फ्लाइट टिकटों की मनमानी कीमतों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कल होगी अहम सुनवाई

त्योहारों और आपातकालीन स्थितियों के दौरान विमान कंपनियों द्वारा वसूले जाने वाले अत्यधिक किराए के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने वाली है। केंद्र सरकार ने इस मामले में 'भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024' के तहत नए नियमों का मसौदा कोर्ट में पेश कर दिया है।

त्योहारों के सीजन में यात्रियों की जेब पर पड़ रही मार

दिवाली, छठ जैसे त्योहारों या किसी जरूरी काम के लिए अचानक की गई हवाई यात्रा अक्सर आम आदमी के बजट से बाहर हो जाती है। एयरलाइंस कंपनियों की मनमानी के कारण सामान्य दिनों में 4000 रुपए से 5000 रुपए में मिलने वाली टिकट अचानक 15000 रुपए से 20000 रुपए तक पहुंच जाती है। अब इस मनमानी और एयरलाइंस द्वारा वसूले जा रहे भारी भरकम अतिरिक्त शुल्कों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट एक बड़ा निर्णय लेने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए शीर्ष अदालत में 7 सितंबर को महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है।

कौन कर रहा है पैरवी और क्या है मांग

इस पूरे मामले की शुरुआत सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन द्वारा दायर की गई याचिका से हुई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि निजी विमान कंपनियां यात्रियों से मनमाना किराया वसूल रही हैं। त्योहारों और छुट्टियों के दौरान टिकट की कीमतों में होने वाला अचानक उछाल और कंपनियों द्वारा लगाए जाने वाले गुप्त शुल्क (हिडन चार्ज) यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बने हुए हैं।

इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट रवींद्र श्रीवास्तव ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सरकारी एजेंसियों में इस तरह की लूट को रोकने के लिए ठोस इच्छाशक्ति का अभाव है। मौजूदा नियम पूरी तरह से निष्प्रभावी साबित हो रहे हैं और इसका सीधा खामियाजा आम यात्रियों को उठाना पड़ रहा है। याचिका में मांग की गई है कि एविएशन सेक्टर यानी विमानन क्षेत्र के लिए एक मजबूत और स्वतंत्र रेगुलेटर का गठन किया जाए, जो पूरी किराया प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित कर सके और यात्रियों के अधिकारों की रक्षा कर सके।

कोर्ट की पिछली सख्त टिप्पणियां

सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मसले पर पहले से ही काफी गंभीर रुख अपनाए हुए है। साल की शुरुआत में ही कोर्ट ने विमान किराए को लेकर कड़ी चिंता व्यक्त की थी। इसी साल जनवरी के महीने में अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा था कि त्योहारों या छुट्टियों के दौरान किराए का अचानक आसमान छूना बेहद चिंताजनक विषय है और अगर जरूरत पड़ी तो कोर्ट इसमें हस्तक्षेप करेगा। इसके बाद 15 मई को हुई सुनवाई के दौरान बेंच ने और सख्त लहजे में टिप्पणी करते हुए कहा था कि एयरफेयर यानी विमान किराया तय करने के लिए एक तार्किक और स्पष्ट प्रणाली (रेशनल सिस्टम) का होना अनिवार्य है।

सरकार का क्या है रुख और नए नियम

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से भी इस बारे में जवाब मांगा था कि यात्रियों को राहत देने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है। 17 अगस्त को हुई पिछली सुनवाई में मंत्रालय ने कोर्ट को सूचित किया था कि सरकार ने विमानन क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए 'भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024' के तहत नए नियमों को तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। सरकार ने इन नियमों का मसौदा एक सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया था। साथ ही सरकार की तरफ से यह भी कहा गया था कि इन नियमों पर अंतिम दौर की चर्चा चल रही है, जिसे तीन सप्ताह के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।

अब आगे क्या होगा

7 सितंबर को होने वाली सुनवाई में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच इस मामले पर विचार करेगी। चूंकि सरकार ने नए नियमों का मसौदा कोर्ट को सौंप दिया है, इसलिए उम्मीद जताई जा रही है कि इस सुनवाई के बाद आम हवाई यात्रियों को टिकटों की बढ़ती कीमतों और एयरलाइंस की मनमानी से बड़ी राहत मिल सकती है। अब सबकी निगाहें इसी बात पर टिकी हैं कि सुप्रीम कोर्ट और सरकार मिलकर इस 'लूट' पर लगाम लगाने के लिए क्या 'लक्ष्मण रेखा' खींचते हैं।

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