चाघाई में भीषण संघर्ष और पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान
पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रमों के केंद्र माने जाने वाले चाघाई जिले में स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब बलूच लिबरेशन आर्मी ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर एक बड़ा और घातक हमला किया। 31 अगस्त की रात को हुई इस लंबी और भीषण मुठभेड़ में पाकिस्तानी सेना को भारी जान-माल का नुकसान उठाना पड़ा है। संगठन के दावों के अनुसार, इस हमले में सेना के एक कैप्टन सहित 20 पाकिस्तानी सैन्यकर्मी मारे गए हैं। यह क्षेत्र न केवल बलूचिस्तान का हिस्सा है, बल्कि सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान ने 1998 में यहीं पर अपने ऐतिहासिक परमाणु परीक्षण किए थे।
हमले की पृष्ठभूमि और घटनाक्रम
बलूच लिबरेशन आर्मी के प्रवक्ता आजाद बलूच द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि 31 अगस्त की शाम करीब 6 बजे संगठन के लड़ाकों ने चाघाई जिले के दश्त गोरान स्थित नादिराबाद इलाके में अपनी घेराबंदी शुरू की थी। इस दौरान वहां से पाकिस्तानी सेना का आठ वाहनों वाला एक काफिला गुजर रहा था। बलूच लिबरेशन आर्मी ने आरोप लगाया है कि इस सैन्य कार्रवाई में स्थानीय स्तर पर सक्रिय कुछ 'डेथ स्क्वॉड' के सदस्य भी पाकिस्तानी सेना का सहयोग कर रहे थे। बलूच लिबरेशन आर्मी ने पूरी योजना के साथ अलग-अलग मोर्चों पर अपनी स्थिति मजबूत की और सेना के काफिले को निशाना बनाना शुरू कर दिया। इस हमले में अत्याधुनिक हथियारों और रॉकेट लॉन्चरों का भरपूर इस्तेमाल किया गया, जिससे पाकिस्तानी सेना को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
परमाणु गढ़ चाघाई का सामरिक महत्व
चाघाई जिला पाकिस्तान के इतिहास में बेहद खास है। 28 मई 1998 को पाकिस्तान ने रास कोह की पहाड़ियों में भूमिगत परमाणु परीक्षण करके खुद को परमाणु संपन्न घोषित किया था। इसके तुरंत बाद 30 मई को भी एक अन्य परीक्षण किया गया था। इस कारण से यह इलाका पाकिस्तानी प्रतिष्ठान के लिए सुरक्षा और गर्व का एक बड़ा केंद्र है। यहां हुए इस हमले ने न केवल पाकिस्तानी सैन्य सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि यह भी दर्शाया है कि बलूच विद्रोही अब सेना के सबसे सुरक्षित समझे जाने वाले ठिकानों तक पहुंच बनाने में सक्षम हैं।
हमले का विवरण और सेना की घेराबंदी
संगठन के अनुसार, जैसे ही युद्ध शुरू हुआ, पाकिस्तानी सेना के चार वाहन सीधे तौर पर बलूच लड़ाकों की जद में आ गए। इन वाहनों को रॉकेट से निशाना बनाया गया, जिससे वे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। संगठन ने दावा किया कि रॉकेट हमलों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि इन वाहनों में सवार सभी सैनिक मौके पर ही ढेर हो गए। एक विशेष ऑपरेशन के तहत, संगठन के एक लड़ाके ने सीधे तौर पर एक सैन्य वाहन को रॉकेट से उड़ा दिया। बाद में, इन क्षतिग्रस्त वाहनों को क्रेन की मदद से घटनास्थल से हटाया गया। बलूच लिबरेशन आर्मी ने दावा किया है कि सेना अपने वास्तविक नुकसान को छुपाने का प्रयास कर रही है और हताहत हुए जवानों की सही संख्या को सार्वजनिक नहीं कर रही है।
कैप्टन उबैद की मौत और सेना के दावे पर सवाल
बलूच लिबरेशन आर्मी ने इस हमले में मारे गए सैनिकों की पहचान उजागर करने का दावा भी किया है। उनके अनुसार, मारे गए 20 सैन्यकर्मियों में कैप्टन उबैद (147/LC, पूर्व में 69/PR, 60/W) भी शामिल थे। बलूच संगठन का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना अक्सर अपने सैन्य अधिकारियों और जवानों की मौत के आंकड़ों को छिपाती है ताकि उनका मनोबल न गिरे। प्रेस रिलीज में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सेना ने इस बार भी अपने मृत और घायल सैनिकों की संख्या तथा हथियारों के नुकसान को छिपाया है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
शाम से शुरू होकर सुबह तक चली जंग
यह भीषण मुठभेड़ 31 अगस्त की शाम 6:30 बजे से शुरू होकर 1 सितंबर की सुबह 4 बजे तक रुक-रुककर जारी रही। इस लंबी अवधि के संघर्ष में दोनों तरफ से भारी गोलीबारी हुई। बलूच लिबरेशन आर्मी ने स्थानीय निवासियों के हवाले से बताया है कि रात के दौरान दर्जनों एंबुलेंस लगातार घटनास्थल पर आती-जाती रहीं, जिनमें मारे गए सैनिकों के शव और घायलों को ले जाया जा रहा था। संगठन ने यह भी दावा किया है कि इस लड़ाई के दौरान पाकिस्तानी सेना ने अपने बचाव के लिए ड्रोन का उपयोग भी किया था। बावजूद इसके, पाकिस्तानी सेना को अपनी घेराबंदी तोड़ने और भारी नुकसान के साथ पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा।
अपने दो लड़ाकों को खोने पर बलूच लिबरेशन आर्मी का बयान
इस संघर्ष में बलूच लिबरेशन आर्मी के भी दो लड़ाके वीरगति को प्राप्त हुए, जिन्हें संगठन ने 'शहीद' का दर्जा दिया है। इनके नाम संगत नासिर उर्फ बाबा और संगत बशीर उर्फ शौकत हैं। संगठन ने इनके योगदान को याद करते हुए बताया कि दोनों ने दुश्मन के खिलाफ अद्भुत साहस का परिचय दिया। संगत नासिर उर्फ बाबा बलूचिस्तान के मंगुचर इलाके के निवासी थे और 2014 में संगठन से जुड़े थे। उन्होंने शोर परोद, नागाहो और दल्बंदिन जैसे महत्वपूर्ण इलाकों में कई सफल अभियानों का नेतृत्व किया था। दूसरी ओर, संगत बशीर उर्फ शौकत कलात जिले के गज़ग के रहने वाले थे, जिन्होंने 2015 से संगठन के साथ जुड़कर विभिन्न मोर्चों पर अपनी बहादुरी की मिसाल कायम की थी। उनकी मृत्यु को संगठन ने बलूच संघर्ष के लिए एक बड़ी क्षति बताया है।
संघर्ष जारी रखने का संकल्प
प्रेस विज्ञप्ति के समापन में बलूच लिबरेशन आर्मी ने स्पष्ट किया है कि वे बलूचिस्तान से पाकिस्तानी सेना की पूर्ण वापसी और अपने लक्ष्यों की प्राप्ति तक संघर्ष को और अधिक तीव्र करेंगे। यह हमला उनके जारी सैन्य अभियानों की एक कड़ी मात्र है। संगठन का मानना है कि जब तक उनकी भूमि पर बाहरी सेना का कब्जा रहेगा, वे इसी तरह की कार्रवाइयों के जरिए जवाब देते रहेंगे। यह पूरा विवरण बलूच लिबरेशन आर्मी के प्रवक्ता आजाद बलूच द्वारा जारी आधिकारिक बयानों पर आधारित है।
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