टाटा केमिकल्स का कामकाज रुकने से मगाडी में मचा हाहाकार
भारतीय समूह टाटा की सहायक कंपनी 'टाटा केमिकल्स मगाडी' का केन्या में संचालन बंद होने से काजियाडो शहर के निवासियों पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। केन्या सरकार के दबाव में कंपनी के कामकाज पर लगी अनिश्चितकालीन रोक ने इस पूरे इलाके के सामाजिक और आर्थिक ढांचे को हिलाकर रख दिया है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि स्थानीय समुदाय की आजीविका, पानी की आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी महत्वपूर्ण बुनियादी सुविधाएं किस कदर एक ही कॉर्पोरेट इकाई पर निर्भर थीं।
स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा असर और मरीजों की घटती संख्या
कंपनी के संचालन पर रोक का सबसे सीधा और गंभीर असर स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा है। इस क्षेत्र के एक डॉक्टर ने बताया कि अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि अस्पताल गैर-लाभकारी आधार पर संचालित होता है, लेकिन पहले स्थानीय लोग मामूली शुल्क देकर इलाज करा पाते थे। अब, कंपनी के कामकाज बंद होने से आमदनी का जरिया खत्म हो गया है और लोगों के पास इलाज के लिए पैसे तक नहीं बचे हैं। डॉक्टर के अनुसार, इलाके के लगभग 95% लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से टाटा केमिकल्स से मिलने वाली आय पर निर्भर थे। इनमें वे स्थानीय ठेकेदार भी शामिल थे, जो कंपनी के जरिए अपना काम चलाते थे। आर्थिक तंगी का आलम यह है कि लोग अब केवल तभी अस्पताल का रुख करते हैं जब उनकी स्थिति बहुत नाजुक हो जाती है, अन्यथा वे बुनियादी इलाज से भी समझौता कर रहे हैं।
पानी की बूंद-बूंद के लिए संघर्ष
काजियाडो शहर के लोग इस समय सबसे विकट समस्या पानी की कमी को मान रहे हैं। टाटा केमिकल्स की ओर से जो पानी की व्यवस्था और वितरण प्रणाली संभाली जाती थी, वह अब पूरी तरह ठप पड़ चुकी है। स्थानीय निवासी बताते हैं कि जो सिस्टम पहले पाइपलाइनों के जरिए पानी पहुंचाता था, अब वह काम नहीं कर रहा है। इसके चलते इलाके में पानी का भयंकर संकट पैदा हो गया है, जिसका सबसे ज्यादा खामियाजा महिलाओं और बच्चों को उठाना पड़ रहा है। आपातकालीन स्थिति में पानी के ट्रकों का सहारा लिया जा रहा है, लेकिन उनकी संख्या और क्षमता लोगों की जरूरत के हिसाब से बहुत कम है।
16 किलोमीटर दूर से पानी लाने की मजबूरी
स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि लोगों को पानी का इंतजाम करने के लिए रोजाना 16 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ रहा है। एक निवासी ने बताया कि वह अपनी मोटरसाइकिल से मगाडी जाकर पानी लाने पर मजबूर हैं और इस प्रक्रिया में ईंधन के रूप में 500 केन्याई शिलिंग खर्च करने पड़ते हैं, जो भारतीय मुद्रा में करीब 360 रुपये के बराबर है। जिनके पास निजी वाहन नहीं हैं, वे पूरी तरह से आपातकालीन ट्रकों पर आश्रित हैं। रात के 11 बजे तक महिलाएं एक या दो बाल्टी पानी के लिए कतारों में खड़ी रहती हैं, फिर भी पानी की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं होती। कंपनी द्वारा संचालित पुरानी टंकियां और बुनियादी ढांचा बंद होने से अब स्कूली छात्रों और घरों तक पानी पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
कॉर्पोरेट निर्भरता का कड़वा सच
यह घटनाक्रम इस बात का प्रमाण है कि मगाडी में सार्वजनिक सुविधाओं का कितना बड़ा हिस्सा कॉर्पोरेट जगत के हाथों में था। केन्या सरकार की इस कार्रवाई पर सोशल मीडिया के माध्यम से भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। स्टीफन मुटोरो जैसे विचारकों ने राष्ट्रपति विलियम रूटो से अपील की है कि टाटा केमिकल्स को लेकर अपनाई जा रही नीति को बदला जाए। उन्होंने तर्क दिया है कि टाटा केमिकल्स ने वहां अस्पताल बनवाए, बिजली के बिल भरे और पानी की ड्रिलिंग की, जो कि एक निवेश का हिस्सा है। ऐसे में कंपनी को अपराधी की तरह देखना स्थानीय लोगों के हितों के खिलाफ है।
सरकार से तत्काल राहत की मांग
स्थानीय लोगों ने अब केन्या सरकार से गुहार लगाई है कि जब तक कंपनी का कामकाज फिर से सुचारू रूप से शुरू नहीं हो जाता, तब तक सरकार को वैकल्पिक तौर पर पानी की आपूर्ति के लिए अतिरिक्त टैंकरों की व्यवस्था करनी चाहिए। फिलहाल, पूरा शहर पानी के लिए महज एक या दो ट्रकों पर टिका हुआ है, जो स्कूलों और घरों की भारी जरूरत को पूरा करने में पूरी तरह असमर्थ हैं। इस संकट ने न केवल औद्योगिक गतिविधियों को रोका है, बल्कि आम नागरिकों की दैनिक दिनचर्या और आजीविका को भी पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है।
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