पौधों के लिए जीवनदायिनी है पानी, लेकिन अति हो सकती है नुकसानदेह
बागवानी करना कई लोगों का शौक होता है और वे अपने घर की छतों या बालकनी को हरियाली से भर देना चाहते हैं। हालांकि, कई बार पौधों को बचाने की जद्दोजहद में वे खुद ही बड़ी गलती कर बैठते हैं। पौधों के लिए पानी बेहद जरूरी है, लेकिन अगर गमले की मिट्टी में यह पानी लंबे समय तक जमा रहे, तो यह पौधों के लिए घातक साबित हो सकता है। जड़ में अत्यधिक नमी बने रहने से वह सड़ने लगती है और अंततः महंगा पौधा भी सूख जाता है। इससे न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि बागवानी के प्रति उत्साह भी कम हो जाता है।
बीस साल का अनुभव: रेत का जादू
बिहार के जहानाबाद जिले के मुठेर गांव के रहने वाले राकेश कुमार पिछले 20 साल से बागवानी का काम कर रहे हैं। उन्होंने अपनी छत पर 150 से भी अधिक प्रकार के पौधे लगा रखे हैं, जिनमें एडेनियम, गुड़हल और कैक्टस जैसे लोकप्रिय पौधे शामिल हैं। राकेश कुमार का अनुभव बताता है कि जो लोग अभी बागवानी की शुरुआत कर रहे हैं, उन्हें अपने पौधों को मिट्टी की जगह रेत में लगाने का प्रयास करना चाहिए। यह एक छोटा सा बदलाव है, लेकिन बागवानी में यह बड़े नतीजे दे सकता है।
प्लास्टर में बची रेत को न फेंकें
अक्सर घरों के निर्माण या दीवारों के प्लास्टर के समय रेत का इस्तेमाल किया जाता है। लोग अक्सर काम खत्म होने के बाद बची हुई रेत को बेकार समझकर फेंक देते हैं या उसे इधर-उधर पड़ा रहने देते हैं। राकेश कुमार सलाह देते हैं कि प्लास्टर के लिए उपयोग की जाने वाली रेत को छलनी से छानकर बागवानी में इस्तेमाल करना बहुत फायदेमंद होता है। यह रेत पौधों की जड़ों को गलने से बचाने में एक ढाल की तरह काम करती है और अतिरिक्त पानी को गमले में जमा नहीं होने देती।
मिट्टी और रेत का सही अनुपात
राकेश कुमार के अनुसार, गमले तैयार करते समय सामग्री का अनुपात बहुत मायने रखता है। उनके सुझाव के मुताबिक, गमले में 90 प्रतिशत रेत और 10 प्रतिशत वर्मी कंपोस्ट और मिट्टी का मिश्रण होना चाहिए। इस विशेष अनुपात का उपयोग करने से पौधे का विकास बहुत अच्छी तरह से होता है।
रेत क्यों है बेहतर विकल्प
आम तौर पर मिट्टी का उपयोग करने पर खाद मिलाने के बाद वह सख्त हो जाती है। मिट्टी के सख्त हो जाने से पौधे की जड़ों का फैलाव रुक जाता है और तना भी कमजोर होने लगता है। मिट्टी के कड़ेपन के कारण ऑक्सीजन जड़ों तक ठीक से नहीं पहुँच पाती। इसके विपरीत, रेत कभी भी मिट्टी की तरह जकड़ती नहीं है। रेत के कण जड़ों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह देते हैं, जिससे जड़ों का विकास बेहतर होता है। रेत के इस्तेमाल से पानी तेजी से निकल जाता है, जिसके कारण जड़ें सुरक्षित रहती हैं और पौधा सड़ने से बच जाता है। यदि आप भी अपने गार्डन को हरा-भरा और स्वस्थ देखना चाहते हैं, तो रेत का यह आसान नुस्खा जरूर अपनाकर देखें।
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