पाकिस्तान के पास आई शंघाई सहयोग संगठन की कमान
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में संपन्न हुए शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO के हालिया शिखर सम्मेलन के बाद संगठन का नेतृत्व अब बदल गया है। इस महत्वपूर्ण क्षेत्रीय संगठन की अध्यक्षता औपचारिक रूप से पाकिस्तान को सौंप दी गई है। अब पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर वर्ष 2026-27 के लिए SCO का अध्यक्ष बन चुका है। किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर जापारोव ने इस दौरान पाकिस्तान को यह जिम्मेदारी सौंपने की घोषणा की, जिसके बाद से ही राजनयिक गलियारों में भविष्य की संभावनाओं पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
इस्लामाबाद में होगा वर्ष 2027 का मेगा समिट
पाकिस्तान के अध्यक्षता संभालने के साथ ही अब आने वाले समय में संगठन से जुड़ी तमाम मंत्रीस्तरीय और उच्चस्तरीय बैठकें पाकिस्तान में ही आयोजित की जाएंगी। इन सब में सबसे अधिक चर्चा वर्ष 2027 में इस्लामाबाद में होने वाले वार्षिक SCO शिखर सम्मेलन को लेकर हो रही है। पाकिस्तान के लिए यह एक बड़ा अवसर है, क्योंकि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस शक्तिशाली संगठन की बैठकों की मेजबानी करेगा। हालांकि, इस समिट को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि क्या भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2027 में पाकिस्तान के इस्लामाबाद का दौरा करेंगे।
बिश्केक में क्या हुआ और क्या हासिल किया?
बिश्केक समिट के दौरान किर्गिस्तान ने 2025-26 के अपने कार्यकाल को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस दौरान संगठन की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के जश्न के साथ-साथ 'एससीओ के 25 साल: स्थायी शांति, विकास और समृद्धि की ओर साथ मिलकर' विषय को केंद्र में रखा गया था। समिट के अंत में सदस्य देशों ने 'बिश्केक घोषणापत्र' के साथ कुल 28 महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर सहमति दर्ज की और हस्ताक्षर किए। इन दस्तावेजों में जिन मुख्य विषयों पर जोर दिया गया है, उनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
- क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सुरक्षा का सुदृढ़ीकरण
- नशा तस्करी पर लगाम लगाने के लिए ठोस प्रयास
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीकों में सहयोग
- साइबर सुरक्षा और सूचना सुरक्षा की मजबूती
- ऊर्जा क्षेत्र में आपसी तालमेल
- परिवहन नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स को सुगम बनाना
- जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता का संरक्षण
क्या पीएम मोदी पाकिस्तान की यात्रा करेंगे?
भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे तनावपूर्ण संबंधों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित यात्रा पर अटकलें लगना स्वाभाविक है। भारत सरकार का रुख इस मामले पर अभी तक आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आया है। विदेश मंत्रालय के दृष्टिकोण से देखें तो भारत SCO को एक अत्यंत महत्वपूर्ण बहुपक्षीय मंच मानता है, जिसमें उसकी भागीदारी सक्रिय रही है। यह आवश्यक नहीं है कि हर SCO सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व प्रधानमंत्री स्तर पर ही हो। सरकार समय आने पर मौजूदा राजनयिक परिस्थितियों का आकलन करके ही यह तय करेगी कि भारत का प्रतिनिधित्व कौन करेगा। यदि प्रधानमंत्री मोदी स्वयं इस्लामाबाद नहीं जाते हैं, तो भारत की ओर से किसी अन्य वरिष्ठ राजनयिक या प्रतिनिधि को भेजने का विकल्प हमेशा खुला रहता है।
व्लादिमीर पुतिन के दौरे को लेकर भी बनी उत्सुकता
केवल प्रधानमंत्री मोदी ही नहीं, बल्कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की संभावित पाकिस्तान यात्रा भी अंतरराष्ट्रीय राजनीति के जानकारों के लिए चर्चा का केंद्र बनी हुई है। राष्ट्रपति पुतिन ने अब तक कभी पाकिस्तान की द्विपक्षीय यात्रा नहीं की है। हालांकि, SCO समिट का मंच एक बहुपक्षीय आयोजन है, न कि द्विपक्षीय दौरा। ऐसे में अगर राष्ट्रपति पुतिन 2027 के इस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए इस्लामाबाद का रुख करते हैं, तो यह पाकिस्तान के लिए एक बड़ी कूटनीतिक घटना होगी। रूस और पाकिस्तान के बीच हाल के वर्षों में संपर्क में वृद्धि हुई है, लेकिन पुतिन के इस दौरे पर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
भारत का स्पष्ट रुख और कूटनीतिक रणनीति
भारत की तरफ से इस पूरी घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सीबी जॉर्ज ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान के अध्यक्ष बनने से भारत की SCO के प्रति नीति में कोई बदलाव नहीं आएगा। भारत के लिए यह संगठन एक महत्वपूर्ण इकाई है और वह इसमें अपनी भागीदारी को जारी रखेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि विभिन्न देशों के साथ जुड़ाव और बैठकों में भागीदारी का निर्णय उचित समय आने पर अधिकृत स्तर पर लिया जाएगा। पाकिस्तान चाहे अध्यक्षता करे या कोई और, भारत के फैसले उसकी कूटनीतिक रणनीति और राष्ट्रीय हितों के अनुसार ही लिए जाएंगे। अब दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पाकिस्तान किस तरह से अपनी अध्यक्षता के दौरान इन जिम्मेदारियों का निर्वहन करता है और क्या 2027 तक दक्षिण एशिया का कूटनीतिक परिदृश्य किसी बड़े बदलाव की ओर बढ़ता है या नहीं।
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