अनपेक्षित मिलन की कहानी
हरियाणा के जींद जिले में एक सरकारी प्रक्रिया के दौरान एक ऐसी हृदयस्पर्शी घटना सामने आई, जिसने बरसों से बिछड़े दो भाइयों को फिर से आपस में मिला दिया। एसआईआर प्रक्रिया के सिलसिले में एक सरकारी स्कूल में हुई मुलाकात ने 35 साल पुराने दुखद अलगाव को खत्म कर दिया।
प्रमाणपत्र लेने पहुंचे थे सीताराम
मूल रूप से पंजाब के रहने वाले सीताराम अपने किसी आवश्यक दस्तावेज या प्रमाणपत्र को हासिल करने के लिए मनोहरपुर के एक पुराने सरकारी स्कूल में पहुंचे थे। उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि इस स्कूल की दहलीज उन्हें उनके खोए हुए परिवार तक पहुंचा देगी। वहां पहुंचने के बाद जब बातचीत और प्रक्रिया का दौर चला, तो कुछ ऐसी जानकारियां सामने आईं जिनसे सीताराम के परिवार की पहचान उजागर होने लगी।
बीएलओ की सक्रियता ने बदली किस्मत
इस पूरे मामले में स्कूल में तैनात बीएलओ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। उनकी सूझबूझ और सक्रियता के कारण ही सीताराम के भाई बलबीर सिंह तक यह सूचना पहुंची। जैसे ही बलबीर सिंह को इस बात की खबर मिली कि उनके भाई उन्हें ढूंढ रहे हैं या कहीं आसपास मौजूद हैं, वे तुरंत बिना देरी किए स्कूल की ओर दौड़ पड़े।
आंखों में थे खुशी के आंसू
स्कूल में जब दोनों भाई 35 साल बाद एक दूसरे के आमने-सामने आए, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो गया। वर्षों पहले इलाज के सिलसिले में गांव से निकले सीताराम को यह उम्मीद भी नहीं थी कि वह कभी अपने भाई बलबीर सिंह से दोबारा मिल पाएंगे। दोनों भाइयों का एक-दूसरे को गले लगाना वहां मौजूद लोगों के लिए भी एक अविस्मरणीय पल बन गया। किसी ने भी नहीं सोचा था कि एक साधारण सरकारी काम के लिए आई यात्रा किसी का घर बसा देगी और बिछड़ों को मिलवा देगी।
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