शिक्षक दिवस विशेष: चर्चा में रूपम मैडम का स्टाइल
बिहार की शिक्षा व्यवस्था को लेकर अक्सर नकारात्मक खबरें सामने आती रहती हैं, लेकिन बेगूसराय का एक सरकारी स्कूल उम्मीद की एक नई किरण बनकर उभरा है। शिक्षक दिवस के इस विशेष मौके पर हम आपको एक ऐसी शिक्षिका से मिलवाने जा रहे हैं, जिनकी लोकप्रियता किसी प्रसिद्ध शिक्षक से कम नहीं है। बेगूसराय जिले के मध्य विद्यालय चेरिया बरियारपुर में तैनात शिक्षिका रूपम कुमारी ने अपने पढ़ाने के तरीके से न केवल छात्रों का दिल जीता है, बल्कि सरकारी स्कूल के प्रति लोगों की धारणा को भी बदला है। विद्यालय के प्राचार्य संजय कुमार के मार्गदर्शन और रूपम कुमारी की मेहनत का परिणाम है कि आज यह स्कूल एक मिसाल बन गया है।
छात्रों की पहली पसंद बनीं शिक्षिका
रूपम कुमारी वर्तमान में मध्य विद्यालय चेरिया बरियारपुर में कक्षा 6 की क्लास टीचर हैं। वे मुख्य रूप से गणित और विज्ञान जैसे विषयों को पढ़ाती हैं, जिन्हें अक्सर बच्चे कठिन मानते हैं। हालांकि, उनकी कक्षा में स्थिति बिल्कुल अलग रहती है। जैसे ही वे क्लास में पहुंचती हैं, बच्चों का उत्साह देखते ही बनता है। बच्चे सिर्फ शांत होकर लेक्चर सुनने के बजाय पूरी सक्रियता के साथ सवालों के जवाब देने के लिए उत्सुक रहते हैं। आशी कुमारी नाम की एक छात्रा बताती हैं कि उनकी मैडम बहुत बेहतरीन ढंग से पढ़ाती हैं और उनकी क्लास में पढ़ने में काफी आनंद आता है। इसी तरह छात्र अनिकेत कुमार का कहना है कि गणित और विज्ञान जैसे विषय भी रूपम मैडम के पढ़ाने के बाद उन्हें आसान और रोचक लगने लगे हैं।
कैमरे पर बच्चों का आत्मविश्वास
इस स्कूल में पढ़ाई की गुणवत्ता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब बच्चों से कक्षा में पढ़ाए गए गणित के विषयों और उनकी परिभाषाओं के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बिना किसी झिझक के आत्मविश्वास के साथ कैमरा पर ही जवाब दे दिया। यह स्पष्ट करता है कि रटने की बजाय छात्र विषयों की गहराई को समझ रहे हैं। जिस गणित को बड़े-बड़े छात्र मुश्किल समझते हैं, उसे इन बच्चों ने बहुत सरल बना लिया है।
शिक्षण कार्य में रूपम कुमारी का सफर
रूपम कुमारी ने साल 2022 में सरकारी शिक्षिका के तौर पर कार्यभार संभाला था। उनकी पहली नियुक्ति खोदावंदपुर में हुई थी, जिसके बाद उनका स्थानांतरण मध्य विद्यालय चेरिया बरियारपुर में हुआ। यहाँ आने के बाद प्राचार्य संजय कुमार का उन्हें पूरा सहयोग और प्रोत्साहन मिला, जिसके कारण आज वे जिले की अन्य शिक्षिकाओं के बीच चर्चा का केंद्र बन गई हैं। रूपम कहती हैं कि उन्हें बच्चों को पढ़ाने में एक अलग ही खुशी मिलती है, और जब बच्चे खुद आकर कहते हैं कि उन्हें उनकी क्लास बहुत पसंद है, तो उनका मनोबल और बढ़ जाता है।
खेल-खेल में शिक्षा का महत्व
शिक्षिका का मानना है कि शिक्षा कभी भी बोझ नहीं बननी चाहिए। इसी सोच के साथ उन्होंने गणित और विज्ञान के जटिल सिद्धांतों को खेल के माध्यम से समझाना शुरू किया। रूपम कुमारी के अनुसार, यहाँ के बच्चे बहुत प्रतिभाशाली हैं, बस उन्हें सही दिशा और एक अनुकूल माहौल देने की आवश्यकता है। वे कहती हैं कि यदि सरकारी स्कूलों के शिक्षक पूरी प्रतिबद्धता के साथ बच्चों को पढ़ाएं, तो यहाँ के विद्यार्थी भी किसी भी निजी स्कूल के बच्चों से पीछे नहीं रहेंगे। उन्हें खुशी होती है जब वे अपने छात्रों को आगे बढ़ते और सीखते हुए देखती हैं।
प्राचार्य संजय कुमार का योगदान
रूपम कुमारी की इस सफलता के पीछे प्राचार्य संजय कुमार का बड़ा हाथ है। उन्होंने विद्यालय में एक ऐसा सकारात्मक वातावरण तैयार किया है जहाँ शिक्षकों को नवाचार करने की पूरी आज़ादी है। प्राचार्य की दूरदर्शिता का ही नतीजा है कि विद्यालय में पढ़ाई का स्तर लगातार सुधर रहा है और शिक्षक पूरी निष्ठा के साथ अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहे हैं।
सरकारी स्कूलों के प्रति बदली सोच
बिहार के सरकारी विद्यालयों के बारे में अक्सर तमाम तरह के सवाल खड़े किए जाते हैं, लेकिन चेरिया बरियारपुर के इस स्कूल की सफलता यह साबित करती है कि अगर इरादे नेक हों तो बदलाव संभव है। यह कहानी हमें सिखाती है कि यदि शिक्षक अपनी नौकरी को सिर्फ एक ड्यूटी न मानकर उसे अपना जुनून और जिम्मेदारी समझें, तो बच्चों के भविष्य को नई उड़ान दी जा सकती है। रूपम कुमारी जैसे शिक्षक आज के समय में सरकारी शिक्षा प्रणाली के लिए उम्मीद की एक बड़ी मशाल हैं, जो अपनी कड़ी मेहनत से छात्रों के सपनों को साकार कर रहे हैं।
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