PoK में चुनाव से पहले भड़की विरोध की चिंगारी, सरकार और जनता आमने-सामने, इस्लामाबाद को सीधी चुनौती

पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में 9 जून को प्रस्तावित बंद और लॉन्ग मार्च से पहले तनाव चरम पर है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के बड़े आंदोलन के ऐलान के जवाब में प्रशासन ने संगठन पर आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंध लगा दिया है।

पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में 9 जून को होने वाले बंद, चक्का जाम और लॉन्ग मार्च की घोषणा के बाद पूरे क्षेत्र का राजनीतिक तापमान तेजी से चढ़ गया है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने सरकार के खिलाफ व्यापक जनआंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है, जबकि प्रशासन ने इस संगठन पर आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत पाबंदी लगाकर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। चुनावी प्रक्रिया शुरू होने से ठीक पहले उभरे इस टकराव ने पूरे इलाके में बेचैनी और तनाव को और गहरा कर दिया है।

सुरक्षा बलों की तैनाती और कार्यकर्ताओं की हिरासत

सूत्रों के मुताबिक पीओजेके के अनेक हिस्सों में सुरक्षा बलों को बड़ी संख्या में तैनात किया गया है। JAAC से जुड़े कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया जा चुका है, वहीं कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट और संचार सेवाओं पर रोक लगाए जाने की खबरें भी सामने आ रही हैं।

बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रशासन ने पर्यटकों को 20 जून तक यह क्षेत्र छोड़ने की सलाह दी है। साथ ही कुछ विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं भी स्थगित कर दी गई हैं। दूसरी ओर JAAC ने स्पष्ट किया है कि वह अपना आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ाएगा।

अधूरे वादों को लेकर सरकार पर निशाना

संगठन का आरोप है कि 2025 में हुए समझौते के तहत जनता से किए गए वादे अब तक पूरे नहीं किए गए हैं। JAAC का कहना है कि बिजली दरों में राहत, आटे पर सब्सिडी, जलविद्युत परियोजनाओं की रॉयल्टी और शासन व्यवस्था में सुधार से जुड़े आश्वासन आज भी अधूरे पड़े हैं।

इसके अलावा पाकिस्तान में बसे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटों का मसला भी इस आंदोलन की एक बड़ी वजह बनकर उभरा है।

चुनावी कार्यक्रम से जुड़ी रणनीति

उल्लेखनीय है कि पीओजेके विधानसभा चुनाव 27 जुलाई को होने हैं और नामांकन प्रक्रिया 9 जून से शुरू हो रही है। ऐसे में JAAC ने जानबूझकर अपने आंदोलन का समय चुनावी कार्यक्रम के साथ जोड़ते हुए सरकार पर दबाव बढ़ाने की रणनीति अपनाई है।

उधर मानवाधिकार संगठनों ने सामाजिक और राजनीतिक सवालों पर आवाज उठाने वाले समूहों के खिलाफ आतंकवाद-रोधी कानूनों के इस्तेमाल पर गहरी चिंता जाहिर की है।

9 जून पर टिकी निगाहें

अब हर किसी की नजर 9 जून पर है, जब यह तस्वीर साफ होगी कि पीओजेके में जनता का आक्रोश कितना बड़ा रूप अख्तियार करता है और प्रशासन इस चुनौती से किस तरह निपटता है। चुनाव से ठीक पहले खड़ा हुआ यह संकट आने वाले दिनों में इस क्षेत्र की राजनीति को एक नई दिशा दे सकता है।

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