वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर लंबे समय से चले आ रहे सैन्य तनाव को कम करने की दिशा में एक बेहद ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। भारत और चीन की सेनाएं अरुणाचल प्रदेश सेक्टर में पहली बार कोर कमांडर स्तर की उच्चस्तरीय वार्ता करने जा रही हैं। रणनीतिक और सैन्य दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले इस पूर्वी क्षेत्र में सीधे कोर कमांडर स्तर पर संवाद शुरू होने जा रहा है, जिसे सीमा पर शांति बहाली की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। यह अहम बैठक भारतीय सीमा के भीतर स्थित वाचा-दमाई बॉर्डर मीटिंग प्वॉइंट पर आयोजित की जाएगी।
सीमा विवाद सुलझाने के लिए ऐतिहासिक बैठक
यह बैठक रविवार को होने वाली है, जो दोनों देशों के बीच सैन्य संबंधों को सुधारने की दिशा में एक नई शुरुआत होगी। समाचार एजेंसी ANI ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि इस वार्ता का प्राथमिक लक्ष्य अरुणाचल प्रदेश से जुड़े सीमावर्ती इलाकों में दोनों सेनाओं के बीच मौजूदा गतिरोधों और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर खुलकर चर्चा करना है। दोनों पक्षों की कोशिश इन समस्याओं को सुलझाने के लिए एक व्यावहारिक और ठोस रास्ता तलाशने की होगी। यह उच्चस्तरीय बातचीत ऐसे नाजुक समय पर हो रही है, जब भारत और चीन के बीच सीमा मुद्दों को सुलझाने के लिए सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर लगातार बातचीत के दौर चल रहे हैं।
अरुणाचल प्रदेश में पहली बार कोर कमांडर स्तर की चर्चा
यह पहली बार है जब भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र में कोर कमांडर स्तर की सीधी बातचीत हो रही है। अभी तक पूर्वी क्षेत्र में इस स्तर की उच्चस्तरीय सैन्य बैठकें नहीं देखी गई थीं। सामरिक जानकारों के अनुसार, भारत और चीन की अपनी-अपनी सीमाओं में LAC को लेकर अलग-अलग अवधारणाएं हैं। इसी अलग समझ और दावों के कारण अक्सर जमीनी स्तर पर दोनों सेनाओं के बीच तनाव या आमने-सामने की स्थिति पैदा हो जाती है। अरुणाचल प्रदेश में सैन्य मुस्तैदी बढ़ाने के साथ-साथ भारतीय सेना ने उन क्षेत्रों में चीनी सैनिकों के आक्रामक रवैये से निपटने के लिए बेहद कड़ा और सुरक्षात्मक रुख अख्तियार किया है, जहां वर्तमान में विवाद चल रहे हैं।
बैठक से जुड़ी मुख्य बातें और रणनीतिक महत्व
इस महत्वपूर्ण बैठक के विभिन्न पहलुओं और रणनीतिक ढांचे को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:
- भारतीय सेना का प्रतिनिधित्व: इस उच्चस्तरीय वार्ता में भारतीय पक्ष का प्रतिनिधित्व तीन कोर कमांडर करेंगे, जो चीन के सैन्य जनरलों के साथ सीधे मेज पर बैठेंगे।
- सुरक्षा का जिम्मा: अरुणाचल प्रदेश में चीन से सटी सीमा की सुरक्षा का दारोमदार भारतीय सेना के दो प्रमुख सैन्य फॉर्मेशन पर है। इनमें असम के तेजपुर में स्थित 4 कोर और नागालैंड के रंगापहार में स्थित 3 कोर शामिल हैं। इन कोर के कमांडर इस बैठक में रणनीतिक चर्चा का हिस्सा होंगे।
- सीमा बैठक स्थल (BPM): पूरे भारत-चीन LAC पर कुल पांच बॉर्डर पर्सनल मीटिंग (BPM) पॉइंट हैं। इनमें से दो सीमा बैठक स्थल अरुणाचल प्रदेश में आते हैं, और वाचा उन्हीं महत्वपूर्ण पॉइंट में से एक है।
- लद्दाख से अलग पहल: इससे पहले तक सीमा से जुड़े गंभीर गतिरोधों को सुलझाने के लिए दोनों देशों के सैन्य कमांडर मुख्य रूप से लद्दाख सेक्टर के चुशुल-मोल्डो बॉर्डर मीटिंग पॉइंट पर बैठकें करते थे। साल 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद, जिसमें दोनों सेनाओं को भारी जनहानि उठानी पड़ी थी, लद्दाख में सैन्य स्तर की वार्ताएं अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई थीं। अब उसी तर्ज पर अरुणाचल सेक्टर में भी उच्चस्तरीय संवाद तंत्र को सक्रिय किया गया है।
अजीत डोभाल की बीजिंग यात्रा के बाद बनी सहमति
सैन्य स्तर पर होने वाली यह महत्वपूर्ण वार्ता हाल ही में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल की चीन यात्रा के ठीक बाद आयोजित की जा रही है। अपनी इस यात्रा के दौरान एनएसए डोभाल ने बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ 'स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव्स डायलॉग' (विशेष प्रतिनिधि वार्ता) के तहत व्यापक और द्विपक्षीय चर्चा की थी। इस बैठक का मुख्य फोकस दोनों देशों के बीच सीमा निर्धारण की प्रक्रिया को सुचारू बनाने और सीमा पार सहयोग को बढ़ावा देने पर केंद्रित था। इस कूटनीतिक यात्रा के बाद ही दोनों पक्षों ने LAC पर शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए कई अहम जमीनी कदम उठाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की थी।
राजनयिक गलियारों में भी इस घटनाक्रम को लेकर काफी उत्सुकता है। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग आगामी 12-13 सितंबर को भारत में आयोजित होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत का दौरा कर सकते हैं। चीनी राष्ट्रपति के संभावित दौरे से ठीक पहले सीमा पर तनाव कम करने की इस सैन्य कोशिश को बेहद महत्वपूर्ण कूटनीतिक तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।
पूर्व सीडीएस ने बताया 'स्वागत योग्य कदम'
इस नई सैन्य पहल का भारतीय रक्षा बिरादरी ने भी खुले दिल से स्वागत किया है। भारत के पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान (सेवानिवृत्त) ने इस कदम की सराहना की है। 5 सितंबर को नई दिल्ली के तीन मूर्ति भवन कॉम्प्लेक्स में 'भारत की सुरक्षा के लिए खतरे और चुनौतियां' विषय पर आयोजित एक विशेष व्याख्यान के दौरान उन्होंने इस पर अपनी बात रखी थी।
जनरल अनिल चौहान ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में सैन्य तनाव को कम करने के लिए हॉटलाइन स्थापित करने की संभावनाओं और कोर कमांडर स्तर की बातचीत शुरू होने की रिपोर्टों का विशेष जिक्र किया। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को दोनों देशों के बीच शांति और विश्वास बहाली की दिशा में 'एक बेहद स्वागत योग्य कदम' बताया है। इस बैठक से उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में सीमा पर दोनों सेनाओं के बीच अनावश्यक टकराव को रोकने में मदद मिलेगी और एक स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त होगा।
https://hindi.news18.com/news/nation/lac-tension-indian-chinese-armies-face-to-face-in-arunachal-first-ever-corps-commander-level-meeting-at-border-10811149.html