सीकर की बेटी अर्चना बिलोनिया का कमाल: 192.5 किलो वजन उठाकर बनाया विश्व रिकॉर्ड, मजदूर पिता का नाम किया रोशन

सीकर के रायपुरा गांव की रहने वाली अर्चना बिलोनिया ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर स्ट्रेंथ लिफ्टिंग में विश्व रिकॉर्ड कायम किया है। अभावों में पली-बढ़ी अर्चना ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का परचम लहराया है।

संघर्ष से सफलता का सफर

राजस्थान के सीकर जिले के छोटे से गांव रायपुरा की निवासी अर्चना बिलोनिया की कहानी किसी प्रेरणादायक फिल्म से कम नहीं है। एक साधारण मजदूर परिवार में जन्मी अर्चना ने आर्थिक तंगहाली और सुविधाओं के अभाव को कभी भी अपने सपनों की राह में बाधा नहीं बनने दिया। एक समय ऐसा भी था जब अभ्यास के लिए उन्हें कई किलोमीटर का सफर पैदल तय करके जिला खेल स्टेडियम पहुंचना पड़ता था। उनके पिता बंशीलाल बिलोनिया एक श्रमिक हैं और मां मोहनी देवी गृहिणी हैं। घर की आर्थिक स्थिति सीमित होने के बावजूद उनके माता-पिता ने अर्चना के हौसलों को हमेशा उड़ान दी। आज यही अर्चना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्ट्रेंथ लिफ्टिंग में भारत की पहचान बन चुकी हैं।

विश्व रिकॉर्ड और अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियां

अर्चना की सबसे बड़ी उपलब्धि उनका हालिया विश्व रिकॉर्ड है। उन्होंने थाईलैंड के पटाया में आयोजित 12वीं वर्ल्ड स्ट्रेंथ लिफ्टिंग एंड बेंच प्रेस चैंपियनशिप में हिस्सा लेते हुए स्ट्रेंथ लिफ्टिंग स्पर्धा में 192.5 किलोग्राम वजन उठाकर इतिहास रच दिया। इस चैंपियनशिप में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए। उनकी यह जीत न केवल उनके लिए बल्कि देश के लिए भी एक गर्व का क्षण है। इससे पूर्व वर्ष 2024 में कजाकिस्तान में आयोजित 11वीं वर्ल्ड स्ट्रेंथ लिफ्टिंग चैंपियनशिप में भी अर्चना ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। उस प्रतियोगिता में उन्होंने एक स्वर्ण पदक और इनक्लाइन बेंच प्रेस में रजत पदक हासिल किया था।

खेल के मैदान में पदकों की झड़ी

स्ट्रेंथ लिफ्टिंग के अलावा पावर लिफ्टिंग में भी अर्चना का प्रदर्शन अत्यंत प्रभावशाली रहा है। अब तक के अपने करियर में उन्होंने पावर लिफ्टिंग में एक स्वर्ण, चार रजत और पांच कांस्य पदक जीते हैं। स्ट्रेंथ लिफ्टिंग में उनके नाम अब तक कुल चार स्वर्ण पदक हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने चार कांस्य पदक प्राप्त किए हैं। इतने कम समय में इतनी अधिक उपलब्धियां हासिल करना यह दर्शाता है कि अर्चना अपनी खेल विधा में कितनी निपुण हैं।

एथलेटिक्स से पावर लिफ्टिंग तक का मोड़

अर्चना के खेल करियर की शुरुआत एथलेटिक्स से हुई थी। सीकर के श्री कल्याण कन्या महाविद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने के दौरान उन्होंने शॉटपुट का अभ्यास शुरू किया था। इसी दौरान कोच कैप्टन दुर्जन सिंह शेखावत की नजर उनकी शारीरिक क्षमता और शक्ति पर पड़ी। उन्होंने अर्चना की ताकत को भांप लिया और उन्हें पावर लिफ्टिंग के क्षेत्र में उतरने के लिए प्रेरित किया। कोच की सलाह के बाद अर्चना ने अपनी पूरी ऊर्जा वजन उठाने वाले खेलों में लगा दी और तब से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज वे अपनी मेहनत से खेल की दुनिया में एक बड़ा नाम बन चुकी हैं।

समर्थन और वर्तमान प्रशिक्षण

शुरुआती दौर में आर्थिक बाधाएं अर्चना के लिए बड़ी चुनौती थीं, लेकिन परिवार के अलावा कई भामाशाहों और शुभचिंतकों ने उनका भरपूर सहयोग किया। उन्हें खेल के आवश्यक उपकरण, जूते और किट उपलब्ध कराने में समाज के लोगों ने बड़ी भूमिका निभाई। वर्तमान में अर्चना अपने अभ्यास और डाइट का खर्च स्वयं उठा रही हैं। वे जयपुर के विद्याधर नगर में अपने कोच उदयभान रावत के सानिध्य में कड़ी ट्रेनिंग कर रही हैं। एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी के लिए नियमित प्रशिक्षण के साथ-साथ संतुलित आहार और फिटनेस पर काफी खर्च होता है, जिसे अर्चना पूरी प्रतिबद्धता के साथ मैनेज कर रही हैं।

अगला लक्ष्य: किर्गिजस्तान चैंपियनशिप

अपनी पिछली उपलब्धियों से संतुष्ट होने के बजाय, अर्चना अब अपनी अगली बड़ी प्रतियोगिता की तैयारियों में जुट गई हैं। आने वाले समय में 8 से 12 सितंबर तक किर्गिजस्तान में 13वीं इंटरनेशनल स्ट्रेंथ लिफ्टिंग एंड इनक्लाइन बेंच प्रेस 2026 चैंपियनशिप आयोजित होने जा रही है। अर्चना इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उनका एकमात्र लक्ष्य वहां भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर पदक जीतना और भारत के तिरंगे को और ऊंचा करना है। उनकी यह यात्रा आज देश के लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल बन गई है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो कोई भी उपलब्धि हासिल करना नामुमकिन नहीं है।

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