फैशन बनाम सेहत का गंभीर संकट
आज के दौर में फैशन का मतलब फिटिंग वाली जींस और स्टाइलिश लेगिंग बन गया है। हम अक्सर ऐसे कपड़े पहनकर खुद को आत्मविश्वास से भरपूर और आकर्षक महसूस करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही पहनावा आपके शरीर के भीतर एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या को जन्म दे रहा है? कानपुर स्थित जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की एक नई और चिंताजनक केस स्टडी ने इस पर से पर्दा उठाया है। अध्ययन में स्पष्ट किया गया है कि बहुत ज्यादा टाइट कपड़े पहनने से जांघ की एक मुख्य नस पर लगातार दबाव पड़ता है, जो 'मेराल्जिया पैरास्थेटिका' (Meralgia Paresthetica) नामक बीमारी का कारण बन रहा है।
आंकड़े जो आपको सोचने पर मजबूर कर देंगे
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज द्वारा पिछले आठ महीने में किए गए अध्ययन के नतीजे बेहद चौकाने वाले हैं। इस दौरान कुल 368 मरीज ऐसे सामने आए हैं जो इस समस्या से जूझ रहे थे। आंकड़ों की गहराई में जाने पर पता चलता है कि इनमें से 70 फीसदी मरीज 35 से 48 वर्ष की आयु वर्ग के हैं। वहीं, प्रभावित लोगों में 60 फीसदी महिलाएं हैं। न्यूरो विभाग के विशेषज्ञों का मानना है कि मोटापे से ग्रस्त महिलाओं में यह समस्या और भी ज्यादा देखी जा रही है।
कैसे काम करती है ये बीमारी
विशेषज्ञों के अनुसार, हमारे शरीर में 'लेटरल क्यूटेनियस नर्व' (Lateral Cutaneous Nerve) नाम की एक नस होती है जो जांघ के बाहरी हिस्से को संवेदनाएं पहुंचाती है। यह नस कमर के निचले हिस्से से गुजरती हुई जांघ तक पहुंचती है। जब आप बहुत टाइट जींस, कसी हुई लेगिंग या फिर कमर पर बहुत मजबूती से कसी हुई बेल्ट का इस्तेमाल करते हैं, तो यह नस लगातार दबाव में रहती है। लंबे समय तक इस नस के दबने से इसके काम करने की क्षमता प्रभावित होती है, जिसे चिकित्सकीय भाषा में मेराल्जिया पैरास्थेटिका कहा जाता है।
लक्षण और पहचान कैसे करें
इस बीमारी के लक्षण शुरुआत में बहुत सामान्य लग सकते हैं, लेकिन समय के साथ ये गंभीर हो जाते हैं। मुख्य रूप से व्यक्ति को जांघ के बाहरी हिस्से में जलन, चुभन, झनझनाहट और सुन्नपन महसूस होता है। हैरानी की बात यह है कि त्वचा पर बाहर से कोई चोट या निशान नहीं दिखता, लेकिन अंदर ही अंदर जलन का अनुभव होता है। मरीजों का कहना है कि जब वे लंबे समय तक खड़े रहते हैं या पैदल चलते हैं, तो यह दर्द और असुविधा कहीं अधिक बढ़ जाती है।
गलत इलाज से बढ़ रही है परेशानी
इस केस स्टडी का एक सबसे दुखद पहलू यह है कि लगभग 80 फीसदी मरीज शुरुआत में इस समस्या को पहचान ही नहीं पाते। वे इसे सामान्य कमर दर्द या मांसपेशियों की थकान मानकर गलत इलाज कराते रहते हैं। चूंकि दर्द जांघ के बाहरी हिस्से में होता है और वहां के ऊतकों में जलन का अहसास होता है, इसलिए मरीज डॉक्टर के पास जाने के बजाय इसे नजरअंदाज करते हैं या खुद से ही दर्दनिवारक दवाएं लेते रहते हैं। गलत उपचार से यह समस्या और भी विकट हो सकती है।
डॉक्टरों की अहम सलाह
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के न्यूरो विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष सिंह और अन्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि शरीर द्वारा दिए जा रहे इन संकेतों को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। यदि आपको लगातार जांघ के ऊपरी हिस्से या कमर के पास सुन्नपन महसूस हो रहा है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। बचाव का सबसे सरल और प्रभावी तरीका है कि आप बहुत ज्यादा टाइट कपड़ों से परहेज करें। ढीले और आरामदायक कपड़े पहनें, अपनी बेल्ट या पायजामे के नाड़े को बहुत ज्यादा न कसें और अपने स्वास्थ्य को फैशन से ऊपर प्राथमिकता दें। समय रहते सावधानी बरतना ही आपको इस गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्या से बचा सकता है।
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