किर्गिजस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने दुनिया भर के कूटनीतिक और आर्थिक हलकों में बड़ी हलचल पैदा कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान शुरू हुए वैश्विक टैरिफ वॉर और अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल के बीच, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की आपसी गर्मजोशी ने एक नए वैश्विक समीकरण की झलक दिखा दी है। इस तस्वीर ने न केवल वॉशिंगटन में बैठे डोनाल्ड ट्रंप की चिंताएं बढ़ा दी हैं, बल्कि इस्लामाबाद में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के माथे पर भी पसीना ला दिया है।
अमेरिकी अखबार 'न्यूयॉर्क टाइम्स' ने भी हाल ही में स्वीकार किया है कि किस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक स्तर पर मिलने वाली बड़ी चुनौतियों को भारत के लिए शानदार अवसरों में बदल दिया है। वर्तमान में जहां चीन और रूस जैसे बड़े देशों की आर्थिक रफ्तार थोड़ी सुस्त पड़ी है, वहीं भारतीय अर्थव्यवस्था 7.8 फीसद की तीव्र गति से आगे बढ़ रही है। डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीतियों के कारण उपजे ताजा हालातों ने नई दिल्ली को वैश्विक स्तर पर नए और मजबूत आर्थिक मोर्चे तैयार करने के लिए प्रेरित किया है, जिसका असर अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है।
डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ वॉर और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ के नारे के साथ व्हाइट हाउस में दूसरी बार सत्ता में आए हैं। दोबारा पद संभालते ही उन्होंने वैश्विक स्तर पर एक बड़ा टैरिफ वॉर छेड़ दिया है। उन्होंने न केवल अपने व्यावसायिक प्रतिद्वंद्वियों बल्कि अपने मित्र देशों के खिलाफ भी टैक्स की भारी बमबारी शुरू कर दी है। ट्रंप की यह टैरिफ नीति भारत, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों के आर्थिक हितों के खिलाफ है। इसके अलावा, अमेरिका ने ईरान के साथ संघर्ष में कूदकर मध्य-पूर्व की स्थिति को और अधिक नाजुक बना दिया है।
मौजूदा वैश्विक हालातों में जहां यूरोपीय देश किसी भी तरह का आर्थिक नेतृत्व करने की स्थिति में नहीं दिख रहे हैं, वहीं भारत, चीन, रूस और ब्राजील जैसे बड़े देशों का एक मंच पर आना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। भारत और चीन दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले दो विशाल देश हैं, जिनके पास एक बहुत बड़ा घरेलू बाजार है। दुनिया भर की कूटनीतिक और आर्थिक शक्तियों की नजरें इन बाजारों पर टिकी रहती हैं। डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति ने भारत जैसे रणनीतिक मित्र देश को भी अपनी योजनाओं में बदलाव करने पर मजबूर कर दिया है। अपनी अर्थव्यवस्था को और अधिक गतिशील बनाने के लिए भारत ने दुनिया के तमाम देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाना शुरू कर दिया है, जिसमें उसे बड़ी कामयाबी भी मिल रही है।
बिश्केक की ऐतिहासिक तस्वीर और कूटनीतिक संदेश
मंगलवार 1 सितंबर 2026 को बिश्केक में आयोजित SCO शिखर सम्मेलन के दौरान एक बेहद महत्वपूर्ण दृश्य देखने को मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बेहद गर्मजोशी के साथ मुलाकात हुई। तीनों बड़े नेताओं के चेहरों पर तैरती मुस्कान इस बात का स्पष्ट संकेत थी कि भविष्य की वैश्विक कूटनीति किस दिशा में आगे बढ़ रही है।
इस त्रिपक्षीय मुलाकात से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के बीच एक बेहद खास द्विपक्षीय बैठक भी हुई थी, जिसमें दोनों देशों के बीच आपसी रणनीतिक और सैन्य सहयोग को बढ़ावा देने पर गहन चर्चा हुई। गौरतलब है कि भारत और रूस के शीर्ष नेताओं के बीच यह मुलाकात उस समय हुई है, जब भारत द्वारा रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की 5 अतिरिक्त स्क्वाड्रन की खरीद को लेकर बातचीत सामने आई है। इस बड़ी रक्षा डील के बीच तीनों देशों के प्रमुखों की इस मुस्कुराती हुई तस्वीर ने जहां वॉशिंगटन में बेचैनी बढ़ा दी है, वहीं सम्मेलन स्थल के किसी कोने में मौजूद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को माथे का पसीना पोछने पर मजबूर कर दिया है।
पाकिस्तानी खेमे में घबराहट और बेहाली के कारण
कुछ समय पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और देश के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को व्हाइट हाउस में आमंत्रित किया था, जहां उन्हें उनकी पसंद का विशेष हलाल भोजन परोसा गया था। लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। ट्रंप के इस टैरिफ वॉर के बाद भारत अब इस्लामाबाद के परम मित्र कहे जाने वाले चीन के भी कूटनीतिक रूप से करीब आ रहा है। इसके अतिरिक्त, भारत और रूस की गहरी रणनीतिक दोस्ती से पूरी दुनिया भली-भांति परिचित है।
पाकिस्तानी हुकूमत की घबराहट के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- रूसी हथियारों का दम: रूस लंबे समय से भारत का सबसे बड़ा सैन्य उपकरण और हथियार निर्यातक रहा है। रूसी तकनीक से बने Su-30MKI लड़ाकू विमानों ने ही पाकिस्तान पर ब्रह्मोस मिसाइल बरसाई थी, जिससे पाकिस्तानी रक्षा विश्लेषक आज भी खौफ में रहते हैं।
- वैश्विक मंचों पर बढ़ता दबदबा: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के इस बड़े मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कूटनीतिक रुतबा और उनकी स्वीकार्यता देखकर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का असहज होना स्वाभाविक है।
- चीन और भारत का समन्वय: पाकिस्तान को हमेशा यह भरोसा रहता था कि चीन हर मुद्दे पर उसके साथ खड़ा रहेगा, लेकिन भारत और चीन के बीच बढ़ रहा आर्थिक तालमेल पाकिस्तान के लिए बड़ा कूटनीतिक झटका है।
अभी BRICS बाकी है: ट्रंप और पाकिस्तान की असली परीक्षा
कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि बिश्केक में आयोजित यह शिखर सम्मेलन तो केवल एक शुरुआत मात्र है। असली परीक्षा अभी बाकी है क्योंकि इस सम्मेलन के बाद अगला बड़ा धमाका होने वाला है। इसके बाद अगला ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन भारत की मेजबानी में आयोजित होने जा रहा है।
भारत में होने वाले इस आगामी ब्रिक्स सम्मेलन में एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक साथ मंच साझा करते हुए दिखाई देंगे। यह मंच विकासशील देशों के एक नए आर्थिक गुट को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा, जो वैश्विक व्यापार में अमेरिकी डॉलर के आधिपत्य को चुनौती देने की दिशा में काम कर रहा है। यही वजह है कि बिश्केक से लेकर वॉशिंगटन और इस्लामाबाद तक, इस कूटनीतिक हलचल ने सभी विरोधी ताकतों की नींद उड़ा रखी है।
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