NEET पेपर लीक विरोध: प्रदर्शनकारी छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से बहुत बड़ी राहत, दर्ज प्राथमिकियां रद्द करने का ऐतिहासिक आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का प्रयोग करते हुए देश भर में NEET पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर दर्ज सभी प्राथमिकियों को रद्द करने का निर्देश दिया है।

नीट (NEET) परीक्षा में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के खिलाफ देश भर में हुए व्यापक छात्र प्रदर्शनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बहुत बड़ा फैसला सुनाया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत प्राप्त अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए आंदोलनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिकियों (FIR) को निरस्त करने का आदेश दिया है। इस अत्यंत महत्वपूर्ण मामले पर सुप्रीम कोर्ट में प्रधान न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने गंभीरता से सुनवाई की।

सभी राज्यों में दर्ज प्राथमिकियां होंगी निरस्त

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में दिल्ली, असम, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और बिहार में आंदोलनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिकियों को रद्द करने का स्पष्ट निर्देश दिया है। अदालत ने साफ किया है कि दिल्ली पुलिस केवल उन 2,873 लोगों के खिलाफ ही FIR को जारी रखेगी, जिनके खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसके साथ ही मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि यदि देश के किसी भी राज्य में इस प्रदर्शन से जुड़ी कोई ऐसी प्राथमिकी दर्ज है जिसकी जानकारी अभी अदालत को नहीं दी गई है, तो संबंधित राज्य सरकारें उसे रद्द करने की मांग का विरोध नहीं करेंगी।

छात्रों के खिलाफ अब नहीं दर्ज होगी कोई नई प्राथमिकी

सर्वोच्च अदालत ने अपने दिशा-निर्देशों में कहा कि हम संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत इन आवेदनों को स्वीकार करते हुए यह आदेश जारी कर रहे हैं कि यदि किसी भी राज्य में इन्हीं मामलों को लेकर कोई अन्य प्राथमिकी दर्ज है, तो उस पर चल रही जांच को तत्काल बंद कर दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि पेपर लीक के खिलाफ केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ अब कोई भी नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और प्राथमिकियों का ब्योरा

प्रधान न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान आंदोलन की पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले दिनों 20 जुलाई से 25 जुलाई के बीच दिल्ली के जंतर-मंतर और उसके आसपास के क्षेत्रों में हजारों की संख्या में छात्रों ने एकजुट होकर बड़ा आंदोलन किया था। इस प्रदर्शन के बाद कानून व्यवस्था के तहत पुलिस ने कुल 13 प्राथमिकियां दर्ज की थीं। अदालत में दिल्ली, महाराष्ट्र, असम, बिहार और पश्चिम बंगाल से याचिकाएं आई हैं जिनमें इन प्राथमिकियों का पूरा ब्योरा दिया गया है। कोर्ट को यह भी सूचित किया गया है कि दिल्ली पुलिस केवल पुराने आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,873 लोगों पर ही नई FIR दर्ज करेगी और इसके अलावा अन्य किसी भी सामान्य छात्र के खिलाफ कोई नई प्राथमिकी दर्ज नहीं होगी।

आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजे के लिए बनेगी नीति

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान उन छात्रों के प्रति भी गहरी संवेदनशीलता दिखाई जिन्होंने इस परीक्षा के मानसिक तनाव में आकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। NEET परीक्षा 2026 के तनाव के कारण आत्महत्या करने वाले पीड़ित छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने के संवेदनशील मुद्दे पर अदालत को बताया गया कि इस संबंध में एक व्यापक नीति अगले 3 महीने के भीतर तैयार कर ली जाएगी। अदालत ने कड़ा निर्देश दिया कि इस नीति निर्माण की प्रक्रिया को 3 महीने की निश्चित अवधि में पूरा करके पीड़ित परिवारों को जल्द से जल्द मुआवजा प्रदान किया जाए।

https://www.indiatv.in/india/national/student-protest-cjp-fir-registered-against-the-students-will-be-cancelled-supreme-court-order-2026-09-01-1240633