संयुक्त राष्ट्र में भारत का कड़ा रुख
भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी सीमाओं और क्षेत्रीय अखंडता को लेकर एक बार फिर अपनी स्थिति बेहद स्पष्ट कर दी है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में दुनिया भर के देशों के लिए सटीक और एक समान मानचित्रों को बढ़ावा देने से संबंधित एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया गया था। भारत ने इस प्रस्ताव के पक्ष में अपना मत तो दिया, लेकिन इसके साथ ही दुनिया के तमाम देशों को अपनी संप्रभुता के सम्मान की याद भी दिलाई।
सीमाओं के निर्धारण में तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप नामंजूर
संयुक्त राष्ट्र के मंच से नई दिल्ली ने बेहद स्पष्ट और दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी है। भारत ने साफ किया है कि संयुक्त राष्ट्र के इस प्रस्ताव को दिए गए समर्थन का केवल एक ही अर्थ है, और वह है वैज्ञानिक कार्टोग्राफी के सिद्धांतों को बढ़ावा देना। इस समर्थन को किसी भी रूप में भारत की सीमाओं के चित्रण में किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप या मनमाने बदलाव की अनुमति के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
अपनी संप्रभुता पर भारत का कड़ा संदेश
भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आगाह करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी भौगोलिक सीमाओं के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या बाहरी दखलंदाजी को कतई सहन नहीं करेगा। देश की सीमाओं का सही और वास्तविक चित्रण भारत की संप्रभुता का मुख्य हिस्सा है, और इस पर केवल भारत का ही अधिकार सुरक्षित है।
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