लोन बंद करते समय न करें ये भूल, क्लोजर और सेटलमेंट का अंतर न समझा तो होगा भारी नुकसान

पुराना लोन खत्म करने से पहले 'लोन क्लोजर' और 'लोन सेटलमेंट' का फर्क जानना जरूरी है। क्लोजर जहां आपके सिबिल स्कोर को मजबूत करता है, वहीं सेटलमेंट कई सालों तक आपकी क्रेडिट रिपोर्ट पर दाग छोड़ सकता है।

अगर आपने होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन ले रखा है और अब उसे तय समय से पहले एकमुश्त रकम चुकाकर बंद करने की योजना बना रहे हैं, तो एक अहम बात समझ लेना बेहद जरूरी है। बहुत से लोग यह मान बैठते हैं कि बैंक को पूरी या कुछ रकम देकर लोन खत्म कर देना हमेशा फायदे का सौदा होता है। लेकिन यहीं पर 'लोन क्लोजर' और 'लोन सेटलमेंट' के बीच का अंतर समझना बहुत मायने रखता है। यही अंतर आपके सिबिल स्कोर और आगे चलकर मिलने वाले लोन पर सीधा असर डालता है।

लोन क्लोजर क्या होता है

जब आप अपने लोन की पूरी बकाया राशि का एक-एक रुपया बैंक को चुकाकर उसे समय से पहले खत्म करते हैं, तो इसे लोन क्लोजर कहा जाता है। इसके बाद बैंक आपको एक 'नो ड्यूज सर्टिफिकेट' (NOC) देता है। यह एक आदर्श स्थिति मानी जाती है, जिससे आपका सिबिल स्कोर मजबूत होता है और बैंक की नजर में आप एक जिम्मेदार कर्जदार बनते हैं।

लोन सेटलमेंट कब होता है

लोन सेटलमेंट उस समय होता है, जब कोई व्यक्ति आर्थिक तंगी या किसी अन्य वजह से लोन की ईएमआई चुका पाने में असमर्थ हो जाता है और बैंक के बार-बार याद दिलाने के बावजूद भुगतान नहीं कर पाता। ऐसी हालत में बैंक कानूनी झंझट से बचने के लिए ग्राहक को 'वन-टाइम सेटलमेंट' (OTS) का प्रस्ताव देता है। इसमें बैंक कुछ पेनल्टी या ब्याज माफ करके एक तय रकम पर समझौता कर लेता है। मसलन, अगर कुल बकाया 5 लाख रुपये है, तो बैंक 3 लाख रुपये लेकर ही खाता बंद करने को राजी हो जाता है।

सिबिल स्कोर पर पड़ता है गहरा असर

लोन सेटलमेंट से भले ही आपको फौरी राहत मिल जाए और रिकवरी एजेंट के फोन आने बंद हो जाएं, लेकिन आपके क्रेडिट इतिहास पर यह एक बड़ा 'धब्बा' बनकर रह जाता है। जब बैंक इस खाते की जानकारी सिबिल या किसी अन्य क्रेडिट ब्यूरो को भेजता है, तो स्टेटस में 'क्लोज्ड' की जगह 'सेटल्ड' दर्ज कर दिया जाता है। इसका साफ मतलब है कि आप अपना पूरा कर्ज नहीं चुका पाए और बैंक को घाटा सहकर समझौता करना पड़ा।

यह स्टेटस आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में अगले 7 सालों तक बना रहता है, जिससे आपका सिबिल स्कोर तेजी से गिर जाता है। आगे जब भी आप किसी नए लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करेंगे, तो बैंक आपका 'सेटल्ड' स्टेटस देखते ही आवेदन को तुरंत खारिज कर सकते हैं।

भविष्य में लोन पाने के लिए जरूरी सुझाव

  • सेटलमेंट से हर हाल में बचें: कर्ज कितना भी भारी क्यों न महसूस हो, सेटलमेंट का रास्ता कभी न चुनें। यह आपकी वित्तीय साख को पूरी तरह खत्म कर देता है।
  • लोन रीस्ट्रक्चरिंग चुनें: अगर ईएमआई चुकाना सचमुच मुश्किल हो रहा है, तो बैंक से बात करके लोन की अवधि बढ़वा लें ताकि मासिक किस्त घट जाए, या ब्याज दर रीस्ट्रक्चर करने का अनुरोध करें।
  • परिजनों या दोस्तों से मदद लें: बैंक के साथ डिफॉल्ट या सेटलमेंट करने से बेहतर है कि किसी करीबी या परिवार के सदस्य से बिना ब्याज या कम ब्याज पर कुछ समय के लिए पैसे लेकर बैंक का पूरा लोन क्लोज कर दें।
  • NOC लेना न भूलें: पूरा भुगतान करके लोन क्लोजर करते समय बैंक से 'नो ड्यूज सर्टिफिकेट' यानी एनओसी जरूर लें।
  • क्रेडिट रिपोर्ट जांचते रहें: लोन बंद करने के 30 से 45 दिन बाद अपनी सिबिल रिपोर्ट जरूर देखें कि वहां खाते का स्टेटस 'क्लोज्ड' दिख रहा है या नहीं। कोई गड़बड़ी मिले तो तुरंत बैंक और क्रेडिट ब्यूरो को सूचित करें।

https://hindi.news18.com/news/business/personal-finance-loan-settlement-vs-closure-impact-cibil-credit-score-10546375.html