जाने-माने फिल्ममेकर विक्रम भट्ट ने उदयपुर जेल में गुजारे अपने 70 दिनों की कहानी खुलकर बयां की है। एक बायोपिक से जुड़े वित्तीय विवाद के चलते उन्हें गिरफ्तार किया गया था, और इस दौरान जेल की चारदीवारी के भीतर उन्होंने जो अनुभव किया, उसने उनकी जिंदगी को कई मायनों में बदल दिया।
बीमारी से जूझते हुए मौत के करीब पहुंचे
जेल में रहते हुए विक्रम भट्ट को सेहत से जुड़ी कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उन्हें 'एक्सियल स्पॉन्डिलोआर्थराइटिस' और पीलिया जैसी तकलीफदेह बीमारियों ने घेर लिया। हालत इतनी नाजुक हो गई थी कि वे बेहद मुश्किल से इन समस्याओं से उबर पाए। उनके मुताबिक, वहां वे मरते-मरते बचे।
कैदियों ने दिया 'भीष्म पितामह' का दर्जा
इस कठिन दौर में विक्रम भट्ट को अकेलापन महसूस नहीं हुआ। जेल के साथी कैदियों और स्टाफ ने उन्हें भरपूर सम्मान और सुरक्षा दी। वहां मौजूद लोग उन्हें प्यार से 'भीष्म पितामह' कहकर बुलाते थे, जो उनके प्रति लोगों के लगाव और आदर को दर्शाता है।
सिनेमा के असली दर्शकों से जुड़ाव
विक्रम भट्ट का कहना है कि इस पूरे सफर ने उन्हें सिनेमा के सच्चे और असली दर्शकों से दोबारा जोड़ दिया। जेल के भीतर उन्होंने जो रिश्ते और अपनापन देखा, उसने उन्हें 'सच्ची दोस्ती' के मायने सिखाए।
आरोपों को बताया बेबुनियाद
अपने ऊपर लगे आरोपों को लेकर विक्रम भट्ट ने दो टूक कहा कि ये पूरी तरह बकवास हैं। उन्होंने इन्हें सिरे से खारिज करते हुए खुद को निर्दोष बताया है।
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