मौसम के बदलाव में सर्दी-खांसी और बुखार से न घबराएं, डॉक्टर ने दी बेहद जरूरी सलाह

मौसम में बदलाव और बारिश के चलते सर्दी, खांसी और बुखार के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य फ्लू से डरने की जरूरत नहीं है और यह कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

बदलते मौसम और लगातार हो रही बारिश के इस दौर में सर्दी, खांसी, गले में खराश और तेज बुखार जैसी समस्याएं तेजी से अपने पैर पसार रही हैं। अस्पतालों में इन दिनों ऐसे मरीजों की तादाद काफी बढ़ गई है। इस बदलते मौसम में सामान्य वायरल या फ्लू के लक्षणों को देखकर कई लोग घबराहट में आ जाते हैं। लोग इसे स्वाइन फ्लू या कोई अन्य गंभीर बीमारी मानकर परेशान होने लगते हैं और बिना डॉक्टरी सलाह के तरह-तरह की दवाइयां खाना शुरू कर देते हैं। इस स्थिति को लेकर ग्रेटर नोएडा के प्रतिष्ठित जिम्स अस्पताल के विशेषज्ञों ने बेहद महत्वपूर्ण सलाह साझा की है और लोगों से किसी भी तरह की घबराहट या पैनिक से बचने की अपील की है। डॉक्टरों का कहना है कि सामान्य फ्लू के लक्षण कुछ ही दिनों में खुद-ब-खुद दूर हो जाते हैं और मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो जाता है।

क्या हर जुकाम और बुखार स्वाइन फ्लू है? जानिए डॉक्टर की राय

जिम्स अस्पताल के डायरेक्टर, ब्रिगेडियर डॉ. राकेश गुप्ता ने इस विषय पर विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि इस साल अधिक बारिश और वातावरण में अत्यधिक नमी यानी ह्यूमिडिटी के कारण फ्लू के मामलों में तेजी से उछाल देखा जा रहा है। उन्होंने लोगों को आश्वस्त करते हुए स्पष्ट किया कि हर तरह के जुकाम, खांसी और बुखार को सीधे स्वाइन फ्लू समझ लेना बिल्कुल भी सही नहीं है। सामान्य फ्लू में भी बिल्कुल ऐसे ही लक्षण दिखाई देते हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में यह कोई गंभीर या चिंताजनक स्थिति नहीं होती है। इसलिए सामान्य लक्षणों को देखकर बिना वजह परेशान होने की कोई आवश्यकता नहीं है।

इन्फ्लूएंजा लाइक इलनेस और इसके प्रमुख लक्षण

चिकित्सकीय भाषा में सामान्य फ्लू और उससे मिलते-जुलते लक्षणों को 'इन्फ्लूएंजा लाइक इलनेस' यानी ILI के नाम से जाना जाता है। इस श्रेणी में आने वाले मरीजों में आमतौर पर बेहद सामान्य लक्षण ही दिखाई देते हैं। डॉ. राकेश गुप्ता के अनुसार, इसके प्रमुख लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • जुकाम होना और नाक का बहना।
  • लगातार सूखी या बलगम वाली खांसी की शिकायत।
  • गले में हल्का या मध्यम दर्द और खराश होना।
  • शरीर में दर्द के साथ हल्का या तेज बुखार आना।

डॉक्टर ने बताया कि यदि किसी सामान्य व्यक्ति में ये लक्षण हल्के स्तर पर हैं, तो उन्हें तुरंत किसी बड़े अस्पताल की तरफ भागने या किसी भी प्रकार की विशेष जांच कराने की जरूरत नहीं होती है। ऐसे मरीज घर पर रहकर ही आसानी से ठीक हो सकते हैं। उनके लिए सबसे बेहतर उपाय यही है कि वे घर पर आराम करें और पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी और अन्य तरल पदार्थों का सेवन करें। सामान्य मामलों में बिना किसी विशेष दवा के भी कुछ ही दिनों के भीतर मरीज की सेहत में तेजी से सुधार होने लगता है।

तीन से पांच दिनों के भीतर ठीक हो जाता है सामान्य फ्लू

विशेषज्ञों के मुताबिक, सामान्य फ्लू का असर शरीर पर बहुत लंबे समय तक नहीं रहता है। आमतौर पर इसके लक्षण केवल 3 से 5 दिन तक ही बने रहते हैं। इसके बाद मरीज की तबीयत में धीरे-धीरे सुधार आने लगता है और वह पूरी तरह से स्वस्थ हो जाता है। डॉ. गुप्ता ने लोगों से अपील की है कि वे मामूली लक्षणों को देखकर घबराने के बजाय अपनी सावधानी और आराम पर अधिक ध्यान दें। बिना आवश्यकता के अस्पताल जाने या बेवजह की जांचें कराने से बचना चाहिए। यदि बीमारी के लक्षण सामान्य हैं, तो घर पर रहकर आराम करना और परिवार के अन्य सदस्यों से थोड़ी दूरी बनाकर रखना ही सबसे बेहतर विकल्प है। इससे परिवार के बाकी लोगों में संक्रमण फैलने का खतरा काफी कम हो जाता है।

हाई रिस्क श्रेणी वाले मरीजों को बरतनी होगी विशेष सावधानी

यद्यपि सामान्य फ्लू अधिकांश लोगों के लिए नुकसानदेह नहीं होता है और सामान्य आराम से ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ विशेष लोगों के लिए यह गंभीर रूप भी धारण कर सकता है। डॉक्टरों ने ऐसे लोगों को 'हाई रिस्क' यानी उच्च जोखिम वाली श्रेणी में रखा है। इन लोगों को लक्षण दिखाई देने पर जरा भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। इस श्रेणी में निम्नलिखित लोग शामिल हैं:

  • कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज।
  • लंबे समय से स्टेरॉयड या रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम करने वाली अन्य दवाएं लेने वाले लोग।
  • गंभीर श्वसन संबंधी विकारों (जैसे फेफड़ों की बीमारी या गंभीर अस्थमा) से जूझ रहे मरीज।
  • अन्य किसी गंभीर पुरानी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति।

डॉ. राकेश गुप्ता ने स्पष्ट किया कि यदि हाई रिस्क श्रेणी में आने वाले किसी भी मरीज की तबीयत सामान्य फ्लू के बाद अधिक खराब होने लगती है, तो उन्हें बिना समय गंवाए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और अस्पताल जाना चाहिए। गंभीर श्वसन संबंधी बीमारी वाले मरीजों के लिए ही चिकित्सकीय गाइडलाइन के अनुसार जांच की आवश्यकता होती है, आम लोगों के लिए नहीं।

बचाव के लिए मास्क पहनें और खुद को रखें हाइड्रेटेड

फ्लू के संक्रमण से खुद को सुरक्षित रखने और इसे दूसरों तक फैलने से रोकने के लिए डॉ. गुप्ता ने कुछ बेहद आसान और व्यावहारिक सावधानियां बरतने की सलाह दी है:

  • मास्क का प्रयोग करें: यदि आपको किसी जरूरी काम से घर से बाहर निकलना पड़ रहा है, तो हमेशा चेहरे पर मास्क का इस्तेमाल करें।
  • उचित दूरी बनाएं: भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें और लोगों से उचित शारीरिक दूरी बनाए रखें।
  • हाथों की सफाई: समय-समय पर अपने हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोते रहें या सैनिटाइज़र का उपयोग करें।
  • पर्याप्त हाइड्रेशन: शरीर में पानी की कमी बिल्कुल न होने दें। दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य तरल पदार्थों (जैसे नारियल पानी, सूप या जूस) का सेवन करें। पर्याप्त हाइड्रेशन शरीर को संक्रमण से तेजी से उबरने में मदद करता है।
  • भरपूर आराम: शरीर को ठीक होने के लिए पर्याप्त नींद और आराम देना बेहद जरूरी है।

योग और मेडिटेशन को भी दिनचर्या में करें शामिल

शारीरिक रूप से मजबूत रहने और बीमारियों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाने के लिए डॉ. राकेश गुप्ता ने लोगों को एक और महत्वपूर्ण सलाह दी है। उन्होंने कहा कि लोगों को अपने दैनिक जीवन में योग और मेडिटेशन (ध्यान) को अवश्य शामिल करना चाहिए। नियमित रूप से की जाने वाली शारीरिक गतिविधियां, मानसिक तनाव को दूर रखने के उपाय और एक संतुलित एवं स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर हम अपने शरीर को बहुत मजबूत बना सकते हैं। डॉ. गुप्ता ने अंत में संदेश दिया कि सामान्य फ्लू को लेकर पैनिक करने की कोई जरूरत नहीं है। जुकाम, खांसी और हल्का बुखार होने पर घबराने के बजाय आराम, हाइड्रेशन और संक्रमण से बचाव के उपायों को अपनाएं। यदि मरीज हाई रिस्क श्रेणी में आता है या उसकी तबीयत लगातार बिगड़ रही है, तभी बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें।

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