानना है कि यदि सैन्य कैंपों में जवानों की बुनियादी जरूरतों जैसे पानी और भोजन की समय पर व्यवस्था नहीं की गई, तो अग्रिम चौकियों पर तैनात सैनिकों का मनोबल और तेजी से गिर सकता है, जो आने वाले समय में पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है।

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