उत्तराखंड में अग्निवीरों के सुनहरे भविष्य की राह
देवभूमि उत्तराखंड के उन हजारों युवाओं के लिए यह बेहद राहत भरी खबर है जो भारतीय सेना में चार साल का अपना सेवा काल पूरा कर चुके हैं। अब इन पूर्व-अग्निवीरों के लिए सरकारी नौकरी हासिल करने का सफर काफी आसान होने वाला है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा भेजी गई एक अहम सिफारिश के बाद उत्तराखंड सरकार अब राज्य की भर्ती नियमावली में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। इस निर्णय के लागू होने के बाद, अग्निवीरों को सिविल सेवा या सुरक्षा बलों में भर्ती के दौरान सामान्य अभ्यर्थियों की तरह लंबी और कठिन चयन प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा।
गृह मंत्रालय की पहल और मुख्य सचिव को निर्देश
इस पूरी प्रक्रिया की शुरुआत केंद्र सरकार के स्तर से हुई है। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंदबर्द्धन को आधिकारिक पत्र भेजकर राज्य की मौजूदा भर्ती नियमावली में आवश्यक संशोधन करने का परामर्श दिया है। इस पत्र का मुख्य उद्देश्य पूर्व-अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों में चयन प्रक्रिया के दौरान लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता परीक्षा और शारीरिक मानक परीक्षा से छूट दिलाना है। सरकार का मानना है कि सेना के कड़े अनुशासन में चार साल बिताने वाले युवाओं के लिए दोबारा उन्हीं परीक्षाओं को देना उचित नहीं है, जिन्हें वे पहले ही सेना में भर्ती होने के समय पार कर चुके हैं।
क्यों जरूरी है यह बदलाव
केंद्र सरकार ने इस सिफारिश के पीछे बहुत ही व्यावहारिक तर्क दिए हैं। सेना में भर्ती होते समय युवा अत्यंत कठिन शारीरिक और चिकित्सकीय मानकों को पूरा करते हैं। इसके बाद चार साल की सेवा के दौरान वे जिस प्रकार के अनुशासित वातावरण और सामरिक ट्रेनिंग से गुजरते हैं, वह उन्हें किसी भी सिविल सेवा या सुरक्षा बल के लिए उत्कृष्ट उम्मीदवार बनाती है। गृह मंत्रालय का स्पष्ट मत है कि जिस युवा ने राइफल थामकर देश की सीमाओं की रक्षा की हो और कठोर प्रशिक्षण लिया हो, उसे फिर से शारीरिक दौड़ या लिखित परीक्षा के लिए मजबूर करना समय और संसाधनों की बर्बादी है। उनके पास पहले से ही वह अनुशासन और फिटनेस मौजूद है, जिसकी आवश्यकता पुलिस या अन्य सुरक्षा विभागों में होती है।
कैबिनेट बैठक में जल्द होगा संशोधन
इस निर्देश के बाद राज्य सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए काम शुरू कर दिया है। उत्तराखंड के सचिव कार्मिक शैलेश बगौली ने बताया कि केंद्र सरकार से प्राप्त पत्र के बाद कार्मिक विभाग ने अन्य सभी संबंधित विभागों के साथ गहन विचार-विमर्श की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वर्तमान भर्ती नियमों में आवश्यक बदलाव करने के लिए एक ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। इस प्रस्ताव को जल्द ही राज्य कैबिनेट की अगली बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा, जिसके बाद इसे कानून के रूप में लागू कर दिया जाएगा।
खाली पदों का ब्योरा जुटाने का काम जारी
भर्ती की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए केंद्र सरकार ने राज्य प्रशासन से उन सभी खाली पदों का विवरण मांगा है, जहां पूर्व-अग्निवीरों को उनके अनुभव के आधार पर प्रत्यक्ष रूप से या विशेष आरक्षण के जरिए समायोजित किया जा सकता है। विशेष रूप से पुलिस विभाग, आपदा प्रबंधन बल यानी SDRF, आबकारी विभाग और होमगार्ड जैसे महकमों में इन पूर्व-अग्निवीरों की नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त होगा। प्रशासन इन रिक्तियों की पहचान कर रहा है ताकि कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।
देवभूमि के युवाओं के लिए मिसाल
उत्तराखंड का हर दूसरा-तीसरा परिवार सीधे तौर पर सेना से जुड़ा हुआ है। अग्निवीर योजना के तहत चार साल बाद घर लौटने वाले युवाओं के लिए पुनर्वास और रोजगार की चिंता एक बड़ा मुद्दा बनी हुई थी। यदि उत्तराखंड सरकार इस प्रस्ताव को कैबिनेट में पारित कर देती है, तो यह पूरे भारत के लिए एक बड़ा उदाहरण बनेगा। इससे न केवल पूर्व-अग्निवीरों का भविष्य सुरक्षित होगा, बल्कि राज्य सरकार को भी दोहरा लाभ मिलेगा। पुलिस और सुरक्षा बलों को बिना किसी अतिरिक्त प्रशिक्षण खर्च के, पहले से ही प्रशिक्षित और अत्यधिक अनुशासित जवान सीधे काम पर मिल सकेंगे, जिससे राज्य की कार्यकुशलता में भी इजाफा होगा।
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