नेपाल में प्रलय: सैलाब में बही 22,000 मुर्गियां, आशियाना उजड़ने के बाद बिलख पड़ा किसान

नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें 939 लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लापता हैं। त्रिशूली में एक पोल्ट्री किसान ने अपनी आंखों के सामने अपनी पूरी कमाई को बहते हुए देखा।

नेपाल में कुदरती कहर का तांडव

नेपाल के रसुवा और नुवाकोट जिलों में आई विनाशकारी बाढ़ ने आम जनजीवन को पूरी तरह तहस नहस कर दिया है। इस आपदा ने न केवल इंसानी जिंदगियों को निगला है, बल्कि मेहनतकश लोगों के सपनों को भी रातों-रात राख में बदल दिया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक इस भीषण जलप्रलय में 939 लोगों की दुखद मौत हो चुकी है। इसके अलावा 3,925 लोग लापता हैं, जिनमें 592 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। तबाही का आलम यह है कि त्रिशूली का पूरा बाजार पानी में समा गया और वहां के निवासी अपना सब कुछ खो बैठे हैं।

पोल्ट्री किसान का दर्द: एक झटके में सब खत्म

नुवाकोट निवासी रामकृष्ण के लिए 26 अगस्त की तारीख एक डरावने सपने की तरह है। रामकृष्ण वर्षों से मेहनत करके अपने पोल्ट्री फार्म को सींच रहे थे। उन्होंने बैंक से बड़ा कर्ज लेकर इस बिजनेस को खड़ा किया था, लेकिन कुदरत के रौद्र रूप ने सब कुछ चंद मिनटों में छीन लिया। बाढ़ के पानी में उनकी 22,000 मुर्गियां जिंदा बह गईं। इसके साथ ही मुर्गी दाने की 420 बोरियां भी पूरी तरह बर्बाद हो गईं। रामकृष्ण ने भावुक होते हुए बताया कि उन्होंने किसी तरह कूदकर अपनी जान तो बचा ली, लेकिन उनकी वर्षों की जमा-पूंजी और आजीविका का जरिया बाढ़ के सैलाब में बह गया। उनका कहना है कि गाड़ी तो जैसे-तैसे ठीक हो जाएगी, लेकिन इस नुकसान की भरपाई करना फिलहाल उनके लिए नामुमकिन सा लग रहा है। अब उन्हें बैंक का कर्ज चुकाने के लिए शून्य से शुरुआत करने की मजबूरी का सामना करना पड़ रहा है।

बाढ़ के कहर के आंकड़े

नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, नुवाकोट जिला इस आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। अकेले इस जिले में 95 लोगों की जान गई है। देश भर के अलग-अलग इलाकों से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार तबाही का विवरण इस प्रकार है:

  • चितवन में 279 शव बरामद किए गए हैं।
  • नवलपरासी ईस्ट में 216 शव मिले हैं।
  • नवलपरासी वेस्ट में 168 लोगों ने जान गंवाई है।
  • गोरखा जिले में 65 शव बरामद हुए हैं।
  • धाडिंग से 55 और तनहुं से 38 लोगों की मृत्यु की पुष्टि हुई है।
  • रसुवा में 23 लोगों की मौत हुई है।

इसके अतिरिक्त, पूरे देश में करीब 279 लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव कार्य अभी भी युद्धस्तर पर जारी हैं, लेकिन लापता लोगों की बड़ी संख्या चिंता का विषय बनी हुई है।

रेस्क्यू ऑपरेशन और भारतीयों की सुरक्षा

इस संकट की घड़ी में नेपाली सेना द्वारा चलाए जा रहे रेस्क्यू ऑपरेशन में अब तक 11,379 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। राहत की बात यह है कि इस आपदा में फंसे भारतीयों को भी सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता मिली है। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) के आधिकारिक बयान के अनुसार, नेपाल में बाढ़ और मलबे में फंसे 158 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित इवेक्यूएट कर लिया गया है। बिदुर और उसके आसपास के क्षेत्रों में नेपाली सेना लगातार मलबे को हटाने और फंसे हुए लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

निष्कर्ष

नेपाल में आई यह बाढ़ न केवल एक भौगोलिक आपदा है, बल्कि यह उन हजारों परिवारों के लिए एक बड़ा झटका है जिन्होंने अपना सब कुछ इस मिट्टी में निवेश किया था। रामकृष्ण जैसे हजारों किसान और छोटे व्यवसायी अब सरकारी मदद और पुनर्वास की राह देख रहे हैं ताकि वे दोबारा अपनी जिंदगी को पटरी पर ला सकें। फिलहाल पूरा देश इस जख्म को भरने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अपनों को खोने और बर्बादी के मंजर को भुलाना किसी के लिए भी आसान नहीं होगा।

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