चुनावी पिच पर नया दांव
उत्तराखंड में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद जिस प्रकार की कथित शुद्धीकरण की घटना सामने आई है, उसे लेकर कांग्रेस अब आक्रामक तेवर अपना रही है। पार्टी इस मामले को केवल एक व्यक्ति विशेष के अपमान तक सीमित रखने के बजाय इसे बड़े राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की कवायद में जुटी है। कांग्रेस का मानना है कि इस घटना के जरिए जनता के बीच एक बड़ा भावनात्मक संदेश भेजा जा सकता है।
दलित अस्मिता को बनाया मुख्य मुद्दा
कांग्रेस इस पूरी घटना को दलित अस्मिता और उनके संवैधानिक अधिकारों से जोड़कर एक प्रभावशाली नैरेटिव तैयार कर रही है। पार्टी आलाकमान का स्पष्ट मानना है कि इस मुद्दे के माध्यम से वे समाज के उस वर्ग तक पहुंच सकते हैं जो खुद को उपेक्षित महसूस करता है। पार्टी के रणनीतिकारों का ध्यान विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों पर केंद्रित है, जहां दलित मतदाताओं की संख्या निर्णायक भूमिका निभाती है।
संविधान से दलित खतरे की ओर
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस ने 2024 के लोकसभा चुनाव में संविधान खतरे में है के नारे के साथ जो सफलता हासिल की थी, उसी फॉर्मूले को पार्टी अब नए सिरे से लागू करना चाहती है। अब पार्टी ने संविधान खतरे में है की तर्ज पर दलित खतरे में हैं का नया एजेंडा सेट करने का मन बना लिया है। राहुल गांधी की प्लानिंग इसी नैरेटिव के इर्द-गिर्द घूम रही है ताकि हाशिए पर रहने वाले समुदायों के बीच अपनी पैठ को और मजबूत किया जा सके।
पार्टी की अगली रणनीति
- दलितों के साथ होने वाले कथित भेदभाव को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना।
- उत्तर प्रदेश और पंजाब में व्यापक जनसंपर्क अभियान शुरू करना।
- भाजपा पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाकर सामाजिक ध्रुवीकरण की कोशिश करना।
- संविधान और दलित अधिकारों को एक साथ जोड़कर चुनावी माहौल तैयार करना।
https://hindi.news18.com/news/nation/why-congress-is-turning-kharge-shuddhikaran-row-into-a-bigger-dalit-narrative-what-is-rahul-gandhi-planning-10799387.html