भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के मंच से दुनिया को एक बेहद मजबूत और स्पष्ट संदेश दिया है। 1 सितंबर, 2026 को आयोजित इस महत्वपूर्ण वैश्विक बैठक में प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के मुद्दे पर बिना किसी देश का नाम लिए पाकिस्तान जैसी ताकतों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी तरह का दोहरा मापदंड या 'डबल स्टैंडर्ड' बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही, उन्होंने किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर वहां के नागरिकों और राष्ट्रपतियों को हार्दिक बधाई दी और दोनों देशों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की सराहना की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन के दौरान न केवल आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता का आह्वान किया, बल्कि शंघाई सहयोग संगठन के पिछले 25 वर्षों के सफल सफर का लेखा-जोखा पेश करते हुए अगले 25 वर्षों के लिए एक स्पष्ट और व्यावहारिक दृष्टिकोण भी दुनिया के सामने रखा। उन्होंने कहा कि समय आ गया है जब हमें केवल योजनाओं तक सीमित न रहकर ठोस परिणामों पर ध्यान केंद्रित करना होगा। इसके लिए उन्होंने सुरक्षा, संपर्क और अवसर के तीन महत्वपूर्ण स्तंभों को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया।
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सफर के 25 वर्ष और भविष्य का दृष्टिकोण
अपने संबोधन की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन की इस ऐतिहासिक 25वीं वर्षगांठ पर सभी देशों के राष्ट्रप्रमुखों का स्वागत किया। उन्होंने गर्मजोशी से भरे स्वागत और बेहतरीन आतिथ्य के लिए किर्गिस्तान के राष्ट्रपति जापारोव के प्रति आभार व्यक्त किया। पीएम मोदी ने कहा कि यह हमारे लिए बेहद सौभाग्य की बात है कि हमें किर्गिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर यहां बिश्केक में रहने का मौका मिला। इसके साथ ही उन्होंने उज्बेकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर वहां के राष्ट्रपति और नागरिकों को भी अपनी और पूरे भारत की ओर से बधाई दी।
प्रधानमंत्री ने 'वर्ल्ड नोमैड गेम्स' (World Nomad Games) की भव्य उद्घाटन प्रदर्शनी का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस शानदार आयोजन में उन्हें किर्गिज़्स्तान की अत्यंत समृद्ध संस्कृति और हमारी साझा ऐतिहासिक विरासत की एक अद्भुत झलक देखने को मिली। प्रधानमंत्री के अनुसार, यही साझा विरासत, मूल्य और आपसी सांस्कृतिक जुड़ाव ही SCO परिवार की सबसे बड़ी ताकत और पहचान हैं।
पिछले ढाई दशकों की यात्रा का मूल्यांकन करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बीते 25 वर्षों के दौरान SCO ने यूरेशिया के एक अत्यंत विशाल और महत्वपूर्ण भूभाग में आपसी संवाद, सहयोग और विश्वास की एक बहुत ही मजबूत परंपरा को विकसित किया है। इस संगठन ने न केवल इस क्षेत्र के लोगों की भलाई के लिए काम किया है, बल्कि पूरी मानवता के विकास और प्रगति में भी अपना अमूल्य योगदान दिया है। हमने मिलकर सहयोग की एक ऐसी ठोस नींव तैयार की है जिस पर भविष्य की मजबूत इमारत खड़ी की जा सकती है। अब, जब हम अगले 25 वर्षों के नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं, तो हमारा मुख्य लक्ष्य इस आपसी सहयोग को स्पष्ट और दिखने वाले परिणामों में तब्दील करना होना चाहिए। आज की वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पूरी दुनिया एक बड़े अनिश्चितता और अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने इस साझा भौगोलिक क्षेत्र को साझा अवसरों के एक विशाल मंच के रूप में विकसित करें, ताकि हमारे इस प्रयास से इस क्षेत्र के आम लोगों के जीवन में वास्तविक और सकारात्मक बदलाव आ सके।
सुरक्षा (Security): आतंकवाद और उसके पूरे तंत्र को नेस्तनाबूद करने की पुकार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने संगठन की पिछली बैठक में भारत के दृष्टिकोण को स्पष्ट करने के लिए तीन मुख्य आधारों का जिक्र किया था। ये तीन स्तंभ हैं: 'एस यानी सिक्योरिटी (सुरक्षा), सी यानी कनेक्टिविटी (संपर्क), और ओ यानी अपॉर्चुनिटी (अवसर)'। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि हम इन तीनों बुनियादी स्तंभों को केवल एक दृष्टिकोण या कल्पना तक सीमित न रखें, बल्कि इन्हें धरातल पर उतारकर ठोस परिणामों में तब्दील करें।
इस दिशा में सबसे पहली और अनिवार्य आवश्यकता शांति और सुरक्षा की स्थापना है। प्रधानमंत्री ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि आतंकवाद आज भी पूरी मानव जाति और सभ्यता के लिए सबसे गंभीर और खतरनाक चुनौती बना हुआ है। इसके खिलाफ लड़ी जा रही वैश्विक लड़ाई में हम केवल क्रिया और प्रतिक्रिया (action-reaction) की सीमित सोच के साथ आगे नहीं बढ़ सकते। अगर हमें आतंकवाद का पूरी तरह से खात्मा करना है, तो हमें आतंकियों को मिलने वाली वित्तीय सहायता (financing), नए आतंकियों की भर्ती (recruitment), कट्टरपंथ के फैलाव (radicalisation) और उन्हें पनाह देने वाले सुरक्षित ठिकानों (safe havens) के पूरे तंत्र यानी इकोसिस्टम को जड़ से उखाड़कर फेंकना होगा।
पाकिस्तान और उसके समर्थकों को सीधे निशाने पर लेते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें वैश्विक स्तर पर एक सुर में बोलना होगा कि आतंकवाद जैसे संवेदनशील और गंभीर विषय पर किसी भी तरह के दोहरे मापदंड यानी डबल स्टैंडर्ड के लिए कोई स्थान नहीं हो सकता। जो देश आतंकवाद को अपनी सरकारी नीति के एक औजार या साधन के रूप में इस्तेमाल करते हैं, और जो आतंकियों को अपने यहाँ पनाह और हर तरह का समर्थन देते हैं, उन्हें पूरी दुनिया को मिलकर एक अत्यंत कड़ा संदेश देना होगा। हमें यह साफ करना होगा कि आतंकवाद कभी भी किसी भी देश के लिए एक रणनीतिक संपत्ति (strategic asset) नहीं बन सकता, बल्कि यह अंततः विनाश का ही कारण बनता है।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने अफगानिस्तान की स्थिति पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि एक शांत, सुरक्षित और स्थिर यूरेशिया की हमारी साझा आकांक्षा सीधे तौर पर अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता की बहाली से जुड़ी हुई है। भारत हमेशा से अफगानिस्तान के लोगों के सर्वांगीण विकास और उन्हें मानवीय सहायता प्रदान करने में अग्रणी रहा है, और भविष्य में भी भारत अपनी इस प्रतिबद्धता को पूरी जिम्मेदारी के साथ निभाता रहेगा।
आज की परस्पर जुड़ी हुई दुनिया के बारे में बात करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्तमान समय में सुरक्षा का दायरा पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक और जटिल हो चुका है। पश्चिम एशिया में चल रहे मौजूदा संकट ने स्पष्ट रूप से यह साबित कर दिया है कि किसी भी एक क्षेत्र में होने वाला संघर्ष केवल उसी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। उसका सीधा और नकारात्मक प्रभाव पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा (energy security), समुद्री व्यापार मार्गों (maritime trade) और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं (supply chains) पर पड़ता है। इस तरह के वैश्विक संकटों का सबसे अधिक और बुरा खामियाजा विकासशील देशों और 'ग्लोबल साउथ' (Global South) के देशों को भुगतना पड़ता है। यही वजह है कि भारत का हमेशा से यह स्पष्ट आह्वान रहा है कि किसी भी तरह के तनाव, मतभेद या युद्ध का समाधान युद्ध के मैदान (battlefield) में कभी नहीं हो सकता। सभी विवादों का हल केवल और केवल आपसी बातचीत (dialogue) और कूटनीति (diplomacy) के माध्यम से ही निकाला जा सकता है।
सुरक्षा के एक और बड़े पहलू पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी (Drug Trafficking) केवल एक साधारण या सामान्य अपराध नहीं है, बल्कि यह हमारी आने वाली युवा पीढ़ी के भविष्य और पूरे क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य के लिए एक अत्यंत गंभीर और भयावह खतरा बन चुका है। उन्होंने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि SCO के अंतर्गत सुरक्षा खतरों, संगठित अपराध (organised crime), सूचना सुरक्षा (information security) और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसी गंभीर चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए जिन विशेष केंद्रों की स्थापना की जा रही है, वह एक अत्यंत सकारात्मक और स्वागत योग्य कदम है। हमें इन केंद्रों को वास्तविक धरातल पर व्यावहारिक समन्वय और समय पर की जाने वाली ठोस कार्रवाइयों का एक प्रभावी माध्यम बनाना होगा।
संपर्क (Connectivity): संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान सर्वोपरि
अपने संबोधन के अगले चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साझा विकास के दूसरे सबसे बड़े आधार यानी मजबूत, सुरक्षित और विश्वसनीय संपर्क (connectivity) के बारे में विस्तार से बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत उन सभी क्षेत्रीय और वैश्विक प्रयासों का तहे दिल से समर्थन और स्वागत करता है, जो बाजारों को आपस में जोड़ते हैं, विभिन्न देशों के बीच आपसी व्यापार और वाणिज्य को सुगम बनाते हैं, और आर्थिक विकास के नए अवसरों के रास्ते खोलते हैं।
हालांकि, प्रधानमंत्री ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण शर्त को रेखांकित करते हुए कहा कि इन सभी कनेक्टिविटी प्रयासों को आगे बढ़ाते समय सभी सदस्य देशों की संप्रभुता (sovereignty) और उनकी क्षेत्रीय अखंडता (territorial integrity) का बिना किसी समझौते के पूरा सम्मान किया जाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने याद दिलाया कि यही संप्रभुता और सम्मान की भावना SCO चार्टर (SCO Charter) की मूल आत्मा और उसका बुनियादी सिद्धांत भी है।
भविष्य के कनेक्टिविटी मॉडल पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कनेक्टिविटी का स्वरूप पारंपरिक सीमाओं से परे जाकर और अधिक व्यापक तथा आधुनिक होगा। अब हमें केवल सड़कों (roads), रेलवे नेटवर्क (railways) और हवाई गलियारों (air corridors) तक ही सीमित नहीं रहना है, बल्कि इसके साथ-साथ हमें अपनी सीमा शुल्क प्रक्रियाओं (customs processes) को बेहद सरल और बाधारहित बनाना होगा। हमें डिजिटल दस्तावेजों (digital documentation) के उपयोग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देना होगा और अपने लॉजिस्टिक्स नेटवर्क (logistics networks) को अधिक सुगम, तीव्र और कुशल बनाना होगा ताकि व्यापार में लगने वाले समय और लागत को कम किया जा सके।
अवसर (Opportunity): जन-केंद्रित नीतियों से सीधे लोगों तक पहुँचे लाभ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन के तीसरे और अंतिम स्तंभ यानी 'अवसर' (Opportunity) की व्याख्या करते हुए कहा कि इस स्तंभ का सीधा और वास्तविक अर्थ यह है कि SCO के अंतर्गत किए जाने वाले सभी प्रकार के सहयोग और समझौतों का सीधा और वास्तविक लाभ हमारे देशों के आम लोगों तक पहुँचना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारी सबसे बड़ी और मूल्यवान पूंजी हमारे लोगों के बीच के आपसी संबंध (people-to-people ties) हैं। भारत हमेशा से SCO को केवल एक राजनीतिक या आर्थिक संगठन नहीं, बल्कि महान सभ्यताओं, विभिन्न संस्कृतियों और प्रगतिशील विचारों का एक अनूठा संगम मानता आया है।
उन्होंने प्रस्ताव रखा कि SCO के अगले 25 वर्षों के रोडमैप में लोगों के बीच के इन आपसी संबंधों को हमारे सभी प्रकार के सहयोग के बिल्कुल केंद्र में रखा जाना चाहिए। प्रधानमंत्री के अनुसार, हमारे इस पूरे प्रयास और संगठन की सफलता की वास्तविक कसौटी यह होनी चाहिए कि:
- हमारे द्वारा किए गए सामूहिक प्रयासों से इस क्षेत्र के युवाओं को कितने नए रोजगार और अवसर प्राप्त हुए।
- हमारे देश के उद्यमियों (entrepreneurs) के लिए कितने नए और बड़े वैश्विक बाजार खुले।
- हमारे किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक (technology) का कितना प्रत्यक्ष लाभ मिल पाया।
- हमारे देशों के आम नागरिकों का जीवन स्तर कितना बेहतर, सुगम और सुरक्षित हुआ।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यही हमारी सुरक्षा, संपर्क और अवसर की त्रिवेणी का वास्तविक और व्यावहारिक अर्थ है। SCO में हमारा सहयोग केवल सरकारों तक सीमित (government driven) नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे पूरी तरह से जनता द्वारा संचालित और जन-केंद्रित (people driven) होना चाहिए।
पीएम मोदी ने इस बात पर बेहद प्रसन्नता व्यक्त की कि किर्गिज़स्तान की वर्तमान अध्यक्षता के दौरान SCO के अंतर्गत युवा जुड़ाव (youth engagement) पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया गया है। उन्होंने याद दिलाया कि भारत ने SCO के मंच पर हमेशा से युवाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित पहल शामिल हैं:
- स्टार्ट-अप फोरम (Start-up Forum) की शुरुआत, जिससे नए उद्यमियों को मंच मिल सके।
- यंग ऑथर्स कॉन्क्लेव (Young Authors’ Conclave) का आयोजन, ताकि युवा लेखकों के विचारों को साझा किया जा सके।
- यंग साइंटिस्ट्स फोरम (Young Scientists’ Forum) जैसी अभिनव पहल, जो युवा वैज्ञानिकों को शोध के नए अवसर प्रदान करती है।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष भारत ने 'SCO सिविलाइजेशनल डायलॉग फोरम' (SCO Civilizational Dialogue Forum) की स्थापना का एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा था। उन्हें यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि इस महत्वपूर्ण फोरम का पहला सत्र इसी वर्ष भारत की मेजबानी में आयोजित होने जा रहा है। प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी सदस्य देशों की सक्रिय और सकारात्मक भागीदारी से यह फोरम SCO के भीतर एक बेहद जीवंत, सार्थक और मजबूत संवाद का एक सशक्त मंच बनकर उभरेगा।
साहित्यकार चिंगिज़ ऐतमातोव का संदेश और साझा भविष्य का संकल्प
अपने भाषण के समापन की ओर बढ़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किर्गिज़्स्तान के अत्यंत लोकप्रिय और महान साहित्यकार चिंगिज़ ऐतमातोव (Chingiz Aitmatov) के एक बेहद सुंदर और गहरे दार्शनिक विचार का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चिंगिज़ ऐतमातोव ने पूरी दुनिया को एक बहुत ही गंभीर सीख दी थी कि हम अक्सर उन बातों और पहलुओं पर बहुत अधिक ध्यान देते हैं जो हमें एक-दूसरे से अलग और दूर करती हैं, लेकिन हम उन बातों पर बहुत कम ध्यान देते हैं जो हमें आपस में जोड़ती हैं और एक सूत्र में पिरोती हैं।
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि आज के समय में शंघाई सहयोग संगठन के लिए चिंगिज़ ऐतमातोव का यह संदेश और विचार पूरी तरह से प्रासंगिक और आवश्यक है। हमारी सांस्कृतिक विविधता ही हमारी असली पहचान है और हमारा साझा उद्देश्य ही हमारी सबसे बड़ी सामूहिक शक्ति है। बिश्केक के इस ऐतिहासिक मंच से हम सभी को यही दृढ़ संकल्प लेकर आगे बढ़ना चाहिए कि:
- हमें अपने साझा भूगोल को साझा अवसरों में तब्दील करना है।
- हमें अपनी योजनाओं और विजन (vision) को धरातल पर उतारकर ठोस परिणामों (outcomes) में बदलना है।
- हमें अपने सरकारी सहयोग (government driven cooperation) को एक मजबूत जन-साझेदारी (people driven partnership) में विकसित करना है।
संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर दोहराया कि भारत इसी दृढ़ विश्वास, प्रतिबद्धता और आपसी सहयोग की भावना के साथ SCO परिवार की इस बेहद महत्वपूर्ण और साझा यात्रा में अपना हर संभव योगदान देने के लिए पूरी तरह से तत्पर और तैयार है। उन्होंने सभी उपस्थित राष्ट्रप्रमुखों को धन्यवाद कहते हुए अपना भाषण समाप्त किया।
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