अल नीनो की चुनौती और वर्तमान स्थिति
भारत समेत पूरी दुनिया के मौसम विशेषज्ञों ने अल नीनो के ऐतिहासिक रूप से सक्रिय होने की आशंका जताई है। आमतौर पर अल नीनो का प्राथमिक प्रभाव कम बारिश और तापमान का सामान्य से अधिक होना होता है। भारत भी इसके प्रभावों से अछूता नहीं रहेगा, हालांकि इस बार मानसून के दौरान लगातार सक्रिय रहने वाली स्थानीय मौसम प्रणालियों की वजह से इसका असर अभी तक न के बराबर देखा गया है। प्रशांत महासागर में पनपने वाले इस समुद्री दैत्य को मानसून का हत्यारा भी कहा जाता है, लेकिन फिलहाल देश के विभिन्न हिस्सों में हो रही बारिश ने इसकी तीव्रता को बेअसर कर रखा है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि सितंबर के अंतिम सप्ताह या अक्टूबर से देश में अल नीनो का असर स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है, जिसके परिणामस्वरूप आने वाली सर्दियों में तापमान सामान्य से अधिक रहने की प्रबल संभावना है।
देश भर में सक्रिय मानसून का असर
बंगाल की खाड़ी से लेकर अरब सागर और हिमालयी क्षेत्रों तक बनी सक्रिय मौसमी प्रणालियों के चलते देश के अलग-अलग हिस्सों में लगातार बारिश का दौर चल रहा है। एक प्रभावी लो प्रेशर सिस्टम के कारण जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड की चोटियों से लेकर दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल तक बारिश हो रही है। उत्तर प्रदेश और बिहार की नदियां उफान पर हैं, जिससे कई जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह बारिश का दौर अभी कुछ दिनों तक और जारी रहने वाला है। साथ ही, कई इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान भी है।
उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में भारी बारिश की चेतावनी
मध्य प्रदेश के मध्य हिस्सों और उससे सटे दक्षिणी उत्तर प्रदेश के ऊपर बने वेल मार्क्ड लो प्रेशर एरिया के कारण देश के बड़े हिस्से प्रभावित हैं। मौसम विभाग के अनुसार, 5 सितंबर को पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश के अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है। पूर्वी मध्य प्रदेश में भी ऐसी ही स्थिति रहने की संभावना है। उत्तर-पश्चिम भारत में जम्मू-कश्मीर के कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने का खतरा है। हिमाचल प्रदेश में 5 सितंबर और उत्तराखंड में 10 सितंबर 2026 तक बारिश का सिलसिला बना रह सकता है, जिसमें उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।
दिल्ली और उत्तर भारत की स्थिति
दिल्ली-NCR क्षेत्र में शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 की देर शाम तेज बारिश दर्ज की गई। राजस्थान, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में 5 सितंबर को गरज-चमक के साथ बारिश का अनुमान है। उत्तर प्रदेश की बात करें तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 6 सितंबर तक और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 6 से 8 सितंबर के बीच बारिश सक्रिय रहेगी। हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 6 सितंबर तक अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है, जिसमें पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में बहुत भारी बारिश का भी अलर्ट है।
मध्य भारत और छत्तीसगढ़ में मानसून का जोर
मध्य प्रदेश में इस नए मौसम सिस्टम का व्यापक प्रभाव देखने को मिलेगा। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 6 सितंबर तक और पूर्वी मध्य प्रदेश में 8 सितंबर तक बारिश का दौर जारी रहेगा। विशेष रूप से 5 सितंबर को पश्चिमी और पूर्वी मध्य प्रदेश दोनों ही इलाकों में बहुत भारी बारिश की आशंका है। इसके अलावा 5 से 8 सितंबर के दौरान पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी बारिश की गतिविधियां बनी रहेंगी। छत्तीसगढ़ में 10 सितंबर तक कई स्थानों पर बारिश जारी रहेगी, जबकि विदर्भ क्षेत्र में 10 सितंबर तक छिटपुट बारिश और गरज-चमक का सिलसिला देखा जा सकता है।
पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर राज्यों का हाल
पूर्वी भारत में पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 10 सितंबर तक बारिश जारी रहने की संभावना है, जिसमें 8 सितंबर के आसपास भारी बारिश हो सकती है। पश्चिम बंगाल में 8 और 9 सितंबर को विशेष रूप से सतर्क रहने की आवश्यकता है। झारखंड में 9 सितंबर को भारी बारिश की चेतावनी है। बिहार में 5 से 8 सितंबर और ओडिशा में 9 से 10 सितंबर के बीच भारी बारिश का अनुमान लगाया गया है। पूर्वोत्तर भारत में भी मौसम खराब रहेगा। अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में 8 सितंबर तक, जबकि नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 10 सितंबर तक कई स्थानों पर बारिश हो सकती है। इन सभी राज्यों में 10 सितंबर तक अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश होने के आसार हैं।
पश्चिमी और दक्षिण भारत का मौसम
पश्चिमी भारत के कोंकण और गोवा में 10 सितंबर तक कई स्थानों पर बारिश का पूर्वानुमान है। गुजरात क्षेत्र, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और सौराष्ट्र-कच्छ में छिटपुट बारिश के साथ ही मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में गरज-चमक की गतिविधियां देखने को मिलेंगी। दक्षिण भारत में अगले 6 से 7 दिनों तक बारिश की सक्रियता थोड़ी कम रह सकती है, हालांकि तटीय कर्नाटक में 10 सितंबर तक कई स्थानों पर बारिश और गरज-चमक जारी रहेगी। तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, केरल, माहे, उत्तर आंतरिक कर्नाटक, रायलसीमा, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल और तेलंगाना में 4 से 10 सितंबर के बीच छिटपुट बारिश हो सकती है।
तेज हवाओं और सुरक्षा संबंधी सावधानियां
दक्षिणी राज्यों के कुछ हिस्सों में बारिश के साथ तेज हवाएं जनजीवन को प्रभावित कर सकती हैं। तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराईकल में 5 सितंबर को 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जिनकी गति झोंकों में 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। उत्तर और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 6 सितंबर तक 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। मौसम विभाग ने आम जनता को गरज-चमक और आकाशीय बिजली वाले क्षेत्रों में अत्यंत सावधानी बरतने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।
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