अंबाला में सदियों पुरानी परंपरा
अंबाला का प्रसिद्ध फूल डोल मेला अपनी ऐतिहासिक धरोहर के लिए जाना जाता है। यह मंदिर करीब 150 साल पुराना है और यहाँ फूल डोल मेले की परंपरा की शुरुआत ब्रिटिश काल के दौरान हुई थी। तब से लेकर आज तक स्थानीय लोग और श्रद्धालु इस परंपरा को बड़े उत्साह के साथ निभाते आ रहे हैं।
जन्माष्टमी के बाद होता है विशेष आयोजन
इस मेले का मुख्य आयोजन जन्माष्टमी के अगले दिन किया जाता है। दिन की शुरुआत भगवान श्रीकृष्ण को पंचामृत से स्नान करवाकर की गई। धार्मिक विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करने के बाद प्रभु को छप्पन भोग अर्पित किए गए। इस आयोजन के दौरान नौका विहार की परंपरा भी निभाई जाती है, जो इस मेले का मुख्य आकर्षण है।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़
मंदिर के पुजारी देव ढोंडियाल ने बताया कि इस मेले में भाग लेने के लिए केवल अंबाला ही नहीं, बल्कि हरियाणा और पंजाब के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भगवान श्रीकृष्ण की शोभायात्रा इस मेले का सबसे विशेष हिस्सा है, जिसे देखने के लिए भक्तों में काफी उत्साह रहता है।
फूलों की वर्षा और आतिशबाजी
शोभायात्रा के दौरान रास्ते में जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा भगवान का भव्य स्वागत किया जाता है। भक्त सड़क पर फूल बरसाकर अपनी आस्था प्रकट करते हैं। उत्सव को और अधिक यादगार बनाने के लिए कई स्थानों पर आतिशबाजी का भी प्रदर्शन किया जाता है, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है।
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