गर्मियों में शिमला-मनाली नहीं, बिहार की यह जगह जून में बन जाती है पर्यटकों की पसंद, मोह लेती है हर किसी का मन

बिहार के जमुई जिले में स्थित सिमुलतला का करीब 300 साल पुराना नालडेंगा हाउस आज खंडहर में तब्दील हो चुका है, फिर भी अपनी रहस्यमयी कथा, घने जंगल, धरहरा झरने और फिल्म शूटिंग के कारण यह जगह जून में पर्यटकों से गुलज़ार रहती है।

सिमुलतला का ऐतिहासिक नालडेंगा हाउस

बिहार के जमुई जिले में सिमुलतला स्थित नालडेंगा हाउस एक बेहद चर्चित स्थल है। महलनुमा यह भवन करीब 300 वर्ष पुराना है और इसे बांग्लादेश के नालडेंगा राजबाड़ी के राजाओं ने बनवाया था। कहा जाता है कि वहां के राजा स्वास्थ्य लाभ और आराम के लिए सिमुलतला आया करते थे और इसी मकसद से इस विशाल इमारत का निर्माण कराया गया।

52 कमरे और 53 दरवाजों वाली भव्य इमारत

कभी यह महल अपनी शानो-शौकत के लिए मशहूर था। बताया जाता है कि इसमें 52 कमरे और 53 दरवाजे हुआ करते थे। इतने विशाल परिसर को देखकर आज भी सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि अपने दौर में इसका वैभव कितना भव्य रहा होगा। हालांकि वक्त के साथ यह भवन अब खंडहर बन चुका है, फिर भी इसके अवशेष इतिहास में रुचि रखने वालों को आज भी अपनी ओर खींचते हैं।

महल से जुड़ी रहस्यमयी कथा

नालडेंगा हाउस सिर्फ अपनी वास्तुकला के लिए ही नहीं, बल्कि इससे जुड़ी एक रहस्यमयी कहानी के कारण भी प्रसिद्ध है। स्थानीय लोगों में प्रचलित कथा के अनुसार राजा ने अपने सिपाहियों को आदेश दे रखा था कि तीन बार आवाज देने पर अगर कोई जवाब न मिले तो गोली चला दी जाए। एक दिन जब राजा लघुशंका के लिए गए थे और आवाज देने पर कोई उत्तर नहीं आया, तो सिपाहियों ने गलती से गोली चला दी, जिससे राजा की मृत्यु हो गई।

बिहार का मिनी शिमला

नालडेंगा हाउस के आसपास का इलाका भी कम खूबसूरत नहीं है। घने जंगलों के बीच से गुजरती सड़कें, पहाड़ी माहौल और प्राकृतिक नज़ारे यात्रियों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। यही कारण है कि सिमुलतला को बिहार का मिनी शिमला कहा जाता है। यहां की सुबह और शाम का दृश्य किसी भी हिल स्टेशन से कम नहीं लगता।

धरहरा झरना और प्रसिद्ध कोठियां

प्रकृति प्रेमियों के लिए यहां नालडेंगा हाउस के साथ-साथ धरहरा वाटर फॉल भी देखने लायक है। बरसात और उसके बाद के मौसम में यह झरना और भी मनमोहक दिखाई देता है। इसके अलावा सिमुलतला की मशहूर कोठियां भी पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। कहा जाता है कि स्वामी विवेकानंद समेत कई महान विभूतियां यहां ठहर चुकी हैं।

कैसे पहुंचें सिमुलतला

सिमुलतला तक पहुंचना काफी आसान है। सड़क मार्ग से जमुई, झाझा, देवघर और पटना से सीधे यहां आया जा सकता है। जसीडीह से सिमुलतला की दूरी 35 किलोमीटर है और निजी वाहन से यहां सहजता से यात्रा की जा सकती है। रेल मार्ग से आने वाले पर्यटक सिमुलतला रेलवे स्टेशन पर उतर सकते हैं, जो हावड़ा-दिल्ली मुख्य रेलखंड पर स्थित है।

फिल्म शूटिंग और फोटोग्राफी का पसंदीदा ठिकाना

फिल्मों और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए भी यह जगह बेहद खास है। प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के चलते यहां कई बंगाली और हिंदी फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। हाल ही में बॉलीवुड अभिनेता संजय मिश्रा अपनी बंगाली फिल्म की शूटिंग के लिए यहां पहुंचे थे।

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