पाकिस्तान की राजनीति में सिंध पर मचा घमासान: बिलावल भुट्टो और सेना के बीच क्या नया खेल शुरू होने वाला है?

सिंध प्रांत के संभावित बंटवारे को लेकर पाकिस्तान की राजनीति में तनाव बढ़ गया है, जहां बिलावल भुट्टो जरदारी ने साफ कर दिया है कि वे अपनी राजनीतिक जमीन के साथ किसी भी समझौते के खिलाफ हैं।

लंदन में हुई बैठक के बाद गरमाई सियासत

पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर सिंध प्रांत का मुद्दा केंद्र में आ गया है, जिससे वहां के सियासी गलियारों में नए ड्रामे के आसार दिख रहे हैं। हाल ही में लंदन में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी यानी PPP के चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक हुई। करीब पांच घंटे तक चली इस मैराथन चर्चा में बख्तावर भुट्टो जरदारी भी मौजूद थीं। बैठक के बाद पार्टी का रुख बेहद कड़ा सामने आया है। PPP ने स्पष्ट कर दिया है कि सिंध प्रांत का बंटवारा उन्हें किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होगा और ऐसी किसी भी कोशिश का पुरजोर विरोध किया जाएगा।

सिंध के बंटवारे के पीछे की पेचीदा राजनीति

पाकिस्तान में नए प्रांत बनाने या प्रशासनिक सुधार के नाम पर छोटे प्रशासनिक इलाके बनाने की मांग कोई नई बात नहीं है। अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि छोटे प्रांतों के गठन से लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और प्रशासन में सुधार होगा। हालांकि, सिंध के संदर्भ में मामला सिर्फ प्रशासनिक कामकाज तक सीमित नहीं है। यहां असली मुद्दा राजनीति, क्षेत्रीय पहचान और सत्ता के समीकरणों का है। सिंध के बड़े शहर कराची को प्रांत से अलग करने या दक्षिणी सिंध को एक नया प्रांत बनाने की खबरें समय-समय पर हवा में तैरती रही हैं। PPP इन प्रस्तावों को अपनी राजनीतिक जड़ें काटने की साजिश के रूप में देखती है।

सैन्य प्रतिष्ठान का नाम और आशंकाएं

पार्टी के भीतरूनी सूत्रों का मानना है कि यह केवल प्रशासनिक फेरबदल का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे राजनीतिक मकसद हो सकते हैं। PPP को यह डर सता रहा है कि अगर प्रशासनिक बदलाव के नाम पर सिंध की राजनीतिक शक्ति को कमजोर किया गया, तो इसमें पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान की भूमिका हो सकती है। यदि ऐसा होता है, तो देश की नागरिक राजनीति और सेना के प्रभाव को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो सकता है। इसी बीच लंदन में गृह मंत्री मोहसिन नकवी की आसिफ अली जरदारी से मुलाकात ने भी कई चर्चाओं को जन्म दिया है। नकवी को सेना का करीबी माना जाता है और इस मुलाकात में राजनीतिक तनाव को कम करने के प्रयासों पर चर्चा हुई है।

क्यों सिंध पर कब्जा करना चाहती है PPP?

PPP के लिए सिंध केवल एक प्रांत नहीं, बल्कि उसका सबसे मजबूत राजनीतिक किला है। पार्टी की पूरी ताकत इसी क्षेत्र में निहित है। ऐसे में सिंध का नक्शा बदलने का मतलब है पार्टी की विधानसभा में मौजूद पकड़ का कमजोर होना। यदि प्रांत के किसी भी हिस्से को अलग किया जाता है, तो PPP की सत्ता की नींव हिल सकती है। यही वजह है कि पार्टी इसे जमीन के बंटवारे के रूप में नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक पहचान और भविष्य की अस्तित्व की लड़ाई के रूप में देख रही है।

सिंध विधानसभा का कड़ा रुख

इस पूरे मामले में सिंध विधानसभा ने भी अपना रुख साफ कर दिया है। सदन में इन प्रस्तावों को पूरी तरह खारिज किया गया है। मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने विधानसभा में यह स्पष्ट संदेश दिया है कि उनकी सरकार प्रांत की एकता और जमीन के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी। उनका कहना है कि यह जनता के सामने आना चाहिए कि आखिर सिंध को बांटने का खेल कौन रच रहा है और इसके पीछे की ताकतें कौन सी हैं। मुराद अली शाह ने यह भी कहा कि अगर भविष्य में सीमाओं को लेकर कोई चर्चा करनी है, तो वह विधानसभा के पटल पर और संवैधानिक प्रक्रिया के दायरे में ही होनी चाहिए।

क्या नया ड्रामा शुरू होने वाला है?

वर्तमान स्थिति को देखते हुए पाकिस्तान की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सिंध के बंटवारे की सुगबुगाहट महज प्रशासनिक सुधार की एक कोशिश है, या फिर इसके पीछे कोई बहुत बड़ा सियासी खेल छिपा है? PPP ने फिलहाल मोर्चा संभाल लिया है क्योंकि उनके लिए यह सिर्फ जमीन का सवाल नहीं, बल्कि सत्ता की चाबी का सवाल है। दूसरी तरफ सेना भी अपनी रणनीतिक ताकत को बरकरार रखने के लिए प्रयासरत रहती है। इन दोनों धुरियों के बीच, सिंध का यह मुद्दा पाकिस्तान की राजनीति में एक नए और गंभीर टकराव की दिशा में बढ़ रहा है, जिसे अब लोग एक बड़े राजनीतिक ड्रामे के रूप में देख रहे हैं।

https://hindi.news18.com/world/pakistan-meeting-between-ppp-chairman-bilawal-bhutto-zardari-and-president-asif-ali-zardari-regarding-division-of-sindh-10809860.html