इंडोनेशिया के माउंट सिनाबुंग में भीषण विस्फोट, 3.5 किलोमीटर तक फैला राख का गुबार

इंडोनेशिया के उत्तरी सुमात्रा में स्थित माउंट सिनाबुंग ज्वालामुखी में सोमवार को अचानक जोरदार धमाका हुआ, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। आसमान में 3.5 किलोमीटर की ऊंचाई तक राख और धुएं का काला बादल छा गया और यह सिलसिला करीब एक घंटे तक जारी रहा।

ज्वालामुखी का रौद्र रूप और दहशत

इंडोनेशिया के उत्तरी सुमात्रा प्रांत में स्थित माउंट सिनाबुंग ज्वालामुखी ने एक बार फिर अपनी विनाशक शक्ति का प्रदर्शन किया है। सोमवार की सुबह स्थानीय समय के अनुसार ठीक 10 बजकर 17 मिनट पर इस ज्वालामुखी के भीतर एक भयानक विस्फोट हुआ। देखते ही देखते आसमान में राख और जहरीले धुएं का एक विशाल और काला गुबार उठने लगा, जो करीब 3.5 किलोमीटर की ऊंचाई तक जा पहुंचा। इस घटना ने पूरे कारो रीजेंसी इलाके में डर का माहौल पैदा कर दिया है। दशकों तक शांत रहने के बाद इस ज्वालामुखी का इस तरह जागना स्थानीय प्रशासन और भू-वैज्ञानिकों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

विस्फोट की तीव्रता और अवधि

इंडोनेशिया की नेशनल जियोलॉजिकल एजेंसी की प्रमुख लाना सारिया के मुताबिक, ज्वालामुखी से निकली राख बेहद घनी और गहरे काले रंग की थी, जिसने देखते ही देखते आसमान को ढक लिया। सिस्मोग्राम यंत्रों पर दर्ज आंकड़ों के अनुसार, इस विस्फोट की कंपन क्षमता 120 मिमी मापी गई है, जो इसकी भयावहता को दर्शाती है। हैरानी की बात यह है कि ज्वालामुखी से मलबे और धुएं का बाहर निकलने का यह तांडव पूरे 1 घंटे 1 मिनट और 48 सेकंड तक जारी रहा, जिससे पूरा इलाका थरथरा उठा।

प्रशासन की चेतावनी और सुरक्षा उपाय

ज्वालामुखी के अचानक सक्रिय होने के बाद सरकार ने तत्काल प्रभाव से हाई अलर्ट जारी कर दिया है। अधिकारियों ने स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को ज्वालामुखी के खतरनाक दायरे से दूर रहने के सख्त निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने ज्वालामुखी के मुख से 3 किलोमीटर के दायरे में सभी प्रकार की मानवीय गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अलावा, दक्षिण-पूर्व दिशा की ओर 4.5 किलोमीटर के क्षेत्र को अति संवेदनशील घोषित किया गया है। अधिकारियों ने विशेष रूप से नदियों के किनारे बसे लोगों को सतर्क रहने को कहा है, क्योंकि भारी बारिश की स्थिति में ज्वालामुखी से निकली राख और मलबा पानी के साथ मिलकर कोल्ड लावा फ्लो के रूप में नीचे आ सकते हैं, जो काफी घातक साबित होता है।

इतिहास और चेतावनी के संकेत

समुद्र तल से लगभग 2460 मीटर की ऊंचाई पर स्थित माउंट सिनाबुंग सदियों तक पूरी तरह शांत था, लेकिन 2010 में इसमें हुए अचानक विस्फोट ने सबको चौंका दिया था। इसके बाद से यह ज्वालामुखी रुक-रुक कर सक्रिय होता रहा है। साल 2013 और 2014 में भी इसमें बड़े विस्फोट दर्ज किए गए थे। मई 2016 में हुए भीषण विस्फोट में कम से कम 7 लोगों की जान भी चली गई थी। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बार का विस्फोट अचानक नहीं हुआ, बल्कि 1 अगस्त से 12 अगस्त के बीच ज्वालामुखी में भूकंपीय हलचल और गैस के रिसाव जैसी गतिविधियों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई थी, जो बड़े खतरे का संकेत दे रही थीं। फिलहाल विशेषज्ञ माउंट सिनाबुंग की हर गतिविधि पर बारीक नजर रखे हुए हैं और दिन के साथ ही धुआं और राख के गुबार में भी बदलाव महसूस किया जा रहा है, जो अब ग्रे से सफेद रंग में तब्दील हो रहा है।

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