दिल्ली की मजदूरी से शुरू हुआ सफर, अब खिलौनों के व्यापार से कमाते हैं 20 हजार महीना

मध्य प्रदेश के छतरपुर के रहने वाले मोहम्मद अंसारी ने कभी दिल्ली में मजदूरी की थी, लेकिन आज वे अपने खिलौनों के कारोबार से आत्मनिर्भर होकर हर महीने 20 हजार रुपए की कमाई कर रहे हैं।

संघर्ष से भरा शुरुआती जीवन

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के निवासी मोहम्मद अंसारी की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो विपरीत परिस्थितियों में हार नहीं मानते। मोहम्मद ने बहुत कम उम्र में ही गरीबी का सामना किया था। आर्थिक तंगी के कारण उनका मन पढ़ाई में नहीं लग पाया और कक्षा 5वीं के बाद ही उन्होंने स्कूल जाना छोड़ दिया। बचपन से ही उनके मन में परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने का दबाव था। उन्होंने अपने पिता के साथ मिलकर घर के खर्चों में हाथ बंटाना शुरू कर दिया था। समय बीतने के साथ ही उनके ऊपर जिम्मेदारियां बढ़ती गईं और कम उम्र में ही उनकी शादी हो गई।

दिल्ली में की कड़ी मेहनत

विवाह के पश्चात जैसे-जैसे घर की जरूरतें बढ़ीं, मोहम्मद को अपनी आमदनी का जरिया बढ़ाना पड़ा। इसी कारण वे अपने गृह जिले छतरपुर से निकलकर दिल्ली की ओर रुख किए। दिल्ली जैसे बड़े महानगर में उन्होंने खुद को साबित करने के लिए हर संभव छोटे-बड़े काम किए। मोहम्मद ने फैक्ट्रियों में मजदूरी करने से लेकर सामान ढोने यानी पल्लेदारी और सुपरवाइजर तक के कार्यों में अपना पसीना बहाया। लगभग 5 साल तक वे अलग-अलग शहरों में रहकर काम करते रहे, लेकिन बड़े शहरों की महंगाई और खर्चों के बीच वे अपने परिवार के लिए बचत करने में नाकाम रहे। अंततः, उन्होंने वापस अपने शहर छतरपुर लौटने का फैसला किया।

खिलौनों के व्यवसाय का विचार

घर लौटने के बाद मोहम्मद एक नया काम शुरू करना चाहते थे, लेकिन उनके पास पूंजी की भारी कमी थी। वे कोई बड़ा निवेश करने की स्थिति में नहीं थे। ऐसे में उनके एक करीबी मित्र ने उन्हें खिलौनों के व्यापार का सुझाव दिया। यह विचार उन्हें काफी व्यावहारिक लगा, क्योंकि खिलौनों की मांग हमेशा बनी रहती है। मोहम्मद ने अपनी बचत से 50 हजार रुपए जुटाए और इसी पूंजी से अपना छोटा सा व्यापार शुरू किया।

मेलों में दुकान लगाने की रणनीति

मोहम्मद ने यह निर्णय लिया कि वे कोई महंगी दुकान किराए पर लेने के बजाय अस्थाई दुकान के मॉडल पर काम करेंगे। वे बताते हैं कि बाजार में पक्की दुकान लेने पर हर महीने किराया देना पड़ता है, जिससे मुनाफे पर असर पड़ता है। इसलिए उन्होंने छतरपुर और उसके आसपास आयोजित होने वाले मेलों को अपने कारोबार का केंद्र बनाया। वे कहते हैं कि मेले में भले ही अन्य सामान बिके या न बिके, बच्चों के पसंदीदा खिलौने जरूर बिकते हैं। उनकी दुकान पर खिलौने 20 रुपए से लेकर 200 रुपए की कीमत सीमा में उपलब्ध रहते हैं। उनका मानना है कि मेले में आने वाले ग्राहक सस्ते और आकर्षक खिलौने ही पसंद करते हैं, इसलिए वे थोक भाव में कम कीमत वाला माल ही लाते हैं।

आत्मनिर्भरता की नई मिसाल

आज मोहम्मद अंसारी अपने काम से पूरी तरह संतुष्ट हैं। वे गर्व से बताते हैं कि जो काम वे दिल्ली में दूसरों की गुलामी में कर रहे थे, उससे बेहतर मुनाफा आज वे अपने घर के पास रहकर कमा रहे हैं। वे अपने इस खिलौने के व्यवसाय से महीने के 20 हजार रुपए आसानी से कमा लेते हैं। यह कमाई उनके परिवार के भरण-पोषण के लिए पर्याप्त है और सबसे बड़ी बात यह है कि उन्हें अब काम की तलाश में कहीं और भटकना नहीं पड़ता। उनकी यह यात्रा साबित करती है कि छोटी पूंजी और सही सूझबूझ से अपना खुद का रोजगार खड़ा करना संभव है।

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