संघर्ष और सफलता की अनूठी कहानी
बिहार के वैशाली जिले के मौना विशुनपुर गांव में जन्में प्रभात कुमार आज प्रशासनिक जगत में एक चर्चित नाम बन चुके हैं। उनकी शैक्षणिक यात्रा एक आम सरकारी स्कूल से शुरू हुई थी, लेकिन अपनी कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने कामयाबी की नई ऊंचाइयां छुई हैं। अपनी स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने मुजफ्फरपुर से इंटरमीडिएट और ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने महाराष्ट्र का रुख किया और वहां से एमबीए पूरा किया। अपनी पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद प्रभात कुमार को एक निजी बैंक में मैनेजर की जिम्मेदारी मिली। हालांकि, उनका लक्ष्य कुछ और ही था।
बैंक की नौकरी के साथ यूपीएससी की तैयारी
बैंकिंग क्षेत्र में एक स्थिर करियर होने के बावजूद, प्रभात कुमार ने सिविल सेवा में जाने का सपना नहीं छोड़ा। उन्होंने अपनी नौकरी के साथ-साथ यूपीएससी की कठिन परीक्षा के लिए तैयारी जारी रखी। उनकी लगन और निरंतर प्रयास का फल उन्हें वर्ष 2013 में मिला, जब उन्होंने यूपीएससी परीक्षा में सफलता प्राप्त करते हुए 204वीं रैंक हासिल की। आईपीएस बनने के बाद उनका प्रशासनिक सफर शुरू हुआ और उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए जनता के बीच अपनी धाक जमाई। वर्ष 2016 में उन्होंने धनबाद के बाघमारा में एसडीपीओ के रूप में अपनी सेवा दी। इसके अलावा, उन्होंने रामगढ़ के एसपी, जमशेदपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और पाकुड़ के एसपी जैसे अहम पदों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया है।
देश के टॉप 25 आईपीएस अधिकारियों में जगह
हाल ही में फेम इंडिया मैगजीन ने भारत के 25 सर्वश्रेष्ठ आईपीएस अधिकारियों की सूची जारी की है, जिसमें झारखंड के धनबाद में एसएसपी के पद पर तैनात प्रभात कुमार को 18वां स्थान मिला है। यह उपलब्धि उनके लिए काफी खास है क्योंकि इस प्रतिष्ठित सूची में जगह बनाने वाले वे झारखंड के एकमात्र आईपीएस अधिकारी हैं। उन्हें यह सम्मान उनकी प्रशासनिक कुशलता, अपराध पर नियंत्रण और पुलिसिंग में नई तकनीक व सोच को शामिल करने के लिए दिया गया है। अपनी इसी उत्कृष्ट सेवा के लिए उन्हें वर्ष 2023 में पुलिस मेडल फॉर मेरिटोरियस सर्विस से भी सम्मानित किया जा चुका है।
अपराधियों पर कड़ा प्रहार
धनबाद के एसएसपी के रूप में कार्यभार संभालने के बाद से ही प्रभात कुमार ने संगठित अपराध और माफियाओं के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया है। उनके नेतृत्व में पुलिस ने कुख्यात अपराधी प्रिंस खान और उसके नेटवर्क के खिलाफ लगातार कार्रवाई की है, जिसमें उनकी संपत्तियों को कुर्क करना भी शामिल है। उनके कार्यकाल की उपलब्धियों को निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:
- वर्ष 2025 में धनबाद पुलिस ने हत्या, लूट, डकैती, साइबर अपराध और मादक पदार्थों की तस्करी के कुल 1,799 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा।
- इसी दौरान पुलिस ने नशीले पदार्थों के एक बड़े गिरोह के सरगना को धर दबोचा और कई सक्रिय डकैत गिरोहों को नेस्तनाबूत किया।
- वर्ष 2026 में फरार और वांछित अपराधियों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया गया, जिसके तहत बड़ी संख्या में लंबित वारंटों का निपटारा किया गया।
- साइबर अपराधियों और म्यूल बैंक खातों पर सख्त कार्रवाई करते हुए आम जनता को ऑनलाइन ठगी से बचाया गया।
युवाओं के लिए प्रेरणा
प्रभात कुमार न केवल अपराध नियंत्रण पर ध्यान देते हैं, बल्कि प्रशासनिक सुधारों को लेकर भी सक्रिय रहते हैं। उन्होंने लंबित मामलों के जल्द निपटारे के साथ-साथ पीजी पोर्टल की शिकायतों पर विशेष जोर दिया है। साथ ही, पुलिस बल की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया है। एक सरकारी स्कूल से निकलकर बैंक मैनेजर बनने और फिर देश के शीर्ष आईपीएस अधिकारियों में शुमार होने का उनका सफर आज के युवाओं के लिए एक बड़ा उदाहरण है। वे साबित करते हैं कि यदि सही दिशा में मेहनत की जाए, तो किसी भी पृष्ठभूमि से आने वाला व्यक्ति सर्वोच्च पदों तक पहुंच सकता है।
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