बिश्केक में कूटनीति का महामंच
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह सम्मेलन संगठन की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित हुआ, जिसका मुख्य विषय 'स्थायी शांति, विकास और समृद्धि के लिए मिलकर काम करना' रखा गया था। इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की उपस्थिति अत्यंत प्रभावी रही और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सम्मेलन से इतर कई देशों के अपने समकक्षों के साथ मुलाकात कर कूटनीतिक संबंधों को नई दिशा दी।
जयशंकर की सक्रियता और द्विपक्षीय बातचीत
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सम्मेलन के दौरान रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची, चीन के विदेश मंत्री वांग यी और ताजिकिस्तान के विदेश मंत्री सिरोजिद्दीन मुहरिद्दीन से मुलाकात की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा की गई तस्वीरों में वे इन नेताओं के साथ बेहद सहज नजर आए। रूसी और ईरानी विदेश मंत्रियों के साथ हुई चर्चा के बारे में उन्होंने विस्तार से जानकारी दी। वहीं, चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ हुई बैठक के बारे में उन्होंने संक्षिप्त और स्पष्ट टिप्पणी की कि उनसे मिलना सुखद रहा। ताजिकिस्तान के विदेश मंत्री के साथ हुई बैठक को भी उन्होंने अत्यंत सकारात्मक और सार्थक बताया।
मोदी, पुतिन और जिनपिंग का जुटान
शिखर सम्मेलन में दुनिया के कई दिग्गज नेता एक साथ जुटे, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का नाम प्रमुख है। मंच पर इन शीर्ष नेताओं की उपस्थिति ने पूरे विश्व का ध्यान अपनी ओर खींचा। समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी कीं, जिनमें क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई।
आतंकवाद पर भारत का कड़ा रुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन के दौरान आतंकवाद के खिलाफ भारत का सख्त रवैया दोहराया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मौजूदगी में उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के मुद्दे पर दुनिया का कोई भी देश दोहरा रवैया नहीं अपना सकता। प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक शांति के लिए आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को जड़ से उखाड़ना बेहद जरूरी है। उन्होंने सदस्य देशों से आह्वान किया कि वे आतंकवाद के खिलाफ ठोस और सामूहिक कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध हों।
सम्मेलन का महत्व
यह 26वां एससीओ शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक राजनीति में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। एससीओ के 25 वर्षों के सफर ने इस मंच को एशिया के सुरक्षा और आर्थिक सहयोग का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना दिया है। बिश्केक में हुई इन मुलाकातों और वार्ताओं से साफ है कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को बरकरार रखते हुए पड़ोसी और मित्र देशों के साथ रिश्तों को और अधिक मजबूत करने के लिए पूरी तरह गंभीर है।
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