सोने के गहने या गोल्ड कॉइन: निवेश के लिहाज से कौन-सा विकल्प आपके लिए ज्यादा फायदेमंद?

भारत में सोना सिर्फ धातु नहीं बल्कि परंपरा और सुरक्षा का प्रतीक है, लेकिन निवेश की दृष्टि से गहनों और शुद्ध सोने के सिक्कों-बार में बड़ा फर्क है। जानिए मेकिंग चार्ज, शुद्धता और रिटर्न के आधार पर कौन-सा विकल्प बेहतर साबित होता है।

भारतीय समाज में सोने का रिश्ता केवल चमक और कीमत तक सीमित नहीं है। यह परंपरा, भावना और आर्थिक सुरक्षा तीनों का प्रतीक माना जाता है। शादी-विवाह हो या त्योहार, सोने की खरीदारी को अक्सर एक भरोसेमंद निवेश के रूप में देखा जाता है। लेकिन असल सवाल यह है कि क्या सोने के गहने वाकई आपकी पूंजी बढ़ाते हैं, या फिर शुद्ध सोने के सिक्के और बार ज्यादा मुनाफे का सौदा साबित होते हैं? यही उलझन आज बहुत से निवेशकों के सामने है।

पीढ़ियों से भारतीय परिवारों में सोना संपत्ति का अहम हिस्सा रहा है। ज्यादातर लोग गहनों को सिर्फ पहनने की वस्तु नहीं, बल्कि भविष्य की वित्तीय ढाल के तौर पर भी देखते हैं। हालांकि निवेश के नजरिए से गहने और शुद्ध सोने के सिक्के या बार बराबर नहीं माने जा सकते। दोनों का मकसद और दोनों से मिलने वाला वित्तीय लाभ अलग-अलग होता है, इसलिए पैसा लगाने से पहले इनके बीच का अंतर समझ लेना जरूरी है।

मेकिंग चार्ज से बढ़ जाती है गहनों की कीमत

जब आप सोने का हार, चेन या कंगन खरीदते हैं, तो आप केवल सोने का मूल्य नहीं चुकाते। इसके साथ डिजाइन, कारीगरी और ब्रांड की लागत भी जुड़ जाती है, जिसे मेकिंग चार्ज कहते हैं। कई बार यह शुल्क कुल कीमत के 8 प्रतिशत से लेकर 25 प्रतिशत या उससे भी ज्यादा तक पहुंच जाता है। यही अतिरिक्त खर्च निवेश के लिहाज से गहनों को कम आकर्षक बना देता है। सबसे अहम बात यह है कि गहने बेचते समय यह मेकिंग चार्ज वापस नहीं मिलता।

शुद्धता का सीधा असर रिटर्न पर

अधिकतर गहने 22 कैरेट या 18 कैरेट के होते हैं, क्योंकि 24 कैरेट सोना बेहद मुलायम होता है और उससे बने आभूषण जल्दी खराब हो सकते हैं। गहनों को मजबूती देने के लिए उनमें तांबा, चांदी या दूसरी धातुएं मिलाई जाती हैं। इसका सीधा मतलब है कि खरीदार पूरी तरह शुद्ध सोने में निवेश नहीं कर पाता। बेचने की बारी आती है तो शुद्धता की जांच एक और प्रक्रिया बन जाती है, जिससे बिक्री मूल्य पर असर पड़ सकता है।

गोल्ड कॉइन और बार को क्यों माना जाता है बेहतर

वित्तीय निवेश की दृष्टि से गोल्ड कॉइन और गोल्ड बार ज्यादा आकर्षक माने जाते हैं। ये आम तौर पर 24 कैरेट यानी 99.9 प्रतिशत शुद्ध सोने से बने होते हैं। इन पर मेकिंग चार्ज भी बहुत कम लगता है, जो आमतौर पर 1 से 4 प्रतिशत के बीच रहता है। यानी निवेशक का अधिकांश पैसा सीधे सोने की असली कीमत में लगता है। यही कारण है कि लंबी अवधि के निवेश के लिए कई जानकार शुद्ध सोने को प्राथमिकता देने की सलाह देते हैं।

बेचते समय मिलता है ज्यादा फायदा

गोल्ड कॉइन और बार को बेचना तुलनात्मक रूप से आसान होता है। इनकी शुद्धता पहले से तय रहती है और बाजार में इनका दाम मौजूदा सोने की दर के काफी करीब मिल जाता है। दूसरी ओर गहनों का मूल्यांकन वजन, शुद्धता और डिजाइन जैसे कई पहलुओं पर होता है, जिसकी वजह से कई बार निवेशक को उम्मीद से कम कीमत मिलती है। यही वजह है कि जरूरत पड़ने पर तुरंत नकदी जुटाने यानी तरलता के मामले में भी शुद्ध सोना आगे माना जाता है।

शौक के लिए गहने, निवेश के लिए शुद्ध सोना

विशेषज्ञ मानते हैं कि सोने के गहनों का अपना सांस्कृतिक, भावनात्मक और पारिवारिक महत्व होता है। ये पीढ़ियों तक यादों और परंपराओं को सहेजने का जरिया बनते हैं, इसलिए गहनों की खरीद को सिर्फ निवेश के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। अगर मकसद पूंजी को सुरक्षित रखना और बेहतर वित्तीय रिटर्न पाना है, तो गोल्ड कॉइन और बार ज्यादा उपयुक्त विकल्प हो सकते हैं। वहीं अगर सोना पहनने, उपहार देने या पारिवारिक विरासत के लिए खरीदा जा रहा है, तो गहनों का महत्व हमेशा बना रहेगा। आखिरकार सही फैसला इस पर निर्भर करता है कि आपका लक्ष्य निवेश है या भावनात्मक और सामाजिक जरूरतों को पूरा करना।

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