दक्षिण चीन सागर के रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील प्रातस द्वीप समूह के नजदीक चीनी कोस्ट गार्ड और महासागरीय सर्वे जहाजों ने पहली बार मिलकर एक जासूसी अभियान चलाया है। इस हरकत ने भारत के सबसे बड़े 'सेमीकंडक्टर पार्टनर' ताइवान के साथ चीन की तनातनी को और भड़का दिया है। मुख्य भूमि से करीब 400 किलोमीटर दूर और बेहद हल्की सैन्य सुरक्षा वाले इन द्वीपों के पास पहुंचकर चीनी जहाजों ने लाउडस्पीकर के जरिए ताइवान को जबरन अपने में मिलाने की धमकी दी।
साउथ चाइना सी में चीन की दादागीरी
दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में गिने जाने वाले दक्षिण चीन सागर में चीन की दबंगई का नजारा अक्सर देखने को मिलता है। दूसरों को डराने-धमकाने और उनकी टोह लेने के लिए कुख्यात चीन ने एक बार फिर वैसी ही हरकत दोहराई है। इस बार उसने भारत के 'सेमीकंडक्टर पार्टनर' ताइवान को खुलेआम भड़काने की कोशिश की। शनिवार को ताइवान ने इस पूरी घटना का खुलासा किया। उसके मुताबिक प्रातस आइलैंड के पास चीन के जासूसी जहाज एकदम सीमा तक पहुंचकर दूर से ताक-झांक करते नजर आए। ताइवान ने चीन को आड़े हाथों लेते हुए उसे 'बीमार गुंडा' तक कह डाला।
चीन की वह हरकत जिसने ताइवान को नाराज किया
दरअसल ताइवान के नियंत्रण वाले प्रातस द्वीप समूह में एक नेशनल पार्क भी मौजूद है। दक्षिण चीन सागर के उत्तरी छोर पर बसे इन द्वीपों की सुरक्षा के नाम पर सिर्फ ताइवान की कोस्ट गार्ड ही तैनात रहती है, यानी यहां सैन्य पहरा बेहद कमजोर है। यही कारण है कि बीजिंग ताइवान पर अपनी संप्रभुता का दावा थोपने और दबाव बनाने के लिए इन कमजोर द्वीपों को निशाना बना रहा है। चीन यहां अपनी अर्ध-सैन्य (क्वासी मिलिट्री) गतिविधियों को लगातार तेज कर रहा है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ये द्वीप मुख्य ताइवान द्वीप से महज 400 किलोमीटर की दूरी पर हैं, जिसके चलते चीन के लिए इन पर घात लगाकर हमला करना या दूर से जासूसी करना बेहद आसान है। ताइवान की कोस्ट गार्ड ने आधिकारिक बयान में बताया कि शुक्रवार को चीन का एक बड़ा कोस्ट गार्ड जहाज प्रातस आइलैंड्स के बिल्कुल करीब आ पहुंचा था, जबकि शनिवार को चीन का एक महासागरीय सर्वे जहाज भी वहां जा धमका। इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब चीन के कोस्ट गार्ड और सर्वे जहाज इस तरह मिलकर एकजुट होकर ताइवान की जासूसी के लिए तालमेल वाली कार्रवाई कर रहे हैं।
ताइवान पर जबरन कब्जे की धमकी
हद तब हो गई जब चीनी कोस्ट गार्ड के जहाज ने सीमा के पास आकर लाउडस्पीकर पर डराने वाले अंदाज में प्रसारण शुरू कर दिया। चीनी जहाज से चिल्लाकर कहा गया कि वे वहां 'कानून व्यवस्था' लागू करने की कार्रवाई कर रहे हैं और 'ताइवान का भविष्य केवल चीन के साथ एकीकरण में ही छिपा है'। यानी चीन अब सरेआम ताइवान के द्वीपों के पास खड़े होकर यह संदेश दे रहा था कि उसे चीन में मिलना ही होगा।
ताइवान का करारा जवाब
चीन की इस धौंस के सामने ताइवान के कोस्ट गार्ड के जवान भी पीछे नहीं हटे और तुरंत डटकर मोर्चा संभाल लिया। ताइवान के जहाजों ने बिना घबराए पलटवार करते हुए रेडियो पर चीनी जहाजों को सख्त और सीधा संदेश भेजा।
इस इलाके की शांति भंग करना बंद करो। तुम्हें तुरंत वापस लौट जाना चाहिए और अपने देश की सही सेवा के लिए लोकतंत्र के रास्ते पर चलना चाहिए, तानाशाही के रास्ते पर नहीं।
ताइवान की कोस्ट गार्ड ने दुनिया के सामने साफ कहा कि चीन इस क्षेत्र पर अपने अधिकार का एक 'भ्रम' खड़ा करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ताइवान की समुद्री संप्रभुता के खिलाफ किसी भी उकसावे वाली हरकत या जासूसी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
भारत का 'सेमीकंडक्टर पार्टनर' है ताइवान
गौरतलब है कि आज की तारीख में ताइवान भारत का बेहद अहम और रणनीतिक 'सेमीकंडक्टर' साझेदार बन चुका है। मोबाइल से लेकर फाइटर जेट तक में इस्तेमाल होने वाली एडवांस चिप्स बनाने में ताइवान का पूरी दुनिया में दबदबा है। भारत अपने 'मेक इन इंडिया' मिशन के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स का वैश्विक केंद्र बनने के लिए ताइवान की दिग्गज कंपनियों के साथ मिलकर देश में अरबों डॉलर के सेमीकंडक्टर प्लांट लगा रहा है। भारत और ताइवान की इसी बढ़ती नजदीकी से चीन बुरी तरह चिढ़ा हुआ है। चीन चाहता है कि वह ताइवान को डराकर अपने कब्जे में ले ले, ताकि दुनिया की सप्लाई चेन पर भी उसका नियंत्रण हो जाए।
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